हजारीबाग में 578 समूहों को मिलेगा बकरा, अब तक 225 समूह हो चुके हैं लाभान्वित

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 11 Jun 2026 3:51 PM

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गुरुवार को पदमा प्रखंड लाभार्थियों के बीच बकरी का वितरण करते पशुपालन कर्मी. फोटो: प्रभात खबर

Hazaribagh News: हजारीबाग में मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत 578 समूहों को बकरा विकास योजना का लाभ मिलेगा. अब तक 225 समूह लाभान्वित हो चुके हैं. जिले के 16 प्रखंडों में विभिन्न पशुपालन योजनाएं संचालित हैं. एससी-एसटी, विधवा और दिव्यांग लाभुकों को 90 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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हजारीबाग से आरिफ की रिपोर्ट

Hazaribagh News: पशुपालन विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में चयनित समूहों को विभिन्न सरकारी पशुधन योजनाओं से जोड़कर स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है. मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले के 1518 समूहों को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. मार्च 2026 से शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक 875 समूहों को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जा चुका है.

बकरा विकास योजना से 578 समूहों को जोड़ा जाएगा

मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के अंतर्गत बकरा विकास योजना के तहत जिले के 578 समूहों को लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है. इनमें से अब तक 225 समूहों को योजना का लाभ मिल चुका है. इस योजना के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को पशुपालन के जरिए आय बढ़ाने का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है. प्रभारी जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि बकरा विकास योजना के तहत प्रत्येक समूह को आठ बकरियां और दो बकरे उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इसके अलावा पशुओं के लिए जरूरी दवाएं और आवश्यक उपकरण भी दिए जा रहे हैं, ताकि पशुपालकों को बेहतर सुविधा मिल सके.

विभिन्न योजनाओं के तहत हो रहा लाभुकों का चयन

पशुपालन विभाग द्वारा जिले में कई योजनाओं का संचालन किया जा रहा है. निर्धारित लक्ष्य के अनुसार अब तक बड़ी संख्या में लाभुकों को इन योजनाओं से जोड़ा जा चुका है.

विभिन्न योजनाओं की स्थिति

योजना का नामलक्ष्यअब तक वितरण
बॉयलर मुर्गी-02 पालन279210
शुअर विकास योजना152115
बैकयार्ड मुर्गी-05 पालन15595
बकरा विकास योजना578225
बत्तख चूजा वितरण354230
जोड़ा बैल योजना4022

जिले के सभी 16 प्रखंडों में चल रही है योजना

मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना का लाभ जिले के सभी 16 प्रखंडों में दिया जा रहा है. इनमें सदर, दारू, टाटीझरिया, इचाक, विष्णुगढ़, पदमा, बरही, बड़कागांव, केरेडारी, कटकमदाग, कटकमसांडी, बरकट्ठा, चौपारण, चलकुसा, डाडी और चुरचू प्रखंड शामिल हैं. इन सभी प्रखंडों में लाभुक समूहों का चयन कर उन्हें समय पर योजना का लाभ पहुंचाया जा रहा है. विभाग का प्रयास है कि निर्धारित लक्ष्य के अनुसार सभी पात्र लाभुकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचे.

एससी-एसटी और विशेष वर्ग को 90% सब्सिडी

पशुपालन विभाग की योजनाओं में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विधवा और दिव्यांग लाभुकों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है. इन वर्गों के लाभार्थियों को 90 प्रतिशत तक अनुदान का लाभ दिया जा रहा है. वहीं सामान्य वर्ग के लाभुकों को 25 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जा रही है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ लोगों को स्वरोजगार के नए अवसर भी मिल रहे हैं.

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की पहल

मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के जरिए सरकार ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रही है. पशुपालन विभाग की विभिन्न योजनाओं से बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार जुड़ रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद बढ़ी है. आखिर खेती के साथ पशुपालन का मेल भारतीय गांवों की पुरानी ताकत है, जिसे योजनाओं की बैसाखी नहीं, बल्कि सही दिशा की जरूरत होती है.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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