खरसावां के तीन टोलों में गहराया पेयजल संकट, चापाकल पर लगी महिलाओं की लाइन

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चापाकल से लाइन लगाकर पानी निकालती महिलाएं. फोटो: प्रभात खबर

Saraikela Water Crisis: सरायकेला-खरसावां के रीडिंग पंचायत के तीन टोलों में जल जीवन मिशन की जलमीनार छह महीने से बंद है. ग्रामीण चापाकल और कुएं के पानी पर निर्भर हैं. मरम्मत नहीं होने से गर्मी में संकट गहराने की आशंका है। प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की गई है. पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट

Saraikela Water Crisis: झारखंड में अभी ढंग से गर्मी की शुरुआत भी नहीं हुई है और सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां प्रखंड के तीन टोला में अभी से ही पेयजल संकट गहराने लगा है. प्रखंड के रीडिंग पंचायत के रीडिंगदा, बिरुजारा और बुरुटोला टोला में पेयजल की समस्या पैदा हो गई है. तीनों की टोला में जल जीवन मिशन के तहत लगाए गए जलमीनार हाथी के दांत बनकर रह गए हैं. इन जलापूर्ति योजनाओं से लोगों को एक बूंद भी पानी नहीं मिल पा रहा है. स्थिति यह है कि पीने के पानी के लिए महिलाओं को लाइन लगाकर चापाकल से पानी निकालना पड़ रहा है.

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छह महीने से जलापूर्ति व्यवस्था ठप

ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2023 में रीडिंगदा, बिरुजारा और बुरुटोला टोला में जलापूर्ति योजना की शुरुआत की गई थी. करीब डेढ़ साल तक ठीक-ठाक चलने के बाद तीनों जलमीनार एक-एक कर खराब होते चले गए. पिछले एक छह महीने से तीनों जलापूर्ति व्यवस्था ठप है. ऐसे में ग्रामीणों को पानी के लिए हर दिन जुझना पड़ रहा है.

कुंआ और चापाकल से बुझती है ग्रामीणों की प्यास

रीडिंगदा, बिरुजारा और बुरुटोला टोला के ग्रामीणों की प्यास कुंआ व चापाकल की पानी से बुझती है. करीब 22 परिवार वाले बुरुटोला में जलमीनार के साथ साथ एक मात्र चापाकल भी खराब पड़ा हुआ है. यहां लोग पुराने कुंआ के पानी का इस्तेमाल करते है. 25 परिवार वाले रीडिंगदा व 17 परिवार वाले बिरुजारा दो में एक-एक चालाकाल ही चालू अवस्था में है. इसी चापाकल के पानी से ही गांव के लोगों की प्यास बुझती है.

गर्मी में बढ़ेगी लोगों की परेशान

ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के बढ़ने और धूप तेज होने के साथ ही अप्रैल से लेकर जून तक पानी के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जल्द ही इन तीनों जलमीनारों को ठीक नहीं कराया गया, तो आने वाले दिनों में पानी के लिए खासा परेशानी का सामना करना पड़ेगा. साथ ही बारिश के शुरू होते ही कुंआ का पानी दुषित हो जाता है. लोगों को स्वच्छ पानी के लिये तरसना पड़ता है.

शिकायत के बादवजूद भी नहीं हुई मरम्मत

रीडिंगदा, बिरुजारा और बुरुटोला टोला के निवासियों का कहना है कि गांव में जलमीनारों के खराब होने के संबंध में पेयजल स्वच्छता विभाग से लेकर प्रखंड कार्यालय तक कई चक्कर काटे. आवेदन दिये, लेकिन अभी तक इन तीनों जलमीनारों को दुरुस्त नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि खरसावां में पीएचईडी के कार्यालय में अक्सर ताला लटका रहता है.

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ग्रामीणों ने लगाई गुहार

ग्रामीणों ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता से तीनों जलमीनारों को ठीक कराने की गुहार लगाई है. उनका कहना है कि सरकार की ‘नल-जल योजना’ का लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है, जो कि उनके अधिकारों का हनन है. गांव के मंगल कुंभकार, सातेन कुंभकार, सुकरा मुंडा, गोमेया हेम्ब्रम, बाले हेम्ब्रम, निर्मल हेम्ब्रम, रायसिंह हांसदा, सुगुन दास हांसदा, पड़ा हांसदा, रासाय हांसदा, बुधु हांसदा, लखन हेम्ब्रम, बेनी शंकर हेम्ब्रम, पांडु कुरली, कालीचरण हाईबुरु, लक्ष्मण हेम्ब्रम, मुरली धर सोय, करम सिंह सोय आदि ने प्रशासन से पेयजल समस्या के समाधान की मांग की है.

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