ममता बनर्जी सरकार के नियमों के तहत होगी बंगाल में शिक्षक भर्ती, समझें क्या है एसएससी विवाद

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स्कूल टीचर.

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पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन (SSC) 2025 में शिक्षक भर्ती के लिए बने नये नियमों के तहत ही नयी नियुक्तियां करेगा. कलकत्ता हाईकोर्ट में आयोग ने पारदर्शी भर्ती का आश्वासन दिया है. नया नियम ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बनाया गया था.

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पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन (SSC) आगामी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को वर्ष 2025 में ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में बनाये गये नियमों के अनुसार ही संपन्न करेगा. कलकत्ता हाईकोर्ट में भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान शुक्रवार को आयोग ने अपना रुख साफ कर दिया है. आयोग की ओर से अदालत को आश्वस्त किया गया है कि नये नियमों के तहत पारदर्शी तरीके से भर्ती होगी और राज्य सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की नीति के साथ आगे बढ़ेगी.

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हाईकोर्ट के निर्देश पर बना था नया नियम

पश्चिम बंगाल में टीएमसी शासन के दौरान एसएससी भर्ती में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगे थे. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वर्ष 2016 के पूरे पैनल को रद्द कर दिया गया था. पारदर्शी तरीके से नयी भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया था. अदालत के रुख को देखते हुए आयोग ने वर्ष 2025 में भर्ती के नये नियम तैयार किये.

उम्मीदवारों ने नये नियम को दी थी चुनौती

उम्मीदवारों ने नये नियमों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था. याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि वर्ष 2016 की भर्ती को 2016 के पुराने नियमों के आधार पर ही पूरा किया जाये, न कि वर्ष 2025 के नये नियमों से. राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले पर नयी सरकार और एसएससी से उनका आधिकारिक रुख मांगा था. इस पर एसएससी ने यह जवाब दिया.

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हाईकोर्ट में राज्य सरकार और SSC ने रखी अपनी बात

शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा की पीठ के समक्ष राज्यस्तरीय चयन परीक्षा (SLST) भर्ती से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल नीलांजन भट्टाचार्य ने कहा- सरकार का एक ही स्पष्ट रुख है, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस. हम इसे हर हाल में सुनिश्चित करेंगे. द्वितीय SLST भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2025 के नये नियमों के आधार पर ही संपन्न की जायेगी.

नियमों से जुड़ी आपत्तियों पर दें ध्यान : हाईकोर्ट

मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने आयोग को याद दिलाया कि नयी भर्ती नियमावली में आयु सीमा में छूट, रिक्त पदों की संख्या बढ़ाने और अंकों से जुड़े कई प्रावधानों को लेकर आपत्तियां दर्ज करायी गयी हैं. पीठ ने निर्देश दिया कि आयोग को इन सभी कानूनी पहलुओं और अभ्यर्थियों की जायज आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए ही कदम उठाना होगा.

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OBC आरक्षण की जटिलता पर 21 अगस्त को सुनवाई

सुनवाई के दौरान अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण का संवेदनशील मुद्दा भी उठा. पूर्व में राज्य में ओबीसी के लिए 17 प्रतिशत सीटें आरक्षित थीं. हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2010 के बाद जारी लगभग 5 लाख ओबीसी प्रमाण पत्रों और कई जातियों की सूची को रद्द किये जाने के बाद स्थिति जटिल हो गयी है. नये नियम में ओबीसी आरक्षण को घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है. जस्टिस सिन्हा ने कहा कि यह मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है. राज्य सरकार तथा एसएससी को आपस में बैठकर समन्वय के साथ ओबीसी नीति को अंतिम रूप देना चाहिए, ताकि कोई कानूनी अड़चन न आये. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त तय कर दी.


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