चितरा कोलियरी में स्थानीय युवकों को मिलेगा रोजगार

चितरा : अड़खा लीडरों की मांगों मानने पर मजबूर हुए ट्रांसपोर्टर, आज से होगा ट्रांसपोर्टिंग चालू
प्रतिनिधि, चितरा; एसपी माइंस चितरा कोलियरी के 10 नंबर कोल डंप में अड़खा की सफाई मशीनों से कराये जाने और स्थानीय युवकों को रोजगार नहीं देने के विरोध में अड़खा लीडरों द्वारा शुरू किया गया आंदोलन आखिरकार सफल रहा. लगभग पांच दिनों तक चले इस विरोध के बाद ट्रांसपोर्टर को उनकी मांगें माननी पड़ीं. बताया जाता है कि नए ट्रांसपोर्टर मां जगदंबा माइनिंग के खिलाफ अड़खा लीडरों ने जेएलकेएम सह विस्थापित नेता अरुण महतो के नेतृत्व में 8 अप्रैल से कोयला क्रशिंग कार्य को पूरी तरह ठप कर दिया था. अड़खा लीडरों का आरोप था कि कोल डंप में हाइवा और पेलोडर के माध्यम से अड़खा की सफाई नहीं करायी जा रही थी और स्थानीय युवकों को रोजगार से वंचित रखा जा रहा था. उनका कहना था कि अड़खा की सफाई नहीं होने से ट्रकों की लोडिंग के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल रही थी, जिससे मजदूरों के रोजगार पर भी असर पड़ रहा था. लगातार विरोध के बाद अंततः ट्रांसपोर्टर प्रबंधन को झुकना पड़ा. प्रबंधन ने अड़खा से स्लैग उठाव कार्य शुरू करने और स्थानीय युवकों को रोजगार देने पर सहमति जतायी है. साथ ही यह भी बताया गया कि मंगलवार से कोयला ढुलाई का कार्य पुनः शुरू हो जायेगा. इस संबंध में जेएलकेएम नेता अरुण महतो ने कहा कि अड़खा लीडरों की एकजुटता और मीडिया के सहयोग से ही यह आंदोलन सफल हो सका. मौके पर परिमल मुर्मू, दिलीप दास, निताय महतो, संतोष महतो, माणिक महतो, कृष्णा महतो, विकास चौधरी, लखीकांत, प्रदीप, पल्टन, बलराम, अर्जुन समेत अन्य मौजूद थे. हाइलार्ट्स : अड़खा लीडरों के आंदोलन के बाद ट्रांसपोर्टरों ने की वार्ता
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