गोड्डा के ऐतिहासिक कोलरा बांध की बदहाली, स्थानीय निवासियों में नाराजगी

Published by :SANJEET KUMAR
Published at :10 May 2026 10:33 PM (IST)
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गोड्डा के ऐतिहासिक कोलरा बांध की बदहाली, स्थानीय निवासियों में नाराजगी

सौंदर्यीकरण के बावजूद हालत जस की तस

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गोड्डा शहर के वार्ड संख्या सात और तीन के बीच स्थित ऐतिहासिक कोलरा बांध अपनी बदहाली पर स्थानीय निवासियों के आंसू बहा रहा है. नगर परिषद प्रशासन द्वारा सौंदर्यीकरण और जल निकासी के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किये जाने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है. वार्ड संख्या 6 और 7 के नालों का गंदा पानी सीधे इस तालाब में गिरने से समस्या और गंभीर हो गयी है, जिसका खामियाजा करीब 300 घरों की आबादी को भुगतना पड़ रहा है. बरसात में जब तालाब का जलस्तर बढ़ता है, तो गंदा पानी ओवरफ्लो होकर आसपास के मोहल्लों में फैल जाता है. इससे सड़कें और गलियां जलजमाव का सामना करती हैं और इलाके में संक्रामक बीमारियों और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है. नगर परिषद ने कोलरा बांध में जल निकासी के लिए वैकल्पिक पंपिंग सेट लगाए हैं, लेकिन यह प्रयास भी नाकाफी साबित हो रहा है. तकनीकी खराबी, बिजली की अनियमित आपूर्ति और मशीनों की सीमित क्षमता के कारण पंप अक्सर बंद रहते हैं. परिणामस्वरूप तालाब का गंदा पानी पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाता और मोहल्ले वासियों को राहत नहीं मिल रही है. तालाब में जमा गंदगी से उठने वाली बदबू से भी स्थानीय लोग परेशान हैं. समस्या के लिए केवल प्रशासनिक विफलता ही नहीं, बल्कि अतिक्रमण भी बड़ी बाधा है. तालाब के चारों ओर अवैध निर्माण और जलकुंभी के कारण इसका प्राकृतिक विस्तार सिकुड़ गया है, जिससे जलधारण क्षमता घट गयी है. इसके अलावा स्थानीय लोग भी घरेलू कचरा तालाब में फेंकते हैं, जिससे यह क्षेत्र कूड़ेदान में बदल गया है. तत्कालीन सदर एसडीओ ऋतुराज और सीओ प्रदीप कुमार शुक्ला ने अतिक्रमण हटाने का प्रयास किया था, लेकिन सफलता नहीं मिली. वार्ड संख्या तीन के वार्ड पार्षद गुणानंद झा ने हाल ही में नगर परिषद की बैठक में इस गंभीर समस्या पर चिंता जतायी थी. नगर परिषद अब स्थायी समाधान के लिए कई प्रस्तावों पर विचार कर रही है, जिनमें गंदे पानी को बांध में गिरने से रोकना, बांध की गाद निकालकर उसकी गहराई बढ़ाना, जल निकासी के लिए स्थायी ड्रेनेज सिस्टम विकसित करना, अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करना शामिल हैं. स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि कागजी कार्रवाई और बैठकों से आगे बढ़कर धरातल पर काम शुरू किया जाये, ताकि उन्हें इस नारकीय स्थिति से मुक्ति मिल सके.

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