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पुरी की तर्ज पर निकाली जाती है सरायकेला की रथयात्रा, साढे तीन सौ वर्षों पुरानी है परंपरा

Updated at : 07 Jul 2024 3:50 PM (IST)
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पुरी की तर्ज पर निकाली जाती है सरायकेला की रथयात्रा, साढे तीन सौ वर्षों पुरानी है परंपरा

सरायकेला में प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और बहन सुभद्रा की रथ यात्रा निकालने की तैयारी शुरु हो गई है. पूरे सिंहभूम में सरायकेला की रथ यात्रा की तरह यात्रा कहीं भी नहीं निकलती है.

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सरायकेला-खरसावां , शचिंद्र कुमार दाश/प्रताप मिश्रा : सरायकेला में रथ यात्रा की तैयारी शुरु कर दी गयी है. यहां की रथ यात्रा करीब साढे तीन सौ साल पुरानी है. सरायकेला में प्रभु जगन्नाथ मंदिर के स्थापना के संबंध में कहा जाता है कि ओड़िशा के ढेंकानाल से महापात्र परिवार द्वारा प्रभु जगन्नाथ की प्रतिमा ला कर यहां स्थापना की गई थी. तभी से रथ यात्रा का आयोजन होता आ रहा है. सरायकेला में जगन्नाथ मंदिर के स्थापना के संबंध में कहा जाता है कि सरायकेला के राजा उदित नारायण सिंहदेव ने अपने शासन काल में यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया तथा रथ यात्रा उत्सव को पूरे क्षेत्र में एक अलग पहचान दी. यहां मंदिर के दिवारों में बनाये गये भगवान विष्णु के दस अवतारों की मूर्तियां किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर लेने में सक्षम है.

मौसीबाडी में दिखेंगे प्रभ जगन्नाथ के कई रुप

मौसीबाडी में प्रवास के दौरान प्रभु जगन्नाथ के कई रुप दिखाई देंगे. मौसी बाड़ी में प्रभु जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा अलग रुपों (वेशों) में नजर आयेंगे और यहीं सरायकेला के रथ यात्र की विशेषता भी है. मौसी बाड़ी में प्रवास के दौरान प्रभु जगन्नाथ की राम-बलराम, राम-परशुराम, मत्स्य-कच्छप आदि रुप में साज सज्जा की जाती है और इसे देखने के लिये बड़ी संख्या में बाहर से भी लोग सरायकेला पहुंचते है. सरायकेला को छोड़ इस तरह की साज सज्जा सिंहभूम के किसी भी जगन्नाथ मंदिर में नहीं होती हैं.

मौसीबाडी पहुंचने में लगेंगे दो दिन

सरायकेला में रथ यात्रा के दौरान प्रभु जगन्नाथ को श्रीमंदिर से मौसी बाडी तथा वापसी रथ यात्रा के दौरान मौसी बाडी से श्रीमंदिर लौटने में दो दिनों का समय लगता है. मौसी बाडी जाने व मौसीबाडी से लौटने के दौरान महाप्रभु एक रथ पर आरूढ़ हो कर विश्राम करते है व भक्तों को दर्शन देते हैं.

छेरो पोहरा के पश्चात निकलती है रथ यात्रा

सरायकेला के राजा द्वारा छेरा पोहरा नामक रश्म अदायगी के पश्चात ही यहां प्रभु जगन्नाथ का रथ निकलता है. राजा सडक पर चंदन छिडक कर झाडू लगाते है. इसके पश्चात ही प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा की प्रतिमा मंदिर से बाहर सडक पर निकाला जाता है. बीच सडक में तीनों ही प्रतिमाओं को रख कर पूजा अर्चना करने के पश्चात रथ पर चढा कर मौसीबाडी के लिये ले जाया जाता है.

रथ यात्रा पर होगा मेला का आयोजन

7 जुलाई से शुरु हो रहे रथ यात्रा उत्सव के मौके पर सरायकेला में भव्य मेला का आयोजन किया जायेगा. मेला की तैयारी शुरु कर दी गई है. नौ दिनों तक चलने वाली इस उत्सव में बच्चे, बुजुर्ग, महिला समेत हर वर्ग के लोगों के लिये मनोरंजन की व्यवस्था रहेगी. स्वादिष्ट व्यंजन से लेकर मनोरंजन के लिये कई तरह के झूला लगाये जायेंगे. मेला में बडी संख्या में लोगों के पहुंचने की बात कही जा रही है.

सरायकेला में पुरी की तर्ज में रथयात्रा का आयोजन

गन्नाथ सेवा समिति सरायकेला के अध्यक्ष सिदार्थ शंकर सिंहदेव उर्फ राजा सिंहदेव ने कहा कि सरायकेला में पुरी की तर्ज में रथयात्रा का आयोजन किया जाता है, यहां भगवान जगन्नाथ दो दिनों में मौसीबाड़ी को पहुंचते हैं. रथ यात्रा को लेकर तैयारी किया जा रहा है, रथ का निमार्ण किया जा रहा है.

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Kunal Kishore

लेखक के बारे में

By Kunal Kishore

कुणाल ने IIMC , नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा की डिग्री ली है. फिलहाल, वह प्रभात खबर में झारखंड डेस्क पर कार्यरत हैं, जहां वे बतौर कॉपी राइटर अपने पत्रकारीय कौशल को धार दे रहे हैं. उनकी रुचि विदेश मामलों, अंतरराष्ट्रीय संबंध, खेल और राष्ट्रीय राजनीति में है. कुणाल को घूमने-फिरने के साथ पढ़ना-लिखना काफी पसंद है.

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