संत मदर तेरेसा ने शक्षिकिा के रूप में मानवता का दिया संदेश

Published at :04 Sep 2016 12:00 AM (IST)
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संत मदर तेरेसा ने शक्षिकिा के रूप में मानवता का दिया संदेश

संत मदर तेरेसा ने शिक्षिका के रूप में मानवता का दिया संदेश फ्लैग-सेवानिवृत्त शिक्षकों व वर्तमान शिक्षकों के लिए संत पात्रिक महागिरिजाघर में विशेष मिस्सा पूजा, फादर सीप्रियन ने कहा पल्ली पुरोहित फादर जेरोम ने विद्यार्थियों को शिक्षक बन कर स्वच्छ, सुंदर व सभ्य समाज के निर्माण में भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया. 4 […]

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संत मदर तेरेसा ने शिक्षिका के रूप में मानवता का दिया संदेश फ्लैग-सेवानिवृत्त शिक्षकों व वर्तमान शिक्षकों के लिए संत पात्रिक महागिरिजाघर में विशेष मिस्सा पूजा, फादर सीप्रियन ने कहा पल्ली पुरोहित फादर जेरोम ने विद्यार्थियों को शिक्षक बन कर स्वच्छ, सुंदर व सभ्य समाज के निर्माण में भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया. 4 गुम 1 में पूजा कराते पल्ली पुरोहित व अन्य4 गुम 2 में कार्यक्रम में मौजूद लोगप्रतिनिधि, गुमला गुमला के संत पात्रिक महागिरजाघर में रविवार को गुमला जिला सहित पूरे भारत देश के सेवानिवृत्त शिक्षकों व कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष मिस्सा बलिदान किया गया. मुख्य अधिष्ठाता गुमला के पल्ली पुरोहित फादर जेराम एक्का के नेतृत्व में विकर जनरल फादर सीप्रियन कुल्लू व फादर जोन अलबर्ट बाड़ा ने मिस्सा पूजा करायी. विकर जनरल सह मुख्य वक्ता फादर सीप्रियन ने शिक्षा और शिक्षा के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए कहा कि शिक्षा का मतलब स्वच्छ व सुंदर जीवन, समाज, चरित्र और क्षमता का विकास करना है. उन्होंने कहा कि जिससे हमें सीखने का अवसर मिले, वही शिक्षक है. लेकिन सारी सृष्टि के पहले शिक्षक ईसा मसीह हैं. वह परमपिता परमेश्वर के सबसे प्रिय पुत्र हैं. परमपिता परमेश्वर ने अपने सबसे प्रिय पुत्र प्रभु यीशु को इस दुनिया में एक शिक्षक के रूप में भेजा. उन्होंने इंसानों के साथ पशुओं और पक्षियों को भी प्रेम व शांति की शिक्षा दी. फादर सीप्रियन ने कहा कि पूरी दुनिया में चर्च की भूमिका एक मार्गदर्शक की तरह है. शिक्षकों को शिक्षा नीति पर पुनर्विचार करने की जरूरत : मदर तेरेसा भी दुनिया में शिक्षक की तरह ही थी. उन्होंने पूरे मानव जाति को मानवता की शिक्षा दी. वर्तमान की शिक्षा नीति लचर है. शिक्षकों को शिक्षा नीति पर पुनर्विचार करने की जरूरत है. पल्ली पुरोहित फादर जेरोम एक्का ने कहा कि शिक्षक बनना समाज में गौरव की बात है. सभी लोग शिक्षक नहीं बन सकते हैं. इसके लिए ईश्वर की ओर से बुलावा आता है. उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि भविष्य में आप भी शिक्षक बन सकते हैं. बस जरूरत है ईमानदारी से आगे बढ़ने और ईश्वर के बुलावा के इंतजार करने की. इस अवसर पर फादर रामू भिंसेंट मिंज, फादर रंजीत, फादर मूनचंद, फादर सुशील, फादर मारकुस, सिस्टर हिरमीला, सिस्टर एलिजाबेथ, सेत कुमार एक्का, नीलम प्रकाश तिर्की सहित अन्य लोग उपस्थित थे.

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