Chaibasa News : ठकुरानी माइंस को मिला फॉरेस्ट क्लीयरेंस, छह साल बाद ड्रिलिंग शुरू
Edited by AKASH
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प. सिंहभूम. सृजित होंगे रोजगार के नये अवसर, सरकार को मिलेगा राजस्व
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जमशेदपुर/चाईबासा.
पश्चिम सिंहभूम जिले के नोवामुंडा स्थित ठकुरानी आयरन ओर माइंस को केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से 84 हेक्टेयर वन भूमि के लिए स्टेज-वन फॉरेस्ट क्लीयरेंस मिल गया है. यह माइंस वर्ष 2019 से बंद पड़ी थी. क्लीयरेंस मिलने के बाद अब खनन क्षेत्र में ड्रिलिंग कार्य शुरू हो गया है. ड्रिलिंग के बाद निकले आयरन ओर के सैंपल को ग्रेडिंग टेस्ट के लिए हजारीबाग स्थित लैब में भेजा जायेगा. इसके साथ ही भू-तत्व निदेशालय को भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की रिपोर्ट भी भेजी जाएगी. निदेशालय द्वारा औपचारिकताएं पूर्ण करने के बाद झारखंड सरकार इस माइंस की ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के तहत नीलामी करेगी. पूर्व में इस माइंस का खनन लाइसेंस पवन कुमार जैन के पास था. वर्षों से फॉरेस्ट क्लीयरेंस के अभाव में यह माइंस बंद थी. इसके पुनः चालू होने से कोल्हान क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. साथ ही झारखंड सरकार को खनन के जरिये राजस्व भी प्राप्त होगा.चाईबासा व पोटका में आयरन ओर की दो माइस खुलेगी
पश्चिम सिंहभूम के मेरालगढ़ा में आयरन ओर का और पोटका दुबलाबेड़ा(मीठा झरना के समीप) आयरन ओर व मैग्नेटाइट का माइंस खुलेगा. वर्तमान में माइंस के संभावित भंडारण को लेकर भारत सरकार खान मंत्रालय के अधीन भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण वैज्ञानिकों की टीम यहां मानचित्रण, खनिज संसाधन मूल्यांकन और भू-खतरों के अध्ययन कर रही हैं.टीम दोनों जगहों में सर्वे और मैपिंग का काम कर रही हैं. चूंकि इन दोनों माइंसों को लेकर फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिला हैं. इस कारण यहां ड्रिलिंग शुरू नहीं की जा सकी हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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