‘अंडा हमले’ का डर या ‘रेकी’ की आशंका, ममता बनर्जी के आवास पर क्यों खड़ी हुई नीली दीवार!

Edited by Mithilesh Jha
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ममता बनर्जी के घर के बाहर लगायी गयी नीली दीवारें. अंडा से बचने की कोशिश करते कुणाल घोष (इनसेट).

Mamata Banerjee Residence Blue Fences: पश्चिम बंगाल में टीएमसी नेताओं पर लगातार अंडे फेंके जाने की घटना के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित कालीघाट आवास की सुरक्षा में बड़ा बदलाव किया गया है. घर के चारों तरफ ऊंची नीली फेंसिंग लगा दी गयी है, ताकि सड़क से कोई अवांछित वस्तु अंदर न फेंकी जा सके.

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Mamata Banerjee Residence Blue Fences: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद उभरा जन-आक्रोश अब राजनेताओं के लिए सिरदर्द बन चुकी है. सूबे में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बड़े-बड़े दिग्गजों पर हाल के दिनों में अंडों से हुए हमलों (Egg Attacks) ने सुरक्षा एजेंसियों को भी परेशान कर दिया है. लोगों के गुस्से से प्रदेश की सबसे बड़ी नेता ममता बनर्जी को बचाने के लिए उनके कोलकाता के कालीघाट स्थित आवास पर अभूतपूर्व सुरक्षा प्रबंध किये गये हैं.

जब घर के ठीक बाहर कुणाल घोष पर बरसे अंडे, हिल गया सुरक्षा महकमा

ममता बनर्जी के आवास के चारों ओर रातोंरात ऊंची-ऊंची नीली रंग की फेंसिंग (सुरक्षा दीवार) कर दी गयी, ताकि सड़क से कोई उपद्रवी घर के भीतर ‘अंडे’ या कोई अन्य अवांछित वस्तु न फेंक सके. यह फैसला सोमवार को हुई एक सनसनीखेज घटना के बाद लिया गया. तृणमूल कांग्रेस के नेता और बेलेघाटा के पूर्व विधायक कुणाल घोष (Kunal Ghosh) जब ममता बनर्जी से मिलकर उनके घर से बाहर निकले, तो गुस्साये लोगों ने उन पर कच्चे अंडे फेंके थे.

ममता के घर के सामने हुए हमले से सुरक्षा अधिकारी परेशान

इस घटना ने पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहे आला अधिकारियों को परेशान कर दिया. अधिकारियों को लगा कि अगर इतनी सुरक्षा के बीच ऐसी घटना हो सकती है, तो आगे कोई बड़ी चूक भी हो सकती है. इसलिए आनन-फानन में पूरे आंगन और परिसर को ऊंची नीली फेंसिंग से घेर दिया गया.

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सौगत रॉय से लेकर अभिषेक बनर्जी तक बने निशाना

बंगाल में सत्ता बदलने के बाद जनता ने विरोध और गुस्से का इजहार करने के लिए ‘कच्चे अंडों’ को हथियार बना लिया है. सौगत रॉय और अभिषेक बनर्जी जैसे दिग्गज तृणमूल नेता भी ‘अंडा हमले’ का शिकार हो चुके हैं.

Mamata Banerjee Residence Blue Fences: रेकी की भी थी आशंका

प्रशासनिक सूत्रों की मानें, तो इस ऊंची फेंसिंग के पीछे सिर्फ अंडों से बचाव का ही एकमात्र कारण नहीं है. रणनीतिक और सुरक्षा कारण भी हैं. 4 मई को सरकार बदलने के बाद हरीश चटर्जी स्ट्रीट पर स्थित इस वीवीआईपी लेन से पुलिस के कड़े पहरे और बैरिकेड्स को हटा दिया गया था. इससे यह सड़क आम जनता के लिए पूरी तरह खुल गयी थी.

ममता के घर की रेकी की आयी थी शिकायत

रास्ता खुलने के बाद कोई भी राहगीर आसानी से घर पर नजर रख सकता था कि ममता बनर्जी से मिलने कौन से नेता और व्यवसायी आ-जा रहे हैं. हाल ही में ममता के घर की संदिग्ध रेकी (Recce) की सनसनीखेज शिकायत भी सामने आयी थी.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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