झुंड से बिछड़े जंगली हाथी का तांडव, स्कूल समेत कई घरों को पहुंचाया नुकसान
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 11 Jun 2026 4:40 PM
हाथी के हमले से टूटी स्कूल की चहारदीवारी. फोटो: प्रभात खबर
Seraikela News: सरायकेला-खरसावां के चांडिल प्रखंड में झुंड से बिछड़े एक जंगली हाथी ने बिद्री, रांगाडीह और पुरानडीह गांवों में उत्पात मचाया. हाथी ने प्राथमिक विद्यालय समेत कई घरों को नुकसान पहुंचाया. वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
चांडिल से हिमांशु गोप की रिपोर्ट
Seraikela News: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड अंतर्गत बिद्री, रांगाडीह और पुरानडीह गांवों में बुधवार रात झुंड से बिछड़े एक जंगली हाथी ने जमकर उत्पात मचाया. हाथी के आतंक से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है. हाथी ने गांव में घुसकर प्राथमिक विद्यालय समेत कई ग्रामीणों के घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया और खाद्यान्न तथा घरेलू सामानों को भी भारी नुकसान पहुंचाया.
प्राथमिक विद्यालय में सबसे ज्यादा नुकसान
जानकारी के अनुसार बिद्री गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में हाथी ने सबसे अधिक तबाही मचाई. जंगली हाथी ने विद्यालय की पक्की चहारदीवारी, लोहे का मुख्य द्वार और किचन शेड को तोड़ दिया. मध्यान्ह भोजन के लिए रखे गए पांच बोरा चावल को हाथी खा गया. इसके अलावा किचन शेड में रखे बर्तन, ड्रम और बक्सों को भी नुकसान पहुंचाया. गुरुवार सुबह विद्यालय परिसर में हाथी के उत्पात के स्पष्ट निशान दिखाई दिए, जिससे ग्रामीणों और स्कूल प्रबंधन के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है.
कई ग्रामीणों के घर भी हुए क्षतिग्रस्त
हाथी के हमले में बिद्री गांव निवासी गणेश मांझी के घर की पक्की दीवार टूट गई. वहीं पुरानडीह गांव में प्रमिला देवी के घर का दरवाजा क्षतिग्रस्त हो गया. रांगाडीह गांव में निर्मला देवी और विजय मांझी के खपरैल तथा एलवेस्टर मकानों को भी नुकसान पहुंचा. ग्रामीणों के अनुसार हाथी शाम ढलने के बाद गांव में पहुंचा और अलग-अलग स्थानों पर घूमते हुए नुकसान पहुंचाता रहा.
हाथी के पहुंचते ही मच गई अफरा-तफरी
गांव में हाथी के प्रवेश करते ही लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया. ग्रामीण अपने-अपने घरों में दुबक गए और बच्चों तथा महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. जंगल और गांव के बीच की दूरी जब कागजों पर सिमट जाती है, तब असली परीक्षा गांव वालों की ही होती है. हाथी को न तो पंचायत की सीमा का पता होता है और न ही सरकारी फाइलों का.
मशाल और पटाखों से हाथी को खदेड़ा
बाद में ग्रामीणों ने एकजुट होकर मशाल जलाकर, ढोल-नगाड़े बजाकर और पटाखे फोड़कर हाथी को गांव से बाहर निकालने का प्रयास किया. काफी मशक्कत के बाद हाथी गांव छोड़कर वापस जंगल की ओर लौट गया. हालांकि उसके बाद भी ग्रामीणों के बीच भय का माहौल बना हुआ है.
वन विभाग की टीम ने किया नुकसान का आकलन
घटना की सूचना मिलने के बाद गुरुवार को वन विभाग की टीम प्रभावित गांवों में पहुंची. वन कर्मियों ने प्रभावित परिवारों के घरों और विद्यालय परिसर का निरीक्षण कर नुकसान का जायजा लिया. साथ ही ग्रामीणों को सतर्क रहने और हाथी के नजदीक नहीं जाने की सलाह दी. वन विभाग की ओर से लोगों से अपील की गई है कि हाथी दिखाई देने पर उसे भगाने की कोशिश अकेले न करें और तुरंत विभाग को इसकी सूचना दें.
गेरियाकोचा क्षेत्र में डेरा जमाए हुए है हाथी
ग्रामीणों ने बताया कि फिलहाल जंगली हाथी गेरियाकोचा क्षेत्र में मौजूद है. इसके कारण आसपास के कई गांवों के लोग भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन बिता रहे हैं. लोगों को आशंका है कि हाथी फिर से गांवों की ओर रुख कर सकता है.
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मुआवजे और सुरक्षा की मांग
ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि हाथी को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर खदेड़ा जाए और जिन परिवारों तथा विद्यालय को नुकसान हुआ है, उन्हें जल्द मुआवजा दिया जाए. इधर वन विभाग की टीम लगातार हाथी की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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