पत्नी को छोड़ना और फिर 'खर्चा' न देना पड़ा महंगा, गढ़वा में पुलिस ने दो पतियों को भेजा जेल

गढ़वा में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए पत्नी को छोड़ने वाले कृष्णा कुमार यादव और वीरेंद्र पासवान. फोटो: प्रभात खबर
Garhwa News: गढ़वा के रंका में पुलिस ने भरण-पोषण नहीं देने वाले दो पतियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. कोर्ट के आदेश के बावजूद एक साल तक खर्च नहीं देने पर कार्रवाई हुई. यह घटना कानून की अवहेलना करने वालों के लिए सख्त चेतावनी है और महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा को दर्शाती है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
रंका से नंद कुमार की रिपोर्ट
Garhwa News: पत्नी को छोड़ना और फिर छोड़ने के बाद जीवन बसर करने के लिए झारखंड के गढ़वा जिले के दो पतियों को महंगा पड़ गया. पुलिस ने इन दोनों पतियों को उठाकर जेल भेज दिया. मामला जिले के रंका थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने भरण-पोषण नहीं देने वाले दो पतियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है. पत्नी को छोड़कर खर्चा नहीं देने वाले दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. यह कार्रवाई उन लोगों के लिए चेतावनी है, जो अदालत के आदेश को हल्के में लेते हैं.
पत्नी को छोड़ना और खर्च न देना पड़ा भारी
मामला रंका थाना क्षेत्र के मुंगदह और तमगेकला गांव से जुड़ा है. गिरफ्तार आरोपियों में कृष्णा कुमार यादव और वीरेंद्र पासवान शामिल हैं. दोनों पर अपनी पत्नियों को घर से निकाल देने और उनके भरण-पोषण की जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने का आरोप है.
पत्नियों ने दिखाई हिम्मत, कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
पति की प्रताड़ना और उपेक्षा से परेशान पत्नियों ने हार नहीं मानी. उन्होंने न्याय के लिए गढ़वा कोर्ट का सहारा लिया. कोर्ट ने दोनों पतियों को हर महीने अपनी पत्नियों को खर्च देने का आदेश दिया था, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें.
एक साल तक नहीं दिया एक भी रुपया
कोर्ट के आदेश के बावजूद दोनों आरोपी पतियों ने करीब एक साल तक अपनी पत्नियों को एक भी रुपया नहीं दिया. लगातार आदेश की अवहेलना और जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करते रहे. इससे स्पष्ट हुआ कि वे कानून का पालन करने के प्रति गंभीर नहीं थे.
पुलिस ने घर से किया गिरफ्तार
रंका थाना प्रभारी रवि कुमार केसरी ने बताया कि दोनों आरोपी कोर्ट के आदेश की लगातार अनदेखी कर रहे थे. इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
कानून का सम्मान करना जरूरी
इस कार्रवाई के जरिए पुलिस ने साफ संदेश दिया है कि पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बचना आसान नहीं है. अदालत के आदेश का पालन करना हर नागरिक का कर्तव्य है. ऐसा न करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
समाज के लिए चेतावनी
यह मामला समाज के लिए एक सीख भी है. विवाह केवल एक सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है. पत्नी को बेसहारा छोड़ना और उसके अधिकारों का हनन करना कानूनन अपराध है.
महिलाओं के अधिकारों की रक्षा जरूरी
इस घटना ने यह भी साबित किया कि महिलाएं अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं. जरूरत पड़ने पर वे न्यायालय का सहारा लेने से पीछे नहीं हटतीं. ऐसे मामलों में प्रशासन और पुलिस की सक्रियता महिलाओं को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
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कानून तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
गढ़वा पुलिस की इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जो भी व्यक्ति कानून को नजरअंदाज करेगा, उसे इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा. भरण-पोषण जैसे मामलों में लापरवाही बरतना अब भारी पड़ सकता है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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