देवघर में गैस की किल्लत भी नहीं रोक पाई 'सेवा की रसोई', सदर अस्पताल में लकड़ी की आंच पर पक रहा 300 लोगों का खाना
Published by : Sameer Oraon Updated At : 29 Mar 2026 9:26 PM
श्रील फाउंडेशन के सेक्रेट्री राकेश वर्मा
Deoghar Gas Crisis: देवघर के श्रील फाउंडेशन ने साबित कर दिया है कि इरादे नेक हों तो गैस की किल्लत भी रास्ता नहीं रोक सकती. पिछले 6 वर्षों से सदर अस्पताल में मात्र 10 रुपये में भोजन करा रही इस संस्था ने, गैस सिलेंडर न मिलने पर लकड़ी के चूल्हे का सहारा लिया है. सचिव राकेश वर्मा और महिमा देवी के नेतृत्व में जारी इस भागीरथ प्रयास को लोगों के सहयोग की जरूरत है.
देवघर, (संजीत मंडल की रिपोर्ट): देवघर में गैस की किल्लत ने जहां आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है, वहीं एक संस्था मुश्किल हालात में भी सेवा का काम लगातार जारी रखे हुए है. सदर अस्पताल परिसर में श्रील फाउंडेशन पिछले छह वर्षों से जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध करा रहा है. वर्ष 2020 में शुरू हुई इस पहल के तहत संस्था हर दिन सुबह और शाम मिलाकर करीब 300 लोगों को मात्र 10 रुपये में भरपेट भोजन कराती है.
गैस नहीं, अब लकड़ी के चूल्हे पर बन रहा खाना
इन दिनों गैस की भारी कमी के कारण लोगों के लिए खाना बनाना चुनौती बन गया है. इसके बावजूद फाउंडेशन से जुड़ी महिलाओं ने हार नहीं मानी. अब लकड़ी के चूल्हे का सहारा लेकर भोजन तैयार किया जा रहा है, ताकि सेवा में कोई बाधा न आए.
स्वच्छ पानी के लिए सहयोग की अपील
संस्था ने बताया कि फिलहाल भोजन करने वालों को सामान्य पानी दिया जा रहा है. ऐसे में बैंकों और बड़े संस्थानों से आरओ सिस्टम लगाने में सहयोग की अपील की गई है, ताकि जरूरतमंदों को स्वच्छ पेयजल भी मिल सके. साथ ही शहरवासियों, दानदाताओं और संस्थानों से खाद्य सामग्री और आर्थिक सहयोग देने का अनुरोध किया गया है, ताकि यह सेवा निरंतर जारी रह सके.
क्या कहते हैं संस्था के पदाधिकारी
इस संबंध में संस्था के सचिव राकेश वर्मा ने कहा कि गैस नहीं मिलने से परेशानी हो रही है, लेकिन हम सेवा नहीं रोक सकते. इसलिए अब लकड़ी के चूल्हे पर खाना बना रहे हैं. यह काम शहरवासियों के सहयोग से ही चल रहा है. वहीं, संयुक्त सचिव महिमा देवी का भी कहना है कि यह सेवा पूरी तरह लोगों के सहयोग पर आधारित है. हम चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग आगे आएं, ताकि जरूरतमंदों को लगातार भोजन मिल सके. कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्रील फाउंडेशन की यह पहल जरूरतमंदों के लिए उम्मीद की किरण बनी हुई है.
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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.
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