टी–20 विश्वकप  :  हाई जोश में हैं सूर्या के शेर, क्या भारत 8वीं बार पाकिस्तान को देगा पटखनी ?

Edited by Rajneesh Anand
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सूर्य कुमार यादव और सलमान अली आगा

Ind vs Pak T20 World Cup : भारत–पाकिस्तान का मैच कहते ही क्रिकेट प्रेमियों के शरीर में डोपामाइन और एड्रेनालाईन हार्मोंन जो उत्तेजना, डर, उत्साह और खुशी जैसे भाव उत्पन्न करती हैं, उनका सेक्रेशन शुरू हो जाता है. टी–20 विश्वकप में भारत–पाकिस्तान का यह महामुकाबला खेला जाना है. रोमांच चरम पर है और दोनों देशों के दर्शक अपनी–अपनी टीम की जीत के लिए पूजा और दुआ कर रहे हैं. टी–20 विश्वकप में अबतक 8 मैच भारत–पाकिस्तान के बीच खेले गए हैं, जिनमें से 7 मैच भारत ने और एक मैच पाकिस्तान ने जीता है.

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Ind vs Pak T20 World Cup : टी–20 विश्व में हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद अंतत: पाकिस्तान भारत के साथ मैच खेलने के लिए राजी हो गया और 15 फरवरी यानी आज शाम को दोनों टीमें एक दूसरे के सामने होंगी. क्रिकेट के इतिहास में भारत और पाकिस्तान का कंपीटिशन बहुत पुराना है. विश्वकप के इतिहास पर अगर गौर करें, तो भारत का पलड़ा भारी है. आज के मैच में जब दोनों टीमें ग्राउंड पर होंगी, तो उनका जोश बहुत हाई होगा, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि पाकिस्तान पर जीत का दबाव ज्यादा होगा क्योंकि उनका प्रदर्शन काफी खराब रहा है.

विश्वकप की शुरुआत में पाकिस्तान ने क्या किया था ड्रामा?

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सूर्य कुमार यादव और सलमान आगा

विश्वकप की शुरुआत में बांग्लादेश ने यह तर्क दिया वह सुरक्षा कारणों से भारत में मैच खेलना नहीं चाहता है, जिसके बाद वह विश्वकप से बाहर हो गया और स्काॅटलैंड को शामिल किया गया. उसके बाद पाकिस्तान ने आईसीसी पर पक्षपातपूर्ण फैसला लेने और भारत के साथ मैच का बायकाॅट करने की बात कही. जिसके बाद आईसीसी के अधिकारियों ने क्रिकेट बोर्डों से बातचीत की और फिर अचानक पाकिस्तान मैच खेलने के लिए राजी हो गया. दरअसल पाकिस्तान खेल की वजह से नहीं बल्कि राजनीतिक कारणों से भी मैच का बायकाॅट करने की धमकी दे रहा था. लेकिन जब उसे यह अहसास हुआ कि ऐसा करने से पाकिस्तान को बहुत नुकसान होगा, तो उन्होंने यू टर्न मार लिया.

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टी 20 विश्वकप में भारत और पाकिस्तान ने कितने मैच खेले हैं?

भारत और पाकिस्तान के बीच टी–20 विश्वकप में अबतक 8 मैच खेले गए हैं, जिनमें से 7 में भारत ने और मात्र 1 में पाकिस्तान को जीत मिली है. 2007 से अबतक में भारत और पाकिस्तान का फाइनल में मुकाबला सिर्फ एक बार हुआ है, जिसमें भारत को जीत मिली थी. अन्य मुकाबले ग्रुप स्टेज के या फिर सुपर 10–12 के रहे हैं. 2021 में जब भारत को पाकिस्तान ने सुपर 12 के मैच में हराया था, तो भारत टाॅस हार गया था और पहले बैटिंग करते हुए 7 विकेट के नुकसान पर 151 रन बनाए थे, जिसे पाकिस्तान ने आसानी से 18वें ओवर में बिना किसी नुकसान के बना लिया था. यह टी–20 विश्वकप में भारत की पहली हार थी.

2026 के मैच में किसका पलड़ा है भारी?

बेशक टी–20 विश्वकप के रिकाॅर्ड को देखें, तो भारत मजबूत स्थिति में दिखता है, लेकिन टी–20 का फाॅर्मेट ऐसा है कि कुछ भी कहना मुश्किल होता है. बावजूद इसके दोनों देशों के खिलाड़ियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव रहता है. पाकिस्तान की स्थिति ज्यादा खराब है क्योंकि वे 8 में से सिर्फ एक ही मैच अबतक जीत पाएं हैं. वहां की जनता भी यह चाहती है कि पाकिस्तान मैच जीते, लेकिन यह तो आज का मैच और उसमें दोनों देशों का प्रदर्शन ही साबित करेगा कि विजेता कौन?

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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