Ansh Anshika Case: साल 2026 साल का दूसरा दिन. अभी नए साल के खुमार में पूरी रांची डूबी हुई थी. लेकिन शहर के धुर्वा क्षेत्र से दो सगे भाई-बहन अपने घर से अचानक लापता हो गए. अंश और अंशिका नाम के दोनों बच्चों की उम्र इतनी कि केवल अपना नाम ही बता सकें. ठंड में सूरज की गर्मी के इंतजार की तरह मां बाप परेशान हो गए. 13 दिन से दोनों खोए बच्चे शहर की आंखों का तारा बन गए. जिसने भी इस खबर को सुना परेशान हो गया. रांची पुलिस पर दबाव बढ़ने लगा. एसआईटी बना दी गई. देश भर में जांच के लिए हर थाने में जानकारी भिजवा दी गई.
झारखंड के नंबर वन अखबार, प्रभात खबर ने भी बच्चों को ढूंढने के लिए अपनी स्पेशल इंवेस्टिगेटिव टीम गठित की. आखिरकार, नन्हे मासूमों का सवाल था. 14 जनवरी को मकर संक्रांति के सूर्य की पहली किरण ने रामगढ़ की पहाड़ियों को चूमा, दोनों बच्चे भी उजाले में आ गए. समय 7.30 बजे चितरपुर लाइन पार स्थित एक घर के पास दोनों मासूम मिल गए.
सुबह 7:30 बजे का नजारा, मासूम बच्चों की बरामदगी
बुधवार सुबह करीब 7:30 बजे चितरपुर लाइन पार स्थित पहाड़ी इलाके के एक घर के सामने दोनों मासूम बच्चे शांत बैठकर सूरज की पहली किरण का इंतजार कर रहे थे. आस-पड़ोस के लोग और युवा वहां इकट्ठा हो गए. जैसे ही किसी ने रजरप्पा पुलिस को सूचना दी, पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बच्चों को सुरक्षित अपनी गोद में लिया. दोनों के चेहरे पर हल्की मुस्कान और आंखों में थोड़ी डर के बावजूद राहत झलक रही थी.
परिवार की चिंता, 13 दिनों की व्याकुलता
अंश अंशिका की मां और दादी पिछले 13 दिनों से निरंतर चिंता और आस के बीच जी रही थीं. हर पल उनके चेहरे पर बेचैनी, आंखों में आंसू और दिल में उम्मीद का मिश्रण साफ दिख रहा था. एक मां और पिता हर छोटे-से संकेत पर घर की ओर देखते, हर कदम पर प्रार्थना करते और बच्चों की सलामती के लिए हनुमान जी के सामने दीप जलाते रहे. उनके आंसू, उनके सपने और उनकी लगातार उम्मीद, पूरे शहर को भी उनके साथ खड़ा कर दिया था.
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मकर संक्रांति की शुभ बेला, ईश्वर की कृपा
मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर यह नन्हे-मासूमों की बरामदगी पूरे शहर के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं थी. अंश और अंशिका की मुस्कान, जैसे रांची की सुबह की पहली धूप में फैल गई हो. इस दिन की खुशियों में केवल पर्व का उल्लास ही नहीं, बल्कि परिवार और पूरे समुदाय की राहत और ईश्वर की कृपा का अहसास भी शामिल हो गया.

