झारखंड का अनोखा मंदिर, जहां बसता है मां का निराकार स्वरूप

Updated:
विज्ञापन

बुढ़िया माता मंदिर, हजारीबाग, झारखंड

Budhiya Mata Temple: झारखंड के हजारीबाग स्थित बुढ़िया माता मंदिर में बिना मूर्ति मां दुर्गा की पूजा होती है. यहां श्रद्धालु दीवार को ही देवी का निराकार स्वरूप मानकर आराधना करते हैं.

विज्ञापन

Budhiya Mata Mandir Hazaribagh: देशभर में मां दुर्गा के अनेक मंदिर हैं, जहां उनकी भव्य और सजीव मूर्तियां स्थापित हैं. कहीं पिंडी के रूप में तो कहीं शिलाओं पर उकेरे गए स्वरूप में मां की आराधना की जाती है. लेकिन झारखंड के हजारीबाग जिले के इचाक प्रखंड में स्थित करीब 300 साल पुराना ‘बुढ़िया माता मंदिर’ अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है. यहां न तो कोई मूर्ति है और न ही पिंडी, बल्कि एक साधारण दीवार को ही मां का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है.

आपके शहर में

विज्ञापन

दीवार में बसता है मां का निराकार स्वरूप

इचाक स्थित इस प्राचीन मंदिर में श्रद्धालु एक दीवार के सामने माथा टेकते हैं. मान्यता है कि इसी दीवार में मां बुढ़िया का दिव्य वास है. बिना किसी मूर्त रूप के भी यहां की आस्था इतनी गहरी है कि दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं. करीब तीन सदियों से यह परंपरा बिना रुके चली आ रही है. खासकर नवरात्रि के दौरान यहां विशेष रौनक देखने को मिलती है. सप्तमी के दिन श्रद्धालु दीवार पर उभरी हल्की आकृति पर सिंदूर चढ़ाते हैं. लोगों का विश्वास है कि सच्चे मन से मां से मांगी गई हर मुराद यहां पूरी होती है.

1668 की महामारी से जुड़ी है पौराणिक कथा

इस मंदिर के साथ एक प्राचीन कथा भी जुड़ी है. कहा जाता है कि वर्ष 1668 में इचाक क्षेत्र में हैजा महामारी फैल गई थी. उस समय एक वृद्ध महिला बाजार में प्रकट हुईं. उन्होंने गांव वालों को कुछ मिट्टी दी और कहा कि इसे गांव से दूर रख दें, इससे महामारी समाप्त हो जाएगी. कुछ ही समय बाद वह महिला अचानक गायब हो गईं और धीरे-धीरे महामारी भी खत्म हो गई. बाद में वही मिट्टी तीन पिंडी के रूप में उभर आई, जिन्हें आज भी पूजनीय माना जाता है. तभी से इस स्थान को दिव्य मानकर पूजा-अर्चना की जाने लगी.

नवरात्रि और रामनवमी पर उमड़ती है श्रद्धा

मंदिर के मुख्य पुजारी बताते हैं कि मां के इस निराकार स्वरूप में अपार शक्ति है. यहां सालभर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन नवरात्रि, रामनवमी और दुर्गा पूजा के दौरान विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं. नवरात्रि में लगातार पूजा-पाठ होता है और भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं. साल में दो बार मां का वस्त्र भी बदला जाता है, जो यहां की विशेष परंपरा है.

ये भी देखे: कैथा मंदिर का चमत्कारी जल, कान रोग ठीक होने की है यहां मान्यता

रूप से परे आस्था का प्रतीक

स्थानीय श्रद्धालु गायत्री देवी कहती हैं, “इस मंदिर की महिमा बताना ऐसे है जैसे उगते सूरज को दीपक दिखाना.” भक्तों का मानना है कि मां बुढ़िया सच्चे मन से प्रार्थना करने वालों को शक्ति और समृद्धि प्रदान करती हैं. बुढ़िया माता मंदिर इस बात का जीवंत उदाहरण है कि आस्था किसी मूर्ति या आकार की मोहताज नहीं होती. यहां मां का निराकार रूप श्रद्धालुओं और ईश्वर के बीच अटूट विश्वास का प्रतीक बन चुका है.

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola