कारगिल युद्ध : गुमला के शहीद बिरसा उरांव को मिले छह पदक, दिखाया था वीरता का दमखम

सिसई प्रखंड के जतराटोली शहिजाना के बेर्री गांव के रहने वाले थे शहीद बिरसा उरांव. कारगिल युद्ध में वे दो सितंबर 1999 को शहीद हुए थे. शहीद की पत्नी मिला उरांव ने बताया कि बिरसा उरांव हवलदार के पद पर बिहार रेजिमेंट में थे. यहां बता दें कि सिसई प्रखंड झारखंड के गुमला जिले में […]
सिसई प्रखंड के जतराटोली शहिजाना के बेर्री गांव के रहने वाले थे शहीद बिरसा उरांव. कारगिल युद्ध में वे दो सितंबर 1999 को शहीद हुए थे. शहीद की पत्नी मिला उरांव ने बताया कि बिरसा उरांव हवलदार के पद पर बिहार रेजिमेंट में थे. यहां बता दें कि सिसई प्रखंड झारखंड के गुमला जिले में आता है.
जवान से लांस नायक व हवलदार पद पर उनकी प्रोन्नति हुई थी. उनकी प्रारंभिक शिक्षा राजकीय मध्य विद्यालय बेर्री से हुई. मैट्रिक की परीक्षा नदिया हिंदू उवि लोहरदगा से 1983 में पास की थी. शहीद की दो संतान हैं. बड़ी बेटी पूजा विभूति उरांव वर्ष 2019 में दारोगा के पद पर बहाल हुई है. वर्तमान में गढ़वा में पोस्टेड है. वहीं बेटा चंदन उरांव रांची में पढ़ रहा है. शहीद को छह पुरस्कार मिले थे.
सेना के विभिन्न ऑपरेशनों में उन्होंने अपनी वीरता का दमखम दिखाया था. इसमें ऑपरेशन ओचार्ड नागालैंड, ऑपरेशन रक्षक पंजाब, यूएनओ सोमालिया टू दक्षिण अफ्रीका, ऑपरेशन राइनो असम व ऑपरेशन विजय कारगिल शामिल है. पत्नी ने बताया कि पति के शहीद होने के बाद सेना की ओर से पेंशन मिलती है, लेकिन न ही घर मिला है और न ही जमीन मिली है. अनुकंपा में भी किसी को नौकरी नहीं मिली है.
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