कोलकाता से दमदम तक बुलडोजर एक्शन, आधी रात को उजड़े हॉकर्स के आशियाने, 3,000 अवैध इमारतों पर मंडराया खतरा

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 01 Jun 2026 12:10 AM

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दमदम स्टेशन से हटाया गया अतिक्रमण.

‍Bulldozer Action in Kolkata: कोलकाता में अवैध निर्माणों और दमदम स्टेशन पर अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू हुई है. 3,000 अवैध इमारतें रडार पर हैं. 1,000 पर कभी भी बुलडोजर चल सकता है. दमदम में आधी रात को हुई कार्रवाई से हॉकर्स में मातम. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

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‍Bulldozer Action in Kolkata: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता और इसके उपनगरीय इलाकों में पिछले 24 घंटों के भीतर कोलकाता नगर निगम (KMC) और रेलवे प्रशासन ने मिलकर अवैध निर्माणों और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है. इस अभियान ने डेढ़ दशक से चल रहे प्रमोटर-सिंडिकेट-नेता के गठजोड़ की नींव हिला दी है. दमदम स्टेशन पर आधी रात को हॉकर्स के साम्राज्य को उजाड़ दिया गया, तो महानगर की संकरी गलियों में नियमों को ठेंगा दिखाकर खड़ी की गयी 3,000 अवैध इमारतों पर भी बुलडोजर चलाने की तैयारी कर ली गयी है.

दमदम में मलबे में तब्दील हुई रोजी-रोटी

शनिवार की आधी रात जब शहर गहरी नींद में था, तब दमदम जंक्शन स्टेशन रणक्षेत्र में बदल गया. रेलवे और स्थानीय प्रशासन ने भारी पुलिस बल और आरपीएफ (RPF) के साथ मिलकर एक गुप्त ऑपरेशन शुरू किया. प्लेटफॉर्म से लेकर स्टेशन की बाहरी सड़कों तक जमी वर्षों पुरानी दुकानों को मलबे में बदल दिया गया. रविवार को जब दुकानदार वहां पहुंचे, तो मलबे के सिवाय कुछ नहीं था. कई हॉकर टूटी तराजू और बिखरा सामान समेटते हुए फूट-फूटकर रोते नजर आये.

कोलकाता में 1,000 इमारतों पर गिर सकती है गाज

दमदम की कार्रवाई महज ट्रेलर थी. असली फिल्म महानगर कोलकाता की अवैध बहुमंजिली इमारतों पर चलने वाली है. केएमसी के बिल्डिंग विभाग ने गार्डेनरीच, मटियाबुर्ज, बड़ाबाजार, तिलजला, कसबा और तपसिया जैसे इलाकों को ‘रेड जोन’ घोषित किया है. निगम के सर्वे में 3,000 अवैध निर्माणों की पहचान की गयी है, जिनमें से 1,000 को ढाहने की कानूनी प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है.

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‍Bulldozer Action in Kolkata: सिंडिकेट का खेल बेनकाब

जांच में खुलासा हुआ है कि प्रमोटर जी+4 का नक्शा पास कराकर जी+6 या जी+7 मंजिलें खड़ी कर देते थे. इन अवैध मंजिलों से करोड़ों की काली कमाई की गयी और घटिया निर्माण सामग्री की आपूर्ति स्थानीय प्रभावशाली तत्वों द्वारा की गयी.

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सत्ता परिवर्तन के बाद बैकफुट पर सफेदपोश संरक्षक

पूर्ववर्ती सरकार के दौरान जिन हॉकर्स और प्रमोटरों को राजनीतिक संगठनों का संरक्षण प्राप्त था, वे अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. रेलवे और नगर निगम अब किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है. अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा और शहरी नियोजन से खिलवाड़ करने वाली किसी भी ‘अवैध’ ईंट को बख्शा नहीं जायेगा.

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आम आदमी की चिंता : आशियाना भी गया और पैसा भी?

निगम की इस कार्रवाई से उन मध्यमवर्गीय परिवारों की नींद उड़ गयी है, जिन्होंने अपनी जिंदगी भर की कमाई इन फ्लैटों में लगा दी है. प्रमोटरों ने तो अवैध फ्लैट बेचकर अपना मुनाफा जेब में डाल लिया, लेकिन अब बुलडोजर की आहट ने मासूम खरीदारों को संकट में डाल दिया है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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