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East Singhbhum : मिर्गीटांड़ गांव में नेटवर्क नहीं, स्कूल के पास खंभा गाड़कर मोबाइल टांगते हैं ग्रामीण

Updated at : 18 Dec 2024 11:50 PM (IST)
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East Singhbhum : मिर्गीटांड़ गांव में नेटवर्क नहीं, स्कूल के पास खंभा गाड़कर मोबाइल टांगते हैं ग्रामीण

देश-दुनिया से कटा है गांव, आपात के समय होती है परेशानी, कई माह हो गया, लेकिन बीएसएनएल का टॉवर चालू नहीं हो सका, कई बुजुर्ग पेंशन से वंचित, सात किमी दूर से राशन लाते हैं ग्रामीण

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मो.परवेज, गालूडीह

घाटशिला प्रखंड की बाघुड़िया पंचायत में पहाड़ पर बसे मिर्गीटांड़ गांव के लोग सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं. यहां मोबाइल नेटवर्क नहीं है. ऐसे में आदिवासियों के 45 परिवार की 200 आबादी देश-दुनिया से कटी हुई है. मिर्गीटांड़ प्राथमिक विद्यालय के पास एक जगह मोबाइल का नेटवर्क मिलता है. यहां ग्रामीणों ने एक खंभा गाड़ दिया है. उसमें मोबाइल टांग कर रखते हैं. मोबाइल में रिंग होने पर वहां जाकर बात करते हैं. मिर्गीटांड़ प्रावि के शिक्षक बंकिम महतो और कृतिवास महतो स्कूल आते हैं, तो अपना मोबाइल यहीं टांग कर रखते हैं. जरूरत पड़ने पर बीआरसी मैसेज भेजते हैं. इस खंभे को गाड़ने का उद्देश्य है कि यहां नेटवर्क है. ग्रामीण कहते हैं कि नेटवर्क की गंभीर समस्या है. कोई इमरजेंसी हो, तो काफी परेशानी होती है. हालांकि, कुछ माह से बीएसएनएल का टॉवर लग रहा है.

35 परिवार ने अबुआ आवास का आवेदन दिया, एक को मिला

गांव में मात्र तीन लोगों को आवास मिला है. शुरू मार्डी को अबुआ आवास, सनातन किस्कू और मोतिलाल किस्कू को पीएम आवास मिला है. मुखिया प्रतिनिधि सुनील सिंह ने बताया कि 35 परिवारों ने अबुआ आवास के लिए आवेदन जमा किया था. गांव के लालू मार्डी और सुनील हांसदा पेंशन से वंचित हैं. दोनों की उम्र 60 से अधिक है. आधार कार्ड में उम्र की गलती से दोनों पेंशन से वंचित हैं.

सभी महिलाओं को नहीं मिलती मंईयां सम्मान राशि

ग्राम प्रधान कलेंद्र किस्कू कहते हैं मंईयां सम्मान योजना में गांव की सभी महिलाओं ने आवेदन किया है. कुछ के खाते में राशि नहीं आ रही है. यहां के लोग जंगल पर आश्रित हैं. पहाड़ों की तलहटी पर कुछ खेती करते हैं. यह गांव हाथी प्रभावित भी है.

गांव में आंगनबाड़ी नहीं, बच्चे पोषाहार से वंचित

गांव में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं होने से एक दर्जन बच्चे पोषाहार और नर्सरी शिक्षा से वंचित हैं. आंगनबाड़ी और राशन के लिए जंगल-पहाड़ पार कर सात किमी दूर नरसिंहपुर जाना पड़ता है. महीना में एक बार एएनएम गांव आती हैं. डीलर गांव में राशन नहीं पहुंचाता. लोगों को सात किमी दूर राशन लेने जाना पड़ता है.

मिर्गीटांड़ प्रावि को मवि का दर्जा देने की मांग, पांचवीं के बाद नहीं पढ़ पाते बच्चे

मिर्गीटांड़ में प्राथमिक विद्यालय वर्ष 2000 से संचालित है. यहां नर्सरी से 5वीं तक पढ़ाई होती है. यह दो पारा शिक्षक बंकिम चंद्र महतो और कृति वास महतो पढ़ाते हैं. ये जान जोखिम में डाल कर पहाड़ी रास्ते से मिर्गीटांड़ स्कूल जाते हैं. शिक्षकों ने बताया कि नर्सरी से 5वीं तक 32 बच्चे हैं. 5वीं के बाद बच्चों को सात किमी दूर पहाड़-जंगल पार कर नरसिंहपुर मवि जाना पड़ता है. इससे खासकर लड़कियों को परेशानी होती है. अभिभावक जंगली जानवरों और सुरक्षा कारणों से 5वीं के बाद पढ़ाई छुड़ा देते हैं. कुछ लड़कियों का कस्तूरबा में नामांकन हुआ, जो आगे की पढ़ाई कर रही हैं. जिनका कस्तूरबा में नामांकन नहीं होता, वह आगे पढ़ नहीं पाती हैं. लड़के साइकिल से जोखिम उठाकर नरसिंहपुर मवि या बाघुड़िया उउवि आ जाते हैं. ग्राम प्रधान कलेंद्र किस्कू, ग्रामीण रवि टुडू आदि ने कहा कि कई वर्षों से मिर्गीटांड़ प्रावि को मध्य विद्यालय का दर्जा देने की मांग की जा रही.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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