Giridih News :सड़क को लेकर पहल नहीं हुई तो होगा चरणबद्ध आंदोलन

Published by : PRADEEP KUMAR Updated At : 31 May 2026 11:43 PM

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सड़क की बदहाली के कारण गांव तक एंबुलेंस के नहीं पहुंचने से पिछले दिनों प्रसव पीड़ा से व्यथित दलुआडीह की गर्भवती को गत बुधवार को मुख्य मार्ग तक खाट से चार किमी टांग कर ले जाना पड़ा था. प्रशासन की इस उदासीनता से लगातार बढ़ती नाराजगी के बीच रविवार को दलुआडीह में स्थित डहिया स्कूल मैदान में पारसनाथ की तलहटी के विभिन्न गांवों की एक विशाल जनसभा हुई.

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ज्वलंत. प्रशासन की उदासीनता से नाराजगी बढ़ी, दलुवाडीह के लोगों ने की ग्रामसभा

सड़क की बदहाली से गांव तक नहीं आती है एंबुलेंस

पिछले दिनों गर्भवती को खाट पर टांग कर मेन रोड तक ले जाना पड़ा था

सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा

जनसभा के दौरान यह तय हुआ कि सड़क निर्माण की दिशा में जल्द ही ठोस पहल नहीं हुई तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जायेगा. सड़क नहीं रहने से ग्रामीण काफी परेशानी झेल रहे हैं. कोई समस्या समाधान पहल के प्रति गंभीर नहीं है.

बनी आंदोलन की रणनीति

जनसभा में सड़क निर्माण के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की गयी तथा आगे की रणनीति तय हुई. ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि वर्षों से उनकी मांगों की अनदेखी होती रही है. क्रूरता की हद तक बढ़ गयी उदासीनता से नाराज ग्रामीणों ने कहा कि अब वे चुप नहीं बैठेंगे. मौके पर वक्ताओं ने कहा कि सड़क केवल विकास का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन रक्षक सुविधा है. प्रसूता को खाट पर ढोकर अस्पताल पहुंचाने की घटना इस बात की मिसाल है कि सड़क के अभाव में लोगों की जान तक खतरे में पड़ रही है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जब तक सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं होता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा. ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि अब वे अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर लड़ाई लड़ेंगे और क्षेत्र को मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने तक आंदोलन जारी रखेंगे. ग्रामीणों मे इतवारी मांझी, प्रेमलता सोरेन, सुनीता टुडू, ललिता हेंब्रम, रंजीत टुडू, फागू सोरेन सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे.

आधा दर्जन गांवों की समस्या, बढ़ता जा रहा आक्रोश

ग्रामीणों के अनुसार यह समस्या केवल दलुवाडीह गांव तक सीमित नहीं है. पारसनाथ मौजा के आधा दर्जन से अधिक गांव, जिनमें दलुवाडीह, कुरुवाटांड़, डहिया सहित आसपास की कई बस्तियां शामिल हैं. वर्षों से यहां की आबादी सड़क की समस्या झेल रही है. बरसात में हालात और भी बदतर हो जाते हैं. सड़कें कीचड़ और गहरे गड्ढों में तब्दील हो जाती हैं. इससे आवागमन लगभग ठप हो जाता है. ग्रामीणों का आरोप है कि आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के कारण उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा है. उनका कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों, विभागीय अधिकारियों तथा प्रशासनिक पदाधिकारियों को सड़क निर्माण की मांग से अवगत कराया गया, पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.

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