एसआईआर की बैठक में कैसे आये बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव? सुकांत मजूमदार का सवाल

उत्तर 24 परगना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ चार्जशीट जारी करते सुकांत मजूमदार. फोटो : एएनआई
पश्चिम बंगाल के पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कलकत्ता हाईकोर्ट में एसआईआर पर हुई बैठक में राज्य के पूर्व मुख्य सचिव मनोज पंत के शामिल होने पर सवाल खड़े किये हैं. केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई बैठक में वे किस हैसियत से शामिल हुए. इस आरोप पर तृणमूल का डॉ शशि पांजा ने पलटवार किया है.
बंगाल चुनाव 2026 से पहले राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. एक ओर राज्य की रूलिंग पार्टी तृणमूल कांग्रेस चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगा रही है, तो अब भाजपा ने टीएमसी से सवाल पूछा है. केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने मंगलवार को पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट में हुई बैठक में राज्य के पूर्व मुख्य सचिव किस हैसियत से शामिल हुए?
एसआईआर पर हाई लेवल मीटिंग में शामिल हुए मनोज पंत
पश्चिम बंगाल प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और अब केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने मंगलवार को आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एसआईआर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए बुलायी गयी हाई लेवल मीटिंग में राज्य के पूर्व मुख्य सचिव मनोज पंत सहित कई लोग शामिल हुए.
बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव मनोज पंत की गिरफ्तारी की मांग
पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्षी दल भाजपा के नेता ने इस मामले की जांच और पूर्व मुख्य सचिव पंत की गिरफ्तारी की मांग की. सुकांत मजूमदार ने आरोप लगाया कि 21 फरवरी को हुई बैठक के दौरान राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार द्वारा न्यायपालिका को प्रभावित करने की कोशिश की गयी.
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट ने बुलायी थी बैठक
सुकांत मजूमदार ने उत्तर 24 परगना जिले के बारासात में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में ये बातें कहीं. उन्होंने दावा किया कि कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल के साथ बैठक सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई थी. यह बैठक विशेष रूप से एसआईआर प्रक्रिया को लागू करने के तौर-तरीकों पर निर्णय लेने के लिए बुलायी गयी थी. इसमें केवल उन्हीं अधिकारियों को शामिल होने की अनुमति थी, जिनके नाम दिये गये थे.
अगर सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी लिस्ट के बाहर का कोई भी व्यक्ति बैठक में शामिल हुआ, तो यह अदालत के आदेश का सीधा उल्लंघन है. मनोज पंत के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए और उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए.
सुकांत मजूमदार, केंद्रीय मंत्री
21 फरवरी की बैठक में इन लोगों को होना था शामिल
सुकांत मजूमदार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि इस बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ), निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और महाधिवक्ता के अलावा अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को शामिल होना था. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को 21 फरवरी को बैठक करने का निर्देश दिया था, ताकि एसआईआर पर आगे की रणनीति पर चर्चा की जा सके.
किस हैसियत से बैठक में शामिल हुए मनोज पंत?
सुकांत मजूमदार ने कहा- आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि एसआईआर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए बैठक में कौन-कौन उपस्थित होने के लिए ऑथराइज्ड थे. मुझे जानकारी मिली है कि मनोज पंत उस बैठक में उपस्थित थे. सुकांत मजूमदार ने पूछा कि पंत किस हैसियत से उपस्थित थे? वे अब मुख्य सचिव नहीं हैं.
जांच का आदेश दे सुप्रीम कोर्ट
केंद्रीय मंत्री ने बैठक में पंत की उपस्थिति को ‘पूरी तरह से अवैध’ करार दिया. कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का उल्लंघन करने और एसआईआर की प्रक्रिया से संबंधित कार्यवाही को प्रभावित करने का प्रयास करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को कथित उल्लंघन की जांच का आदेश देना चाहिए और किसी भी अनधिकृत व्यक्ति की भागीदारी को आपराधिक कृत्य मानना चाहिए.
आरोप लगाने से पहले सबूत पेश करे भाजपा – डॉ शशि पांजा
तृणमूल कांग्रेस की नेता और राज्य सरकार में वरिष्ठ मंत्री डॉ शशि पांजा ने मजूमदार के दावे को खारिज कर दिया. कहा कि भाजपा निराधार दावे करने के लिए जानी जाती है. शशि पांजा ने कहा कि भाजपा को इस तरह के आरोप लगाने से पहले सबूत पेश करने चाहिए. उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता इस तरह की राजनीति को खारिज कर देगी.
20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने दिया था ‘असाधारण’ फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को पश्चिम बंगाल में विवादों से घिरी एसआईआर प्रक्रिया में चुनाव आयोग की सहायता के लिए सेवारत और पूर्व जिला जजों को तैनात करने का एक ‘असाधारण’ निर्देश जारी किया था.
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By Mithilesh Jha
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