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बंगाल चुनाव 2026 : वोट नहीं डाल पायेंगे तृणमूल के पंचायत समिति के कार्यपालक?

Updated at : 28 Feb 2026 4:44 PM (IST)
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Bengal Elections 2026 Trinamool leader Will be deprived of voting

वोटर लिस्ट में शफीकुल आलम के नाम पर लिख दिया अंडर एडजुडिकेशन.

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के बीच जारी वोटर लिस्ट ने पूर्व बर्धमान जिले में तृणमूल कांग्रेस के नेता की मुश्किल बढ़ा दी है. भातार विधानसभा क्षेत्र के पंचायत समिति के कार्यपालक का नाम एडजुटिकेशन लिस्ट में डाल दिया गया है. इससे उनके वोटिंग राइट पर खतरा मंडरा रहा है.

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बर्दवान/पानागढ़, मुकेश तिवारी : पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद जारी अंतिम वोटर लिस्ट के बाद भातार में एक नया विवाद खड़ा होना तय माना जा रहा है. वोटर लिस्ट से लाखों मतदाताओं के नाम या तो गायब हैं या उनके सामने ‘अंडर एडजुडिकेशन’ लिखा आ रहा है. पूर्व बर्धमान जिले के भातार पंचायत समिति के कार्यपालक सदस्य शफीकुल आलम का नाम भी इसी श्रेणी में डाल दिया गया है.

भातार विधानसभा क्षेत्र के हरिपुर निवासी हैं शफीकुल

267 भातार विधानसभा क्षेत्र के हरिपुर निवासी शफीकुल आलम पंचायत समिति के निर्वाचित सदस्य और कार्यपालक हैं. शनिवार को जैसे ही उन्होंने नयी वोटर लिस्ट देखी, हैरान रह गये. उनका कहना है कि सभी जरूरी दस्तावेज जमा करने के बावजूद उनका नाम इस श्रेणी में कैसे चला गया, यह समझ से परे है. उन्होंने मामले की जानकारी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दी है.

तृणमूल कांग्रेस के नेताओं में बढ़ी बेचैनी

इस घटना के बाद इलाके के तृणमूल नेताओं और कार्यकर्ताओं में भी बेचैनी बढ़ गयी है. आशंका जतायी जा रही है कि यदि समय पर उनका मामला स्पष्ट नहीं हुआ, तो वे विधानसभा चुनाव 2026 में मतदान नहीं कर पायेंगे.

न्यायिक अधिकारी कर रहे 60 लाख से अधिक वोटर की जांच

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद करीब 60,06,675 मतदाताओं की पात्रता की न्यायिक अधिकारी दोबारा जांच कर रहे हैं. यह संख्या कुल मतदाताओं का लगभग 8.5 प्रतिशत है. अंतिम वोटर लिस्ट में इन लोगों के नाम तो हैं, लेकिन उनके सामने ‘अंडर एडजुडिकेशन’ दर्ज है. जब तक जांच पूरी नहीं होती, वे वोट नहीं डाल सकेंगे.

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14 फरवरी को थी एसआईआर हियरिंग की आखिरी तारीख

चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पहले चरण में नवंबर-दिसंबर के दौरान दस्तावेजों की जांच कर कई नामों को मंजूरी दी गयी थी. बाद में चुनाव आयोग के माइक्रो-ऑब्जर्वर्स ने कुछ मामलों को दोबारा जांच के लिए भेज दिया. 14 फरवरी को सुनवाई की आखिरी तारीख थी. इसके ठीक पहले लंबित मामलों की संख्या बढ़कर 60 लाख से ज्यादा हो गयी.

14 फरवरी को बंद हो गया दस्तावेज अपलोड करने का ऑप्शन

कई चुनाव पंजीकरण अधिकारियों (ERO) का कहना है कि जिन नामों को पहले सही मानकर मंजूरी दी गयी थी, उन्हें बाद में ‘रिवर्स’ कर दिया गया. 14 फरवरी को ECINET पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने का विकल्प भी बंद कर दिया गया. इससे सुधार का मौका नहीं मिला.

3 राज्यों के 530 अधिकारी कर रहे दस्तावेजों की जांच

अब पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के 530 न्यायिक अधिकारियों को इन मामलों की जांच की जिम्मेदारी दी गयी है. ERO को भी यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि उनके क्षेत्र के कितने मामले लंबित हैं. इससे मतदाता और अधिकारी दोनों असमंजस में हैं.

अधर में लाखों वोटर का मामला

चुनाव आयोग द्वारा जारी सूची में जिन लोगों को ‘अंडर एडजुडिकेशन’ में रखा गया है, उनका अंतिम फैसला अगली सप्लीमेंट्री लिस्ट में होगा. अगर जांच में उनके सभी दस्तावेज सही पाये जाते हैं, तो उन्हें वोटर लिस्ट में मतदाता के रूप में वैलिडेट कर दिया जायेगा. तब तक लाखों मतदाताओं की तरह भातार पंचायत समिति के कार्यपालक शफीकुल आलम का मामला भी अधर में लटका रहेगा.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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