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असफल प्रेम संबंध को आपराधिक केस में नहीं बदला जा सकता, कलकत्ता हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

Updated at : 18 Feb 2026 2:15 PM (IST)
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Failed Love Relationship High Court Verdict West Bengal Crime News

आपसी सहमति से बने संबंधों पर कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला. फोटो : AI

Failed Love Relationship High Court Verdict: कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा है कि असफल प्रेम संबंध को आपराधिक मुकदमे में नहीं बदला जा सकता. सहमति से बने रिश्ते के टूटने पर दुष्कर्म या धोखाधड़ी का केस दर्ज करना कानून का दुरुपयोग है. अदालत ने संबंधित मामला रद्द करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की.

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Failed Love Relationship High Court Verdict: असफल प्रेम संबंध को आपराधिक मुकदमे में बदलना कानून का उद्देश्य नहीं है. कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में यह टिप्पणी करते हुए दुष्कर्म और धोखाधड़ी के आरोपों से जुड़े एक केस को रद्द कर दिया. अदालत ने स्पष्ट कहा कि सहमति से बने संबंध के बाद रिश्ता टूटने पर उसे आपराधिक रंग देना न्यायसंगत नहीं है.

महिला ने दर्ज करायी थी शिकायत

मामला एक महिला द्वारा दर्ज करायी गयी शिकायत से जुड़ा था. इसमें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ था. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि विवाह का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाये गये. हालांकि, अदालत ने रिकॉर्ड और परिस्थितियों की समीक्षा के बाद पाया कि दोनों के बीच संबंध सहमति से बने थे और लंबे समय तक चले थे.

आपसी सहमति से बने संबंध को नहीं मान सकते अपराध

कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि यदि दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से संबंध बने हों और बाद में किसी कारण से विवाह न हो पाये, तो इसे क्रिमिनल ऑफेंस नहीं माना जा सकता. अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए.

असफल प्रेम संबंध को अपराध बताना कोर्ट पर बेवजह दबाव बनाना

कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर असफल प्रेम संबंध को दुष्कर्म या आपराधिक धोखाधड़ी का मामला बना देना न्याय व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव डालता है. इसलिए तथ्यों और परिस्थितियों की गहन जांच जरूरी है. इस फैसले को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सहमति की कानूनी व्याख्या के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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पूरे मामले को समझें

यह मामला कोलकाता से जुड़ा है. कोलकाता से प्रकाशित हिंदी दैनिक समाचार पत्र प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक, एक महिला ने एक पुरुष के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 417 (धोखाधड़ी), 376 (बलात्कार) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत प्राथमिकी दर्ज करायी थी. आरोप था कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाये और बाद में शादी से मुकर गया.

महिला का कहना था कि दोनों के बीच संबंध शादी के वादे पर आधारित थे. जब आरोपी ने विवाह नहीं किया, तब उसने इसे धोखा और शारीरिक शोषण बताया. इसी आधार पर आपराधिक मामला दर्ज हुआ और जांच शुरू हुई.

कब का है मामला?

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों के बीच संबंध वर्ष 2017 में शुरू हुआ था. वर्ष 2018 में महिला गर्भवती हुई और बाद में बच्चे को जन्म दिया. संबंध लंबे समय तक चलता रहा. अदालत ने इस तथ्य पर विशेष ध्यान दिया कि यह एक क्षणिक या दबाव में बना संबंध नहीं था, बल्कि परस्पर सहमति से चला रिश्ता था.

मामला कोर्ट क्यों पहुंचा?

आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर क्रिमिनल केस को रद्द करने की मांग की. उसका तर्क था कि संबंध पूरी तरह आपसी सहमति से था और इसे बाद में आपराधिक रंग दिया गया. उसने कहा कि केवल शादी न होने से बलात्कार का मामला नहीं बनता. मामला इसलिए हाईकोर्ट पहुंचा, क्योंकि निचली अदालत में केस चल रहा था और आरोपी ने इसे रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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