दिक्कत कई हैं, क्या-क्या गिनायें

Published at :02 Apr 2016 7:44 AM (IST)
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दिक्कत कई हैं, क्या-क्या गिनायें

रानीश्वर : प्रभात खबर की टीम शुक्रवार को बिलकांदी पंचायत के जयताड़ा गांव में पहुंची और प्रभात खबर आपके द्वार के तहत लोगों से उनकी समस्याओं को जानने का प्रयास किया. ग्रामीणों ने बताया कि गांव में एक स्वास्थ्य उपकेंद्र रहते हुए भी ग्रामीणों को प्राइवेट डाॅक्टर से या पश्चिम बंगाल जाकर इलाज कराना पड़ […]

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रानीश्वर : प्रभात खबर की टीम शुक्रवार को बिलकांदी पंचायत के जयताड़ा गांव में पहुंची और प्रभात खबर आपके द्वार के तहत लोगों से उनकी समस्याओं को जानने का प्रयास किया. ग्रामीणों ने बताया कि गांव में एक स्वास्थ्य उपकेंद्र रहते हुए भी ग्रामीणों को प्राइवेट डाॅक्टर से या पश्चिम बंगाल जाकर इलाज कराना पड़ रहा है. स्वास्थ्य उपकेंद्र प्रतिदिन खुलता ही नहीं है. शिकायत करने पर भी कोई लाभ नहीं होता है. गांव में उत्क्रमित मध्य विद्यालय है, पर शिक्षकों की घोर कमी है.
आंगनबाड़ी केंद्र है, जो भवन विहीन है. पेयजल, सिंचाई की समस्या गहराती जा रही है. गरीबों को खाद्य सुरक्षा कानून के तहत राशन कार्ड नहीं मिला है. गांव के वृद्धों व विधवाओं को भी पेंशन के लिए बार-बार प्रखंड व पंचायत कार्यालय का चक्कर काटना पड़ रहा है.
पंचायत चुनाव होने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुई है. ग्रामीणों की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है. गरमी के मौसम में गांव के चापानल भी खराब हो चुका है. कई चापानलों से गंदा पानी निकलता है. महिलाएं फटीक नदी में गड्ढा बना कर वहां से पीने के लिए पानी ला रही है. जिन लोगों के पास राशन कार्ड है. उनसे जनवितरण प्रणाली के दुकानदार मनमाने ढंग से निर्धारित दर से ज्यादा पैसे वसूल रहे है. इसका विरोध करने पर भी पदाधिकारी द्वारा दुकानदार पर कार्रवाई नहीं की जाती है.
कहते हैं ग्रामीण
जयताड़ा गांव में बहुत सारे गरीब लोगों को खाद्य सुरक्षा का लाभ नहीं मिला है़ जिन गरीब लोगों के नाम पर पहले अंत्योदय व बीपीए कार्ड था़ वैसे लोगों का नाम अब कट गया है़ गरीबों को अनाज, केरोसिन तेल व अन्य सुविधा भी नहीं मिल पा रहा है. शाम के समय बिजली भी नहीं रहती है और किरासन तेल भी बंद हो गया है़ काफी परेशानी हो रही है़
– माधाई दलुई
मेरी उम्र 74 वर्ष है. पेंशन के लिए कई बार आवेदन दे चुका हूं, पर अभी तक पेंशन स्वीकृत नहीं हुई है. हमसे कम उम्र के लोगों के नाम पर पेंशन स्वीकृत हो चुका है, अब लगता है कि मरने के बाद ही पेंशन स्वीकृत होगा़
– जामात खान
पंचायत चुनाव होने के बाद भी गरीबों को रहने के लिए इंदिरा आवास नसीब नहीं हो रहा है़ गरीबों को इंदिरा आवास उपलब्ध कराने के लिए पंचायत के मुखिया, पंचायत समिति सदस्य और न ही जिला परिषद सदस्य पहल कर रहा है़
– सफरजान बीबी
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