कभी की थी चौकीदारी, आज जनता के पहरेदार बने नारायण दास
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 May 2018 4:22 AM
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देवघर : देवघर विधायक नारायण दास ने गरीबी को मात देकर आज लोकप्रिय नेता के रूप में अपनी पहचान बनायी है. आर्थिक तंगी के बाद भी उन्होंने संघर्ष नहीं छोड़ा और आज लोगों के लिए रोल मॉडल बन गये हैं. देवघर प्रखंड के राधेमोहडार कोयरीडीह में जन्मे नारायण दास का बचपन गरीबी में बीता. युवा […]
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देवघर : देवघर विधायक नारायण दास ने गरीबी को मात देकर आज लोकप्रिय नेता के रूप में अपनी पहचान बनायी है. आर्थिक तंगी के बाद भी उन्होंने संघर्ष नहीं छोड़ा और आज लोगों के लिए रोल मॉडल बन गये हैं. देवघर प्रखंड के राधेमोहडार कोयरीडीह में जन्मे नारायण दास का बचपन गरीबी में बीता. युवा अवस्था में भी आर्थिक तंगी ने इनके परिवार का पीछा नहीं छोड़ा.
जन-जन का नेता बनने के पहले की कहानी खुद विधायक नारायण दास बताते हैं कि परिवार की आर्थिक स्थित खराब होने के कारण पिता दशरथ दास पीडब्ल्यूडी में मजदूरी करते थे. मां इंद्रमणि देवी पत्ता व दातून बेचने का काम करती थी. उन्होंने अभाव में भी हाइस्कूल कोयरीडीह से वर्ष 1985 में मैट्रिक की परीक्षा पास की और आगे की पढ़ाई के लिए देवघर कॉलेज में एडमिशन लिया. गांव से कॉलेज की दूरी करीब 18 किलोमीटर दूर थी. हर दिन कॉलेज जाना-आना संभव नहीं था.
इसके बाद वे मुंगेर में रह रहे एक मित्र बसंत कुमार सरोज के पास रहने चले गये. वहीं रह कर सीएनबी कॉलेज मुंगेर से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की. परिवार में गरीबी इस कदर व्याप्त थी कि आगे की पढ़ाई जारी रख पाना संभव नहीं था. नारायण दास बताते हैं कि एक दिन उनकी पत्नी मीरा देवी ने बाजार से सीतको साबुन (नहाने व कपड़े धोने का एक ही साबुन) लाने को कहा, लेकिन पॉकेट में एक रुपया नहीं था. इस घटना ने उन्हें काफी बेचैन कर दिया. उस रात ठीक से नहीं सोये. पत्नी की पायल बेच कर कमाने के लिए सूरत चले गये. सूरत पहुंच कर 1200 रुपये में चौकीदार का काम किया. करीब नौ माह तक काम करने के बाद सोचे कि इन पैसों से खुद व परिवार का भरण-पोषण नहीं कर पायेंगे. इसके बाद वे दिल्ली चले गये.
दिल्ली में रह रहे सरसा के रोहित दास व पांडेयडीह के पल्लू दास के पास पहुंचे. करीब एक माह तक रहने के बाद भी कोई काम नहीं मिला. फिर आजीविका के लिए रिक्शा चलाने की बात सोचने लगा. इसके लिए रिक्शा चलाना सीखने चले गये. पहला ही पैंडिल में रिक्शा अनबैलेंस हो गया. फिर मन से रिक्शा चलाने की जिद भी खत्म हो गयी. वे दिल्ली के लक्ष्मी नगर में आठ से नौ माह तक चौकीदार के रूप में काम किया. राजनीतिक की सोच अंदर में थी. इस वजह से फिर देवघर लौट आये.
मजदूर देश की रीढ़ : विधायक ने कहा कि मजदूर देश की रीढ़ होते हैं. इस पर ही देश का विकास टीका होता है. मजदूरों को अच्छी सोच के साथ हमेशा काम करते रहना चाहिए. हिम्मत नहीं हारना चाहिए. संसाधनों की कमी का रोना नहीं राेना चाहिए, बल्कि हर वक्त जीवन में खुशियों का उमंग आये इस पर भी सोचना चाहिए.
भाजपा की बयार में मन की आवाज को सुना और कूद गये राजनीति में
नारायण दास ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कारण में देश भर में भाजपा की बयार चल रही थी. इसने मन में भी राजनीति का बीज बो दिया. इसके बाद पत्नी से बात की, तो उन्होंने राजनीति में जाने की सलाह दे दी. इसके बाद राजनीति जीवन में प्रवेश किया. पहले देवघर में लोगों से मिला. भाजपा के वरीय नेता अशोक कुमार सिंह से मुलाकात की. उन्होंने तत्कालीन जिलाध्यक्ष जय प्रकाश नारायण सिंह से मुलाकात कराया. मेरी बातों से प्रभावित होेकर उन्होंने देवघर मंडल में एससी मोरचा का अध्यक्ष बना दिया गया. बाद में देवघर प्रखंड का महामंत्री, जिलामंत्री व 20 सूत्री का सदस्य बनाया गया.
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