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सात लोगों ने देखा था जिंदा जलाते, पर नहीं खोल रहे अपना मुंह

Updated at : 27 Dec 2024 9:08 PM (IST)
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सात लोगों ने देखा था जिंदा जलाते, पर नहीं खोल रहे अपना मुंह

बुद्धेश्वर उरांव की मौत के बाद गांव का कोई भी व्यक्ति पीड़ित परिवार के घर नहीं पहुंचा

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गुमला. गुमला के कोरांबी गांव में जलती चिता में ओझागुनी करने वाले बुद्धेश्वर उरांव को जिंदा जला कर हत्या करने के बाद गांव के लोग कुछ भी बताने को तैयार नहीं है. जिस समय बुद्धेश्वर उरांव को झरी उरांव व उसका बेटा करमपाल उरांव जिंदा जला रहे थे, उस वक्त वक्त गांव के सात से आठ लोग वहां मौजूद थे. घटना के वे प्रत्यक्ष गवाह हैं. परंतु वे लोग भी डर से कुछ नहीं बोल रहे हैं. पुलिस की पूछताछ से बचने के लिए कई लोग गांव छोड़ कर गुमला में रह रहे हैं. वहीं बुद्धेश्वर उरांव की हत्या के बाद भी गांव का कोई व्यक्ति पीड़ित के घर नहीं गया है, जबकि घटना हुए तीन दिन हो गये. दूसरी तरफ मृतक के परिजन अब बुद्धेश्वर उरांव के अधजले शव का गुमला से गांव लाने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि उसका अंतिम संस्कार किया जा सके. बुद्धेश्वर उरांव की हत्या के बाद उसकी पत्नी, बेटा व बहू डरे हुए हैं. उनलोगों ने कहा है कि घटना के बाद कई लोग पूछताछ करने घर आ रहे हैं, परंतु अब तक गांव का कोई व्यक्ति इस दुख की घड़ी में हमारा दर्द बांटने नहीं आया है. इधर हत्या के आरोपी झरी उरांव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दूसरा आरोपी झरी का बेटा करमपाल उरांव फरार है. आरोपी के घर में ताला लटका हुआ है.

एक प्रत्यक्षदर्शी ने जैसा देखा, वैसा बताया

कोरांबी गांव का एक व्यक्ति गुमला में रहता है. 23 दिसंबर को वह अपने गांव गया, तभी उसे पता चला कि झरी उरांव की बहन मंगरी उरांव की कुआं में डूबने से मौत हो गयी है. उक्त व्यक्ति ने गांव के कुछ लोगों की मदद से शव निकाला. शव का पोस्टमार्टम के बाद 24 दिसंबर को मंगरी देवी के शव का गांव के ही श्मशान घाट में अंतिम संस्कार हो रहा था, तभी मृतका मंगरी का भाई झरी उरांव ने अंतिम संस्कार में पहुंचे बुद्धेश्वर उरांव को टांगी से मारने लगा. किसी प्रकार बुद्धेश्वर को बचाया गया. परंतु कुछ देर के बाद फिर से अचानक झरी उरांव ने बुद्धेश्वर पर टांगी से वार कर दिया और उसे घसीटकर मंगरी उरांव की जलती चिता फेंक दिया. यह देख कर गांव के कई लोग वहां से डर के भाग गये. जबकि झरी उरांव व उसका बेटा करमपाल श्मशान घाट में ही जिंदा जल रहे बुद्धेश्वर को देखते रहे. जब तक कि बुद्धेश्वर जिंदा जल कर मर नहीं गया.

पत्नी ने कहा, किसी से जमीन विवाद नहीं

मृत बुद्धेश्वर उरांव की पत्नी फुलमनी देवी ने बताया कि उसका पति बुद्धेश्वर उरांव झाड़-फूंक का काम करता था. नौ सालों से वह झाड़-फूंक कर रहा है. गांव में कोई बीमार हो, तो उसके घर उसका पति जाकर जड़ी-बूटी व झाड़-फूंक कर इलाज करता था. कई बार तो बीमार लोग घर में भी आते थे. गांव के लोगों को मेरे पति के झाड़-फूंक पर विश्वास था. परंतु गांव के झरी उरांव व उसके बेटे करमपाल उरांव ने मेरे पति बुद्धेश्वर की बेरहमी से जिंदा जला कर मार डाला. हत्या के बाद गांव का कोई व्यक्ति मेरे घर नहीं आया है, जिससे हम डरे हुए हैं. फुलमनी देवी ने बताया कि आरोपी झरी उरांव के साथ उसके पति या उसके पूरे खानदान का कोई जमीन विवाद नहीं था. अगर कोई जमीन विवाद की बात कह रहा है, तो वह गलत है. उन्होंने पुलिस से जांच करने की मांग की है

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एसपी ने कहा, जमीन विवाद में हुई है हत्या

गुमला एसपी शंभु कुमार सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कहा है कि कोरांबी गांव की मंगरी देवी की मौत कुआं में गिरने से हो गयी थी. उसका अंतिम संस्कार गांव के टोंगरी इंदरा के पास किया जा रहा था, जहां पर अन्य ग्रामीणों के साथ बुद्धेश्वर उरांव उम्र करीब 60 वर्ष भी मौजूद था. मंगरी देवी के अंतिम संस्कार के समय अचानक झरी उरांव एवं उसका बेटा करमपाल उरांव द्वारा नशे की हालत में बुद्धेश्वर उरांव को टांगी से मार कर जलती चिता के आग में डाल कर जला दिया गया. घटना का मुख्य कारण पूर्व से दोनों के बीच जमीन विवाद का होना पाया गया है. पुलिस को सूचना मिलने पर आरोपी झरी उरांव को गिरफ्तार कर लिया गया है. अधजले शव को बरामद किया गया है. एफएसएल टीम से जांच करायी गयी है. शव के पोस्टमार्टम की कार्यवाही की जा रही है.

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