Giridih News : सिद्धचक्र महामंडल विधान आत्मशुद्धि व कर्म निर्जरा की आराधना : प्रमाण सागर

Published by :MANOJ KUMAR
Published at :09 May 2026 1:19 AM (IST)
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Giridih News : सिद्धचक्र महामंडल विधान आत्मशुद्धि व कर्म निर्जरा की आराधना : प्रमाण सागर

Giridih News : 108 मंडलों के साथ संस्कृत भाषा में निबद्ध 1008 श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का होगा आयोजन

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Giridih News : पीरटांड़. 21 से 29 जुलाई तक चलनेवाले अष्ठानिका महापर्व के पावन अवसर पर शाश्वत सिद्धक्षेत्र श्री सम्मेद शिखर तीर्थराज में मुनि श्री प्रमाण सागर ससंघ के सान्निध्य में 108 मंडलों के साथ संस्कृत भाषा में निबद्ध 1008 श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य आयोजन किया जायेगा. यह विधान मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज से संपन्न कराया जायेगा. राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने जानकारी देते हुए बताया कि आषाढ़ अष्ठानिका का विशेष महत्व है, क्योंकि इसके उपरांत मुनिसंघ का चातुर्मास प्रारंभ हो जाता है. इस दिव्य अनुष्ठान में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है. इसके मद्देनजर व्यापक तैयारी शुरू कर दी गयी है. गुणायतन व श्री सेवायतन परिवार श्रद्धालुओं के लिए नि:शुल्क आवास, भोजन व वस्त्र आदि की विशेष व्यवस्था की जा रही है. शंका समाधान कार्यक्रम के दौरान मुनि श्री प्रमाण सागर ने श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, पुण्यार्जन और कर्मनिर्जरा की महान आराधना है. उन्होंने कहा कि अन्य विधान सामान्य धार्मिक अनुष्ठान हो सकते हैं, लेकिन सिद्धचक्र महामंडल विधान को जीवनभर के पापों के प्रायश्चित स्वरूप स्वीकार किया गया है. यह आत्मा की शुद्धि का प्रारंभ है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में कम से कम एक बार यह विधान अवश्य करना चाहिये. मंडल केवल द्रव्य अर्पण का स्थान नहीं, बल्कि साधना व आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है. शास्त्रोक्त विधि से मंडल की रचना और मंत्रोच्चार के साथ आराधना करने पर अद्भुत आध्यात्मिक शक्ति का संचार होता है. मुनिश्री ने कहा कि संस्कृत मंत्रों का नौ-नौ बार उच्चारण आत्मा पर गहरा प्रभाव डालता है. यदि यह आराधना गुरु मुख से, पवित्र क्षेत्र में तथा अष्ठानिका जैसे मंगलमय काल में संपन्न हो, तो द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव इन चारों मंगलों का अद्भुत संयोग बनता है. मुनि श्री संधान सागर ने कार्यक्रम का संचालन किया. वहीं मुनि श्री सार सागर, मुनि श्री समादर सागर व मुनि श्री रूप सागर की उपस्थिति रही.

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