डायन बताकर वृद्ध की हत्या, पत्नी ने रातभर छिपकर बचाई जान, मुख्य आरोपित फरार

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 11 Jun 2026 5:46 PM

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वृद्ध की हत्या के बाद घर में शोकाकुल परिजन. फोटो: प्रभात खबर

Gumla News: गुमला के कोटेनगसेरा गांव में डायन-बिसाही के आरोप में 65 वर्षीय पालु खड़िया की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. पत्नी सुगी देवी किसी तरह भागकर बच गईं. मुख्य आरोपित बहुरा उरांव फरार है. पुलिस मामले की जांच में जुटी है और दोषियों की तलाश कर रही है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट

Gumla News: गुमला जिले के सदर थाना क्षेत्र अंतर्गत मुरकुंडा पंचायत के कोटेनगसेरा गांव में अंधविश्वास की एक दर्दनाक घटना सामने आई है. डायन-बिसाही के आरोप में 65 वर्षीय पालु खड़िया की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. इस दौरान उनकी पत्नी सुगी देवी पर भी हमला किया गया, लेकिन वह किसी तरह जान बचाकर भाग निकलीं और पूरी रात गांव के आसपास छिपकर गुजारने के बाद सुबह घर पहुंचीं, जहां उन्होंने अपने पति को मृत अवस्था में पाया.

बीमारी के बाद झाड़फूंक से शुरू हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार, मृतक के पड़ोसी बहुरा उरांव के परिवार के कुछ सदस्य पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे. बीमारी का कारण जानने के लिए उसने एक भगत को बुलाकर झाड़फूंक करवाई. आरोप है कि झाड़फूंक के दौरान भगत ने पालु खड़िया और उनकी पत्नी सुगी देवी पर डायन-बिसाही कर परिवार को बीमार करने का आरोप लगाया. इसके बाद मामला हिंसक रूप ले बैठा.

घर बुलाकर की गई मारपीट

परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, बहुरा उरांव ने पति-पत्नी को अपने घर बुलाया और उन पर डायन होने का आरोप लगाते हुए मारपीट शुरू कर दी. इस दौरान पालु खड़िया को बुरी तरह पीटा गया. ग्रामीणों का कहना है कि मारपीट के दौरान उन्हें दीवार पर पटक दिया गया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट लगी और वे बेहोश होकर गिर पड़े. वहीं सुगी देवी के साथ भी मारपीट की गई.

अंधेरे का फायदा उठाकर बचाई जान

अपनी जान को खतरे में देखते हुए सुगी देवी किसी तरह वहां से भाग निकलीं. आरोपितों ने उनका पीछा करने का भी प्रयास किया, लेकिन वह अंधेरे का फायदा उठाकर बच निकलने में सफल रहीं. डर और दहशत के माहौल में उन्होंने पूरी रात गांव के आसपास अलग-अलग स्थानों पर छिपकर बिताई. इंसान चांद पर पहुंच गया, कृत्रिम बुद्धिमत्ता बना ली और मोबाइल से दुनिया नाप रहा है, लेकिन कुछ जगहों पर अब भी बीमारी का इलाज अस्पताल नहीं, बल्कि अंधविश्वास से खोजा जाता है. नतीजा अक्सर किसी निर्दोष की जान के रूप में सामने आता है.

घायल अवस्था में घर छोड़ गए आरोपित

बताया जा रहा है कि महिला के भाग जाने के बाद आरोपित गंभीर रूप से घायल पालु खड़िया को उनके घर लाकर बिस्तर पर छोड़ गए. रातभर उन्हें कोई इलाज नहीं मिल सका, जिसके कारण उनकी मौत हो गई. सुबह जब सुगी देवी घर लौटीं तो उन्होंने अपने पति को मृत पाया. इसके बाद उन्होंने पड़ोसियों को पूरी घटना की जानकारी दी.

सूचना मिलते ही पहुंची पुलिस

घटना की सूचना मिलने के बाद सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची. एसआई विनय महतो के नेतृत्व में पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और ग्रामीणों से पूछताछ की. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए विभिन्न पहलुओं से जांच की जा रही है.

मुख्य आरोपित गांव छोड़कर फरार

घटना के बाद मुख्य आरोपित बहुरा उरांव गांव छोड़कर फरार हो गया है. पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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गांव में भय और आक्रोश का माहौल

इस हृदयविदारक घटना के बाद कोटेनगसेरा गांव में भय और आक्रोश का माहौल है. ग्रामीणों ने घटना की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. यह घटना एक बार फिर समाज में व्याप्त अंधविश्वास और डायन-बिसाही जैसी कुप्रथाओं की भयावह तस्वीर सामने लाती है. जागरूकता और वैज्ञानिक सोच की कमी के कारण आज भी कई निर्दोष लोग ऐसी अमानवीय घटनाओं का शिकार हो रहे हैं, जो किसी भी सभ्य समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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