विकसित भारत के सपने की ओर हनुमान कूद है एआई इंपैक्ट समिट?

Edited by Rajneesh Anand
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एआई समिट में प्रधानमंत्री मोदी

Ai Summit 2026 : विकसित भारत के सपने को सच करने के लिए भारत जिस राह पर चल पड़ा है उसी का एक मोड़ है एआई इंपैक्ट समिट. 2047 तक भारत को विकसित देशों की श्रेणी में लाने के लिए भारत सरकार ने एआई इंडस्ट्री के क्षेत्र में अपनी पैर जमाने की कोशिश शुरू कर दी है. विदेश की बड़ी कंपनियों से लेकर देसी स्टार्टअप तक हर किसी को इस क्षेत्र में मौका मिलेगा.

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Ai Summit 2026 : इंडिया एआइ इंपैक्ट समिट, 2026 का आगाज 16 फरवरी को हुआ है और 20 तारीख को यह समिट खत्म हो जाएगा. एआई समिट सुनकर आम आदमी को क्या समझ आता है? संभवत: वह यह सोचता है कि यहां चैट जीपीटी जैसे किसी टूल या फिर रोबोट्‌स की चर्चा हो रही होगी. वह यह भी सोचता है कि इस समिट में जो कुछ हो रहा है संभवत: वह उसकी नौकरी पर खतरा उत्पन्न कर सकता है. आइए समझते हैं कि दिल्ली में आयोजित होने वाला यह एआई समिट जिसे नाम दिया गया गया है इंडिया एआई इंपैक्ट समिट वह है क्या?

एआई समिट का उद्देश्य क्या है?

एआई जिसका अर्थ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है, उसकी डिमांड आज के समय में काफी बढ़ गई है. जीवन के हर क्षेत्र में इसका दखल बढ़ता जा रहा है और यह एक इंडस्ट्री की तरह बढ़ता जा रहा है. एआई की इंडस्ट्री पर अभी एक तरह से अमेरिका और चीन का राज है. एआई इंडस्ट्री पर भारत की पकड़ नहीं बन पाई है. ऐसा नहीं है कि भारत एआई के क्षेत्र में काम नहीं कर रहा है, कर रहा है, लेकिन उसकी पहचान उस तरह से नहीं बनी है जिस तरह की अमेरिका और चीन की है. इसी वजह से सरकार ने एआई समिट के जरिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को देश में बढ़ाने का संकल्प लिया है. सरकार यह चाहती है कि देश में एआई इंडस्ट्री ग्रो करे, इसी वजह से सरकार ने एआई समिट का आयोजन किया है, जिसमें देश–विदेश की कंपनियां हिस्सा ले रही हैं और इस इंडस्ट्री की जरूरतों, उपयोग और चुनौतियों पर बात हो रही है.

एआई इंडस्ट्री डेवलप करना चाहता है भारत

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पीएम मोदी और सुंदर पिचाई

आईटी एक्सपर्ट प्रभात सिन्हा ने प्रभात खबर के साथ विशेष बातचीत में बताया कि आज के दौर में हर बिजेनस में एआई का इस्तेमाल शुरू हो चुका है. एआई के एडाॅप्शन से काम आसान हो जाता है और कम समय में होने लगता है. एआई एक ऐसी इंडस्ट्री के रूप में डेवलप हो चुका है, जिसकी डिमांड लगातार बढ़ने वाली है. इसी वजह से सरकार ने इस समिट का आयोजन किया है, ताकि भारत में भी एआई इंडस्ट्री डेवलप हो, भारत किसी से पिछड़ ना जाए. भारत में समावेशी अर्थव्यवस्था है, भारत यह चाहता है कि देश की कंपनियां तो इस क्षेत्र में काम करें ही, विदेशी कंपनियां भी अगर भारत में निवेश करना चाहती हैं, तो उनका स्वागत है.

एआई समिट की आवश्यकता क्या है?

एआई की डिमांड जिस रफ्तार से बढ़ी है और जीवन का हर क्षेत्र इसके प्रभाव में है, सरकार यह चाहती है कि इसे लेकर स्पष्ट नीतियां हों. इसके उपयोग से लेकर सुरक्षा और जरूरतों पर ध्यान देने की जरूरत है. इस समिट में एआई में काम कर रहे लोग तो भाग ले ही रहे हैं, वे लोग भी हिस्सा ले रहे हैं, जो इस क्षेत्र में नये हैं, ऐसे में नाॅलेज शेयरिंग का यह बड़ा मंच बन गया है. नयी तकनीकों की जानकारी, इंवेस्टमेंट और स्किल डेवलपमेंट के लिए भी यह प्लेटफाॅर्म बहुत आवश्यक बन गया है. टेक एक्सपर्ट प्रभात सिन्हा यह कहते हैं कि भारत सरकार यह चाहती है कि एआई का उपयोग भारतीय जरूरतों के अनुसार करें.

एआई आम आदमी के लिए कैसे सुलभ होगा?

एआई को आम आदमी के लिए सुलभ बनाने और इसके उपयोग को अधिक से अधिक बढ़ाने के लिए सरकार एक इको सिस्टम डेवलप करना चाहती है. इसी उद्देश्य से सरकार ने एआई समिट का आयोजन किया है. प्रभात सिन्हा बताते हैं कि एआई का काम इंसान की अपेक्षा ज्यादा सटीक होता है. जैसे कि अगर किसी आपरेशन के लिए 10सेंटीमीटर का कट लगना है, तो संभव है कि एक डाॅक्टर उससे कुछ कम या ज्यादा का कट लगाए, लेकिन अगर वो काम एक मशीन करेगा, तो वही करेगा जितना उससे करने को कहा गया है यानी वह बिलकुल 10सेंटीमीटर का ही कट लगाएगा. हां, वह आपरेशन अकेले नहीं कर सकता है, उसे इसके लिए एक अभिभावक की जरूरत होती है, जो उसे निर्देश देता रहे. जीवन के हर क्षेत्र में आज एआई की जरूरत इसलिए हो रही है क्योंकि वह काम को आसान बना रहा है. वह एक इंसान से जल्दी अनुवाद कर सकता है, वह 100 पेज की किताब को हमसे पहले पढ़ लेता है. यही वजह है कि एआई आज सबकी जरूरत बन गया है.

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क्या एआई की वजह से बड़ी संख्या में जाएगी नौकरियां?

एआई को लेकर एक बड़ी आशंका यह है कि यह हजारों लोगों को बेरोजगार कर सकता है, इसी वजह से लोग इसके प्रयोग से घबराते हैं. इस बारे में प्रभात सिन्हा कहते हैं कि एआई लोगों की नौकरियां ले लेगा यह सोच गलत है. एआई को अपना असिस्टेंट बनाकर रखें, वह आपके काम को आसान करेगा. हां, यह जरूर है कि एआई के आने से काम का स्वरूप बदलेगा और काम करने वालों को थोड़ा अपग्रेड होना पड़ेगा, बाकी डर फिजूल हैं.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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