नौ महीने में BCCL का 33% बढ़ा बकाया, DVC पर सबसे अधिक 1,215 करोड़

Updated at : 11 Feb 2026 1:50 PM (IST)
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BCCL Dues

बीसीसीएल का बढ़ता जा रहा है बकाया

BCCL Dues: बीसीसीएल का बकाया नौ महीने में 33% बढ़कर 2,984.77 करोड़ रुपये पहुंचा. डीवीसी पर सबसे अधिक 1,215 करोड़ रुपये बकाया है. टॉप-5 उपभोक्ताओं पर 80% से ज्यादा देनदारी. अविवादित भुगतान लंबित होने से कंपनी के कैश फ्लो पर असर पड़ा है. वसूली के लिए उच्चस्तरीय समन्वय जारी है. नीचे पूरी खबर पढ़ें.

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धनबाद से मनोहर कुमार की रिपोर्ट

BCCL Dues: बीसीसीएल (भारत कोकिंग कोल लिमिटेड) की वित्तीय स्थिति पर बकाया राशि का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीने (अप्रैल से दिसंबर 2025) के दौरान कंपनी का कुल बकाया 33.39% से अधिक बढ़कर 2,984.77 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. बीसीसीएल की आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में कोयला बिक्री से जुड़ा बकाया 2,656.89 करोड़ रुपये रहा, जबकि 327.88 करोड़ रुपये अनबिल्ड ड्यूज (बिल न किये गये बकाया) के रूप में दर्ज हैं. आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच बीसीसीएल ने कुल 10,929.91 करोड़ रुपये की बिलिंग की, जिसके बदले 10,114.21 करोड़ रुपये की वसूली हुई. इसके बावजूद बकाया राशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गयी, जो कंपनी के लिए चिंता का विषय है.

टॉप-5 उपभोक्ताओं पर 80% से अधिक बकाया

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बीसीसीएल के टॉप-5 उपभोक्ताओं पर ही कुल बकाया का 80 प्रतिशत से अधिक, यानी करीब 2,403 करोड़ रुपये बकाया है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन बकायों का बड़ा हिस्सा अविवादित होने के बावजूद अब तक भुगतान नहीं किया गया है. सबसे अधिक 1,215.42 करोड़ रुपये का बकाया डीवीसी पर है. इसके अलावा सेल पर 622.62 करोड़ रुपये और डीपीएल पर 395.97 करोड़ रुपये बकाया है. वहीं एनटीपीसी, आरआरवीयूएनएल और यूपीआरवीयूएनएल के मामलों में बकाया राशि में कुछ हद तक कमी दर्ज की गयी है.

कंपनी के कैश फ्लो पर सीधा असर

कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, डीवीसी पर बकाया 1,215.42 करोड़ रुपये में से 98 प्रतिशत से अधिक राशि अविवादित है. इसका साफ मतलब है कि समस्या विवाद की नहीं, बल्कि भुगतान में हो रही देरी की है. इसका सीधा असर बीसीसीएल के कैश फ्लो पर पड़ रहा है. सेल और डीपीएल के मामलों में भी अविवादित बकाया की हिस्सेदारी काफी अधिक है, जिससे बीसीसीएल की वसूली रणनीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

वसूली के लिए तेज किया जा रहा समन्वय

बीसीसीएल अधिकारियों के अनुसार, अविवादित बकाया की जल्द वसूली के लिए संबंधित कंपनियों के साथ उच्च स्तर पर समन्वय किया जा रहा है. वहीं, विवादित मामलों में कानूनी और सुलह प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं.

लागत दबाव से बढ़ा पावर कंपनियों का बकाया

बीसीसीएल की पावर कंपनियों पर बढ़ते बकाया के पीछे कई व्यावहारिक कारण सामने आ रहे है. सूत्रों के मुताबिक कोयले की क्वालिटी को लेकर लगातार विवाद, उत्पादन लागत में वृद्धि और बिजली की बिक्री अपेक्षाकृत कम दरों पर होने से बिजली कंपनियों की भुगतान क्षमता प्रभावित हुई है. लागत बढ़ने के बावजूद जब बिजली कम दाम पर बिकती है, तो कोयले का भुगतान समय पर करना कठिन हो जाता है.

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डीवीसी सबसे बड़ा बकायेदार

डीवीसी पर सर्वाधिक बकाया का एक बड़ा कारण दिसंबर–जनवरी माह में कोयला आपूर्ति में असामान्य वृद्धि भी माना जा रहा है. इस अवधि में डीवीसी को आपूर्ति 200 रैक से बढ़ाकर करीब 450 रैक कर दी गयी. सूत्र बताते हैं कि एनटीपीसी द्वारा कोयला उठाव में कमी आने के बाद बीसीसीएल ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत डीवीसी को अतिरिक्त आपूर्ति की, जिससे बकाया राशि तेज़ी से बढ़ गई. एकाएक करीब 600 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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