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निर्जला एकादशी पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

Updated at : 17 Jun 2024 10:58 PM (IST)
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निर्जला एकादशी पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी व्रत मनाया जाता है. इस वर्ष यह व्रत सोमवार को धूमधाम के साथ मनाया गया.

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सरिया. प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी व्रत मनाया जाता है. इस वर्ष यह व्रत सोमवार को धूमधाम के साथ गनाया गया. सैकड़ों श्रद्धालु सोमवार की सुबह सरिया के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल राजदहधाम पहुंचे. उत्तर वाहिनी बराकर नदी में स्नान कर विभिन्न मंदिरों में पूजा कर प्रसाद ग्रहण किया. कई श्रद्धालु अपने घरों में ही एकादशी व्रत को लेकर रविवार को नहाये खाये किये. राजदहधाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना ना हो, इसको लेकर तपस्वी मौनी बाबा राजदहधाम समिति के लोग काफी सक्रिय रहे. पूरे मंदिर परिसर की साफ-सफाई कर आकर्षक ढंग से सजाया गया है. पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की गयी है. वहीं, मंदिर परिसर में लोगों को पूजा-अर्चना में दिक्कती ना हो, इसे लेकर मंदिर परिसर में स्थित छोटे-छोटे सभी दुकानदारों को हटाकर व्यवस्थित ढंग से बाजार सजाया गया था. व्रत के सबंध में हजारीबाग रोड स्टेशन के आरपीएफ बैरक स्थित पंच मंदिर पुजारी सब्यसाची पांडेय ने बताया कि पूरे वर्ष में 24 एकादशी होते हैं. जबकि, अधिक मास में 26 एकादशी व्रत किया जाता है. सभी एकादशियों में ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि कठिनतम है. इसमें 24 घंटे निराहार रहकर भगवान श्री विष्णु की आराधना की जाती है. जबकि, द्वादशी तिथि को स्नान ध्यान कर ब्राह्मणों को मीठा शरबत पिलाकर तथा उन्हें भोजन कराकर यथोचित दान देना चाहिए, ताकि व्रत करने वाले को पुण्य की प्राप्ति हो. बताया कि माता कुंती तथा उनके पुत्र युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल व सहदेव पूरे वर्ष भर के सभी 24 एकादशी व्रत किया करते थे. लेकिन, उनके एक पुत्र भीम को उपवास में रहना मुश्किल सा था. महर्षि वेदव्यास के निर्देशानुसार मां कुंती के आग्रह पर महाबली भीम ने पूरे साल में सिर्फ निर्जला एकादशी व्रत को करना शुरू किया. इसलिए निर्जला एकादशी को भीम सैनी एकादशी भी कहा जाता है. बताया जाता है कि 23 एकादशी व्रत करने से जो पुण्य की प्राप्ति होती है, वह लाभ निर्जला एकादशी करने से ही मिल जाता है. इस व्रत को करने वाले लोगों को सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है. मृत्यो परांत मोक्ष लाभ मिलता है. व्रत को लेकर सरिया बाजार में दिनभर चहल-पहल का माहौल रहा. पूजन सामग्री खरीदने वालों की भीड़ देखी गयी. लोगों ने जमकर पूजन सामग्री, हाथ पंखे तथा फलों की खरीदारी की.

झारखंडधाम में उमड़े श्रद्धालु

झारखंडधाम.

झारखंड धाम में निर्जला एकादशी पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. सुबह से ही महिलाएं कतार लगने लगीं. तपती दोपहर में भी वह पूजा के लिए कतार में खड़ी रहीं. शाम तक हजारों महिलाओं ने ऊं नमः शिवाय का जप किया. इसके अलावा देवी मंदिर रेंबा, रंगामाटी, धुरगड़गी, पतारडीह, शिव मंदिर नईटांड़, खरीयोडीह, झारो नदी समेत अन्य शिवालयों में महिलाएं दिन भर पूजा करती रहीं. ज्योतिषाचार्य राहुल पंडा ने निर्जला एकादशी के संबंध में जानकारी दी.

बगोदर के मंदिरों में भी चहल-पहल

बगोदर.

निर्जला एकादशी को लेकर बगोदर के विभिन्न मंदिरों में सोमवार की सुबह से ही पूजा-अर्चना को लेकर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी. जमुनिया समेत अन्य नदियों व तालाबों में महिला-पुरुषों ने स्नान कर सूर्य देव की आराधना की. इसके बाद बगोदर के हरिहर धाम मंदिर, थाना शिव मंदिर, संकट मोचन मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों में पूजा अर्चना की. लोगों ने अपने-अपने घरों में भी पूजा कर भगवान विष्णु की कथा सुनी.

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