इस सप्ताह साफ रहेगा मौसम, बारिश की संभावना नहीं

Updated at : 10 Mar 2025 9:01 PM (IST)
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इस सप्ताह साफ रहेगा मौसम, बारिश की संभावना नहीं

इस सप्ताह साफ रहेगा मौसम, बारिश की संभावना नहीं

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गढ़वा. मौसम पूर्वानुमान में बताया गया है कि इस सप्ताह आसमान साफ रहेगा और वर्षा की कोई संभावना नहीं है. कृषि विज्ञान केंद्र गढ़वा के प्रधान कृषि वैज्ञानिक डॉ अशोक कुमार ने बताया कि इस समय दिन एवं रात के तापमान में थोड़ी वृद्धि देखी जा सकती है. हवा की गति सामान्य रहने की संभावना है. दिन का अधिकतम तापमान जहां 36- 37 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा, वहीं रात का न्यूनतम तापमान 18 से 19 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. गेहूं व दूसरी फसलों में बरतें सावधानी : उन्होंने बताया कि मौसम को देखते हुए फसलों में आवश्यकता अनुसार सिंचाई करते रहना होगा. अभी गेहूं की अधिकतर फसलें दाने भरने या दाने पुष्ट होने की अवस्था में हैं. इस अवस्था में खेतों में नमी की कमी नहीं होनी चाहिए. अन्यथा उपज में भारी कमी आयेगी. उन्होंने बताया कि गेहूं के खेतों में यदि गुल्ली, डंडा, खरपतवार तथा काले चूर्ण वाली बालियां दिखें, तो उसे सावधानी पूर्वक तोड़ने के बाद जलाकर नष्ट कर देना होगा. अन्यथा अगले वर्ष पुनः अधिक मात्रा में गेहूं की फसल में ये दिखेंगे. लेकिन बालियां सावधानी पूर्वक तोड़ना होगा, जिससे काले चूर्ण खेत में नहीं गिर पाये. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि इस समय सरसों की फसलें कट रही हैं. सरसों फसल की उन्नत किस्मों के बीज पुनः अगले वर्ष बुवाई के लिए यदि रखना चाहते हों, तो खेत में जो अच्छे पौधे हैं, उन्हें अलग से काट कर झड़ाई के बाद तीन-चार दिन तक सूखा कर भंडारण कर लें. इससे बीज की गुणवत्ता में बढ़ोतरी होती है. उन्होंने कहा कि संकर किस्म के उपज को बीज के रूप में अगले वर्ष प्रयोग न करें. रबी की फसलें जो कट रही हैं, उन खाली खेतों की गहरी जुताई कर खेत को खुला छोड़ें, पाटा नहीं लगावें. ऐसा करने से आने वाली गर्मी में खेत के खरपतवार एवं कीट- बीमारी के जीवाणु सुख कर नष्ट हो जायेंगे, जिससे आगामी खरीफ में फसलों को लाभ होगा. इसी तरह उन्होंने मिर्च, टमाटर एवं बैंगन के खेतों में पत्ता सिकुड़ने वाला कोंकड़ी बीमारी की शिकायत पर कहा कि यह बीमारी रस चूसने वाले कीट सफेद मक्खी से फैलती है. अतः इसके निदान के लिए शुरू से ही सचेत रहना चाहिए. सबसे पहले कोकड़ी बीमारी से ग्रसित पौधों को उखाड़ कर जमीन में गाड़ दें और उसके बाद 10 दिन के अंतराल पर इमिडाक्लोप्रिड एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें. संभव हो, तो आसपास के किसानों को एक साथ यह कार्य करना चाहिए, जिससे सभी को लंबे समय के लिए लाभ मिले.

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