36 घंटे बाद अस्पताल ने शव सौंपा

Updated at : 20 Oct 2019 12:08 AM (IST)
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36 घंटे बाद अस्पताल ने शव सौंपा

अस्पताल ने शव देने के लिए मां से मांगे 1.62 लाख रुपये. स्पीकर के हस्तक्षेप के बाद पांच हजार लेकर अस्पताल ने शव को परिजनों को सौंपा गुमला : रांची के एक बड़े अस्पताल ने पैसा नहीं मिलने पर शव को 36 घंटे तक अपने कब्जे में रखा. यहां तक कि शव को उसके परिजनों […]

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अस्पताल ने शव देने के लिए मां से मांगे 1.62 लाख रुपये. स्पीकर के हस्तक्षेप के बाद पांच हजार लेकर अस्पताल ने शव को परिजनों को सौंपा

गुमला : रांची के एक बड़े अस्पताल ने पैसा नहीं मिलने पर शव को 36 घंटे तक अपने कब्जे में रखा. यहां तक कि शव को उसके परिजनों को देखने तक नहीं दिया गया, जबकि उसकी मां अपने इकलौते पुत्र के शव को देने के लिए अस्पताल प्रबंधन के समक्ष गिड़गिड़ाती रही. इसके बाद भी अस्पताल प्रबंधन का दिल नहीं पसीजा. अंत में विधानसभा अध्यक्ष डॉ दिनेश उरांव की पहल पर 36 घंटे के बाद शनिवार की सुबह 11 बजे बेटे के शव को अस्पताल प्रबंधन ने उसकी मां को सौंपा.
मामला गुमला जिला अंतर्गत बसिया प्रखंड के कोनवीर का है. जानकारी के अनुसार, कोनवीर गांव के स्वर्गीय थॉमस आइंद का पुत्र विनय आइंद (25) रविवार को सड़क हादसे में घायल हो गया था. उसे रेफरल अस्पताल बसिया में भर्ती कराया गया था. स्थिति में सुधार नहीं होने पर मंगलवार को मां लुसिया मेरी सुरीन अपने घायल बेटे को इलाज के लिए रांची ले गयी. रांची में एक बड़े अस्पताल में विनय को भर्ती कराया गया.
लुसिया ने अपने बेटे के इलाज के लिए घर में रखे दो लाख 20 हजार रुपया अस्पताल को दे दिया. लेकिन इलाज के क्रम में गुरुवार की शाम को विनय की मौत हो गयी. बेटे की मौत के बाद लुसिया रोने लगी. उसने अस्पताल प्रबंधन से अपने बेटे का शव घर ले जाने के लिए मांगा. लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि और एक लाख 62 हजार रुपये दीजियेगा, तभी शव देंगे. अस्पताल द्वारा पैसा की मांग की सूचना पर लुसिया परेशान हो गयी.
उसने अपनी गरीबी का हवाला दिया, परंतु अस्पताल ने शव देने से इंकार कर दिया. शव को देखने तक नहीं दिया जा रहा था. जब इसकी जानकारी सांसद प्रतिनिधि अमर पांडेय को हुई, तो उन्होंने इसकी सूचना स्पीकर डॉ दिनेश उरांव को दी. स्पीकर ने अस्पताल प्रबंधन से बात की. अस्पताल प्रबंधन अंत में 60 हजार रुपये की मांग करने लगा, परंतु जब स्पीकर द्वारा कहा गया कि वह गरीब परिवार है. अंत में पांच हजार रुपये लेकर अस्पताल प्रबंधन ने शव को उसकी मां को सौंपा.
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