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बोकारो में ओडिशा के विशेष कपड़ों से होगी रथ की सजावट, नीम-चंदन के लकड़ियों से निर्मित है जगन्नाथ मंदिर की प्रतिमा

Updated at : 07 Jul 2024 3:56 PM (IST)
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बोकारो में ओडिशा के विशेष कपड़ों से होगी रथ की सजावट, नीम-चंदन के लकड़ियों से निर्मित है जगन्नाथ मंदिर की प्रतिमा

बोकारो के सेक्टर चार स्थित जगन्नाथ मंदिर की ओर से 2001 से ही रथयात्रा निकलती है. इस बार रथयात्रा के लिए ओडिशा के पिपली से विशेष कपड़े मंगाए गए हैं. रथयात्रा की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है.

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बोकारो, सुनील तिवारी : सात जुलाई को सेक्टर चार स्थित जगन्नाथ मंदिर से ऐतिहासिक 24वीं रथयात्रा निकलेगी. उत्कल सेवा समिति बोकारो की ओर से 2001 से हीं रथयात्रा का आयोजन प्रत्येक वर्ष होता आ रहा है. रथ की सजावट के लिए ओडिशा के पिपली से विशेष कपड़े मंगाये गये हैं. रथयात्रा के लिए मंदिर में तैयारी अंतिम चरण में है. मंदिर परिसर में रथ बनाने का काम चल रहा है. रथ की मरम्मत व रंग-रोगन का काम लगभग पूरा हो चुका है. अब रथ की साज-सजावट का काम कपड़ा से होना शेष है.

अत्यंत शुभ व मंगलकारी होता है जगन्नाथ का नवयौवन दर्शन

22 जून को सहस्त्रधारा स्नान के दौरान भगवान जगन्नाथ बीमार हो गये हैं. उनका इलाज चल रहा है. इस कारण मंदिर का कपाट बंद है. भगवान जगन्नाथ सात जुलाई को स्वस्थ होंगे. इस दिन सुबह सात बजे मंदिर के कपाट खुलेंगे. भक्त भगवान जगन्नाथ का नवयौवन दर्शन करेंगे, जो अत्यंत शुभ व मंगलकारी होता है.  सुबह 10 बजे से पूजा व पहंडी शुरू होगा. दोपहर 12 बजे छेरा-पहंरा की परंपरा का निर्वहन किया जायेगा. जगन्नाथ मंदिर से अपराह्न दो बजे ऐतिहासिक रथ यात्रा शुरू होगी.

श्रीराम मंदिर से 15 को निकलेगी वापसी रथयात्रा

सात जुलाई को रथयात्रा के माध्यम से भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा व ज्येष्ठ भ्राता बलभद्र के साथ रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करते हुए शाम पांच बजे सेक्टर वन स्थित मौसीबाड़ी श्रीराम मंदिर पहुंचेंगे. यहां भगवान आठ दिनों तक प्रवास करेंगे. रथ यात्रा की वापसी 15 जुलाई को होगी. श्रीराम मंदिर से वापसी रथयात्रा अपराह्न 1.30 बजे शुरू होगी. जगन्नाथ मंदिर पहुंच कर भगवान 19 जुलाई तक मंदिर के बाहर रथ पर हीं भक्तों को दर्शन देंगे. 19 जुलाई को रात्रि 8.30 बजे भगवान जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश करेंगे.

27 अगस्त 2000 को हुआ था जगन्नाथ मंदिर का शिलान्यास

बोकारो इस्पात प्रबंधन की ओर से भूमि आवंटित होने के बाद उत्कल सेवा समिति के प्रयास से निर्मित जगन्नाथ मंदिर का शिलान्यास 27 अगस्त 2000 को तत्कालीन केंद्रीय इस्पात मंत्री ब्रजकिशोर त्रिपाठी ने किया था. 2000 में शुरू हुआ मंदिर का निर्माण कार्य 2002 में पूरा हुआ. गोवर्द्धन पीठ पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर की अनुकृति के रूप में निर्मित मंदिर का उद्घाटन 18 जनवरी 2004 को पुरी के गजपति महाराज दिव्य सिंह देव ने किया था. 2024 में मंदिर परिसर से 24वीं ऐतिहासिक रथयात्रा निकलेगी.

नीम-चंदन की लकड़ी से निर्मित है जगन्नाथ मंदिर की प्रतिमा

जगन्नाथ मंदिर के अंदर नीम व चंदन की लकड़ी से निर्मित भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा व बलराम की प्रतिमा स्थापित की गयी है. मंदिर के चारों कोने पर छोटे-छोटे मंदिरों का निर्माण कर महालक्ष्मी, मां दुर्गा, विमला, काशी विश्वनाथ व भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गयी है. जगन्नाथ मंदिर बोकारो के प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में से एक है. यह पुरी के प्रसिद्ध मंदिर की प्रतिकृति है. मंदिर अद्भुत वास्तुकला व शांत वातावरण के लिए आकर्षित करता है. इन दिनों यहां रथ यात्रा की तैयारी जोर-शोर से चल रही है.

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Kunal Kishore

लेखक के बारे में

By Kunal Kishore

कुणाल ने IIMC , नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा की डिग्री ली है. फिलहाल, वह प्रभात खबर में झारखंड डेस्क पर कार्यरत हैं, जहां वे बतौर कॉपी राइटर अपने पत्रकारीय कौशल को धार दे रहे हैं. उनकी रुचि विदेश मामलों, अंतरराष्ट्रीय संबंध, खेल और राष्ट्रीय राजनीति में है. कुणाल को घूमने-फिरने के साथ पढ़ना-लिखना काफी पसंद है.

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