सारठ के जंगल से चल रहा था साइबर ठगी का गोरखधंधा, पुलिस ने चार अपराधियों को दबोचा
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 11 Jun 2026 4:11 PM
देवघर पुलिस की गिरफ्त में साइबर अपराधी. फोटो: प्रभात खबर
Deoghar News: देवघर के सारठ थाना क्षेत्र के डकाय जंगल में छापेमारी कर पुलिस ने चार साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया. आरोपित फर्जी फ्लिपकार्ट, अमेजन, गूगल पे, फोन पे और एयरटेल पेमेंट बैंक अधिकारी बनकर लोगों से ठगी करते थे. उनके पास से सात मोबाइल और छह सिम कार्ड बरामद किए गए. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
देवघर से आशीष कुंदन की रिपोर्ट
Deoghar News: देवघर पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी सफलता हासिल की है. एसपी प्रवीण पुष्कर के निर्देश पर साइबर थाना और सारठ थाना की संयुक्त टीम ने सारठ थाना क्षेत्र के डकाय जंगल में छापेमारी कर चार साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है. प्रारंभिक जांच में आरोपितों की संलिप्तता विभिन्न ऑनलाइन ठगी के मामलों में पायी गयी है.
जंगल में बना रखा था साइबर ठगी का अड्डा
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सारठ थाना क्षेत्र के डकाय जंगल में कुछ लोग बैठकर साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं. इसके बाद साइबर थाना देवघर और सारठ थाना की टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए छापेमारी की और मौके से चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने उनके पास से सात मोबाइल फोन और छह सिम कार्ड भी बरामद किए हैं.
चारों आरोपित देवघर जिले के निवासी
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान कमरूद्दीन अंसारी, अब्दुल करीम अंसारी और समीर अंसारी के रूप में हुई है, जो सारठ थाना क्षेत्र के कपसा गांव के निवासी हैं. वहीं चौथा आरोपित वसीम अंसारी पालाजोरी थाना क्षेत्र के असहना गांव का रहने वाला है. सभी आरोपित देवघर जिले के निवासी बताए जा रहे हैं.
फर्जी कस्टमर केयर बनकर करते थे ठगी
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपित खुद को फ्लिपकार्ट और अमेजन के फर्जी कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे. इसके अलावा वे गूगल पे, फोन पे और पेटीएम के कस्टमर केयर अधिकारी बनकर उपभोक्ताओं से संपर्क करते थे और कैशबैक या समस्या समाधान का झांसा देकर बैंक खातों से रकम उड़ा लेते थे.
आजकल इंसान ऑनलाइन खरीदारी से लेकर बिजली बिल तक सब कुछ मोबाइल पर निपटा लेना चाहता है और इसी सुविधा के बीच ऐसे ठग अपना कारोबार चमका रहे हैं. सुविधा और सावधानी का रिश्ता शायद पासवर्ड से भी ज्यादा मजबूत होना चाहिए.
एपीके फाइल भेजकर हासिल करते थे मोबाइल का एक्सेस
पुलिस के अनुसार आरोपित पीएम किसान योजना, बिजली बिल भुगतान और आरटीओ चालान के नाम पर लोगों को एपीके फाइल भेजते थे. जैसे ही कोई व्यक्ति उस फाइल को डाउनलोड करता था, ठग उसके मोबाइल का एक्सेस हासिल कर लेते थे और बैंक खाते से पैसे निकाल लेते थे.
एयरटेल पेमेंट बैंक अधिकारी बनकर भी लगाते थे चूना
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपित फर्जी एयरटेल पेमेंट बैंक अधिकारी बनकर लोगों से संपर्क करते थे. वे एयरटेल थैंक्स ऐप के माध्यम से कार्ड बंद होने या उसे दोबारा चालू करने का बहाना बनाकर उपभोक्ताओं से गोपनीय जानकारी हासिल करते थे और फिर ठगी को अंजाम देते थे.
एक आरोपित पहले भी जा चुका है जेल
पुलिस जांच में पता चला है कि गिरफ्तार आरोपित समीर अंसारी पहले भी साइबर अपराध के एक मामले में जेल जा चुका है. वह साइबर थाना कांड संख्या 76/21 में आरोपी रह चुका है. इसके बावजूद उसने फिर से साइबर ठगी के धंधे में कदम रख दिया.
विभिन्न राज्यों में दर्ज हैं शिकायतें
तकनीकी जांच के दौरान जब्त मोबाइल नंबरों और आईएमईआई नंबरों की जांच की गई, जिसमें पता चला कि इनके खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी से संबंधित शिकायतें दर्ज हैं. इससे साफ है कि इनका नेटवर्क केवल झारखंड तक सीमित नहीं था.
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इन अधिकारियों ने की कार्रवाई
इस छापेमारी अभियान में साइबर थाना देवघर के पुलिस निरीक्षक बिशेश्वर कुमार, सारठ थाना प्रभारी दीपक कुमार साह तथा सारठ थाना की पुलिस टीम शामिल थी. पुलिस अब गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर साइबर ठगी के नेटवर्क और अन्य सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटा रही है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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