मॉनसून से पहले व्यवस्था हो दुरुस्त जुलाई प्रथम सप्ताह से पानी देने की तैयारी

Published by : ATUL PATHAK Updated At : 11 Jun 2026 12:00 AM

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टीम में ओडिशा और झारखंड दोनों राज्यों के सुवर्णरेखा परियोजना के अभियंता शामिल थे

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गालूडीह .

मॉनसून और खरीफ फसल की सिंचाई व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए ओडिशा जल संसाधन विभाग की तकनीकी टीम ने बुधवार को गालूडीह बराज का निरीक्षण किया. टीम में ओडिशा के अधीक्षण अभियंता सुरेश बेहरा, मैकेनिकल इंजीनियर सत्यश्री महापात्र और जूनियर इंजीनियर जगन्नाथ पात्र शामिल थे. वहीं झारखंड की ओर से सुवर्णरेखा परियोजना के अधीक्षण अभियंता रविकांत चौधरी, कार्यपालक अभियंता प्रीतेश होरो सहित कई अभियंता और अधिकारी मौजूद रहे. निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बराज में जल स्तर, पानी के बहाव, कंट्रोल रूम की ऑपरेटिंग प्रणाली तथा दायीं मुख्य नहर का जायजा लिया. टीम ने बराज के गेट संख्या 1 से 18 तक की जांच की. इसके अलावा दायीं मुख्य नहर में लगे तीन तथा बायीं नहर में लगे दो गेटों का भी निरीक्षण किया गया. जांच के दौरान कुछ गेटों में रीडिंग संबंधी समस्याएं पाई गईं, जिन्हें शीघ्र दूर करने का निर्देश दिया गया. अधिकारियों ने नहरों में गेज (स्केल) लगाने पर भी जोर दिया, ताकि जल स्तर की सटीक निगरानी की जा सके.

खरीफ सिंचाई से पहले व्यवस्था दुरुस्त करने पर जोर

ओडिशा के अधिकारियों ने कहा कि मॉनसून और खरीफ सीजन शुरू होने से पहले सभी तकनीकी व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त कर ली जानी चाहिए. उन्होंने बताया कि जुलाई के प्रथम सप्ताह से धान की खेती के लिए किसानों को सिंचाई जल उपलब्ध कराने की योजना है. गालूडीह बराज के पानी से ओडिशा के हजारों हेक्टेयर कृषि क्षेत्र की सिंचाई होती है, इसलिए जलापूर्ति व्यवस्था का सुचारू रहना अत्यंत आवश्यक है.

ओडिशा को पानी देती है दायीं नहर, झारखंड की बायीं नहर अधूरी

गालूडीह बराज से दो प्रमुख नहरें निकली हैं. दायीं मुख्य नहर के माध्यम से ओडिशा को सिंचाई जल उपलब्ध कराया जाता है, जबकि बायीं नहर झारखंड के किसानों के लिए बनायी गयी है, जो अभी अधूरी है. बराज और दायीं नहर निर्माण में लगभग 96 प्रतिशत खर्च ओडिशा सरकार ने वहन किया था. जल समझौते के तहत झारखंड से ओडिशा को सिंचाई जल उपलब्ध कराया जाता है. अधिकारियों ने बताया कि मॉनसून शुरू होते ही बराज के 18 गेट बंद कर पानी संग्रहित किया जाएगा और 92 मीटर आरएल जलस्तर होने पर जुलाई के प्रथम सप्ताह से दायीं नहर में पानी छोड़ा जाएगा, जिससे ओडिशा के खेतों की सिंचाई हो सकेगी.

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