Giridih News:केश्वारी में मां के अलग-अलग रूपों की होती है पूजा

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Giridih News:सरिया थाना क्षेत्र के केश्वारी गांव में 31 वर्षों से मां दुर्गा की प्रतिमा की पूजा हर्षोल्लास के साथ की जा रही है. इस वर्ष भी शारदीय नवरात्र शुरू होते ही पूजा शूरू हो गयी.

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31 वर्षों से ग्रामीण धूमधाम से कर रहे मां दुर्गा की पूजा

सरिया थाना क्षेत्र के केश्वारी गांव में 31 वर्षों से मां दुर्गा की प्रतिमा की पूजा हर्षोल्लास के साथ की जा रही है. इस वर्ष भी शारदीय नवरात्र शुरू होते ही पूजा शूरू हो गयी. पुजारी मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा कर रहे हैं. गांव के समाजसेवी मनोहर यादव ने बताया कि नौ दिनों तक श्रद्धालु शक्ति की देवी दुर्गा की उपासना में लीन रहते हैं. महाष्टमी के दिन भक्त उपवास में रहकर मां दुर्गा की पूजा करते हैं, जबकि नवमी तथा विजयादशमी को भव्य मेले का आयोजन किया जाता है. बताया कि इस क्षेत्र में कहीं दुर्गा पूजा नहीं होती थी. पूजा करने तथा मेले का आनंद लेने के लिए लोगों को सरिया बाजार जाना पड़ता था. दूरी, आवागमन के साधन का अभाव तथा बीच में पड़ने वाले खेढुवा नदी को पार करने में होने वाली परेशानी को देखते हुए स्थानीय लोगों ने गांव में ही दुर्गा पूजा करने की ठानी. गांव के अगुआ साथी व समाजसेवी बैठकर शारदीय दुर्गा पूजा करने की तैयारी शुरू कर दी. संस्थापक सदस्यों ने ग्रामीण जनता से स्वेच्छापूर्वक आर्थिक सहयोग के लिए प्रेरित किया. आस्था से जुड़े लोगों ने बढ़-चढ़कर आर्थिक सहयोग किया.

चार वर्षों तक कपड़े के पंडाल में पूजा हुई

चार वर्षों तक श्रद्धालुओं ने कपड़े का पंडाल बनाकर मूर्ति पूजा की. इसी बीच लोगों ने मां दुर्गा की स्थायी मंदिर बनाने पर बल दिया. आर्थिक रूप से संपन्न लोगों ने मंदिर बनाने के लिए बढ़-चढ़कर भाग लिया. मंदिर बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई. गिरिडीह जिला के तत्कालीन जिला पुलिस उपाधीक्षक जेएन यादव व अन्य पुलिस अधिकारी तथा स्थानीय लोगों ने संयुक्त रूप से मंदिर की नींव रखी. सभी वर्ग के श्रद्धालुओं ने मंदिर निर्माण में सहयोग किया. आज भव्य मंदिर के बीच मां दुर्गा की पूजा की जाती है. केश्वारी के अलावा माधवाडीह, डुमरिटांड़, बसरिया ढाब, औरवाटांड़, डुमरियाकोनी, परसिया, नगर केश्वारी, फदलोहिया आदि गांव से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पूजा कर मनोकामना मांगते हैं. सप्तमी से नवमी तक भक्ति जागरण तथा रामलीला का आयोजन किया जाता है. पूरे 10 दिनों तक क्षेत्र में चहल-पहल का माहौल तथा भक्ति का वातावरण बन जाता है. यहां वैष्णव रीति से पूजा होती है. सोमवार को दुर्गा के पंचम रूप स्कंदमाता की विधिवत पूजा की गयी. शाम को भव्य आरती कार्यक्रम किया गया. दशहरा पर भव्य मेले का आयोजन होता है. इसमें दूसरे प्रदेशों से विभिन्न प्रकार के झूले, खिलौने व मिठाई की दुकान सजाते हैं. 10 दिवसीय इस पूजा के सफल संचालन के लिए पूजा समिति का गठन किया गया है. स्थायी मंदिर के बावजूद भी जन सहयोग से भव्य पंडाल का निर्माण कराया गया है. मंदिर की सज्जा की गयी है. मंडप परिसर में पर्याप्त मात्रा में सीसीटीवी लगाये गये हैं. पेयजल की व्यवस्था की गई है. वॉलिंटियर्स की नियुक्ति समेत अन्य व्यवस्था की गयी है. समिति ने दुर्गा पूजा को सौहार्दपूर्ण में वातावरण में मनाने के लिए एक दूसरे का सहयोग करें. किसी प्रकार का संकट होने पर समिति के लोगों को इसकी जानकारी देने की बात कही गयी है.

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