50 बेड के अस्पताल भवन के साथ जननी आश्रय केंद्र का किया गया निर्माण

प्रसव में विलंब होने पर वापस घर जाने में होती है कठिनाई
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सह रेफरल अस्पताल परिसर में 24 करोड़ की लागत से 50 बेड के अस्पताल भवन के साथ जननी आश्रय केंद्र का निर्माण कराया गया है. इस संबंध में सीएस अनंत झा ने बताया कि जननी आश्रय केंद्र से दूरस्थ क्षेत्र से आने वाली गर्भवती महिलाएं जो प्रसव के लिए अस्पताल आती हैं, लेकिन उनके प्रसव में तीन-चार दिन का विलंब होता और वापस घर जाने में कठिनाई है. उनकी सुविधा के लिए आश्रय केंद्र बनाया गया है. यहां पर गर्भवती महिलाएं व नवजात शिशु की माताओं को ठहरने की सुविधा मिलेगी. अस्पताल के नजदीक होने के वजह से किसी भी आकस्मिक स्थिति में प्रसव कराने में परेशानी नहीं होगी. इसी को ध्यान में रखकर जननी आश्रय केंद्र बनाया गया है.
नवजात की माताओं को रहने में होगी सुविधा : सीएस
सीएस ने बताया कि कभी-कभी नवजात बच्चे की स्थिति गड़बड़ होती है और एसएनसीयू से डिस्चार्ज नहीं किया जा सकता है. ऐसी स्थिति में बच्चे को अस्पताल में रख लिया जाता है. इस स्थिति में अस्पताल के नजदीक नवजात की माताओं को रहने में आश्रय केंद्र में सुविधा होगी. आश्रय केंद्र में रहने वाली माताएं आवश्यकता अनुसार अपने बच्चे को अस्पताल जाकर देख सकती है. बच्चे को स्तनपान करा सकती है. सीएस ने बताया कि इसके लिए डीसी द्वारा प्रस्ताव मांगा गया था. सीएस ने बताया कि गोड्डा जिला में चार जननी आश्रय केंद्र का निर्माण कराया गया है, जिसमें सुंदरपहाड़ी के सवाय कुंडी, बोआरीजोर के रतनपुर, सदर प्रखंड के पलबला गांव तथा महागामा अस्पताल में कराया गया है. आश्रय केंद्र के संचालन के लिए प्रपोजल दिया गया है. नवनिर्मित अस्पताल भवन के हैंडओवर होने के बाद डीसी के अनुमति मिलने पर संचालन शुरू किया जाएगा.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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By Prabhat Khabar News Desk
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