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पश्चिम बंगाल में एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, तैनात होंगे लीगल ऑफिसर, 28 को जारी होगा वोटर लिस्ट

Updated at : 20 Feb 2026 6:24 PM (IST)
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Supreme Court decision on SIR West Bengal

सुप्रीम कोर्ट.

Supreme Court Decision on SIR West Bengal: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के मुद्दे पर चुनाव आयोग और राज्य सरकार में चल रही रस्साकशी के बीच एक साथ कई बड़े आदेश दिये हैं. राज्य सरकार के रवैये पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट को एसआईआर प्रक्रिया पूरी करने के लिए लीगल ऑफिसर्स को तैनात करने के निर्देश दिये हैं.

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Supreme Court Decision on SIR West Bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य में चल रहे वोटर लिस्ट स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है. देश की सबसे बड़ी अदालत ने एसआईआर के लिए पर्याप्त संख्या में ‘ए’ ग्रेड के ऑफिसर उपलब्ध नहीं कराने पर बंगाल सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया. सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को आदेश दिया कि वे एसआईआर के लिए लीगल ऑफिसर्स की तैनाती करें. साथ ही रिटायर्ड जजों की भी तलाश करें. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने अपनी बड़ी जीत बतायी है. तृणमूल कांग्रेस ने क्या बयान दिया है, यह भी आपको बतायेंगे, लेकिन उससे पहले जान लें कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में क्या-क्या कहा है.

सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर को इन 6 प्वाइंट्स में समझें

  1. लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी लिस्ट में शामिल लोगों के दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए लीगल ऑफिसर नियुक्त करने के आदेश
  2. सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट से कहा- मुख्य सचिव, डीजीपी और निर्वाचन आयोग के अधिकारियों समेत सभी स्टेकहोल्डर्स की बैठक बुलायें.
  3. सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को 28 फरवरी को बंगाल में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पब्लिश करने की अनुमति दी. सप्लीमेंट्री लिस्ट बाद में भी जारी की जा सकती है.
  4. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सेवारत और पूर्व न्यायिक अधिकारी तार्किक विसंगति सूची में शामिल लोगों के दावों और आपत्तियों पर फैसला करेंगे.
  5. वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवजीन के लिए ‘ए’ ग्रेड अफसर उपलब्ध नहीं कराने पर सुप्रीम कोर्ट बंगाल सरकार से नाराज
  6. सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कलकत्ता हाईकोर्ट के जज बंगाल में एसआईआर में मदद के लिए लीगल ऑफिसर्स उपलब्ध करायें और पूर्व जजों की तलाश करें

वोटर लिस्ट पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वोटर लिस्ट का प्रकाशन नहीं रुकेगा. कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि वह 28 फरवरी 2026 को वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट जारी कर सकता है. कहा कि इसके बाद सप्लीमेंट्री लिस्ट भी जारी कर सकते हैं. कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में विवादों से घिरी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में निर्वाचन आयोग की सहायता के लिए वर्किंग और रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट जजों की तैनाती का शुक्रवार को निर्देश दिया.

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लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के मामले निबटायेंगे लीगल ऑफिसर

निर्वाचन आयोग और तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के बीच ‘दुर्भाग्यपूर्ण आरोप-प्रत्यारोप’ पर खेद जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने राज्य में एसआईआर प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कई नये निर्देश जारी किये. पीठ ने तार्किक विसंगति सूची (लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी लिस्ट) में शामिल व्यक्तियों के दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए न्यायिक अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति का आदेश दिया.

बंगाल सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने अपनाया सख्त रुख

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से पश्चिम बंगाल में एसआईआर के काम में सहायता के लिए न्यायिक अधिकारियों को मुक्त करने और पूर्व जजों को खोजने के लिये कहा. पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए ‘ए’ श्रेणी के पर्याप्त अधिकारियों को उपलब्ध नहीं कराने पर कड़ा रुख अपनाया.

28 फरवरी को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी करने की कोर्ट ने दी अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया को 28 फरवरी तक राज्य में मतदाताओं की मसौदा सूची प्रकाशित करने की अनुमति दे दी. साथ ही निर्वाचन आयोग को बाद में पूरक सूचियां (सप्लीमेंट्री लिस्ट्स) जारी करने की भी अनुमति दी.

एसआईआर के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट तैनात करेगा लीगल ऑफिसर्स

पीठ ने पश्चिम बंगाल के जिलाधिकारियों और एसपी को निर्देश दिया कि वे जारी एसआईआर कवायद के लिए तैनात न्यायिक अधिकारियों को सहायता और सुरक्षा प्रदान करें. साथ ही यह स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारियों द्वारा पारित आदेशों को न्यायालय के आदेश के समान माना जायेगा. कोर्ट ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में न्यायिक अधिकारियों को ‘माइक्रो ऑब्जर्वर’ और राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा सहायता प्रदान की जायेगी.

Supreme Court Decision: लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी में क्या?

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को राज्य की मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी समेत सभी हितधारकों की शनिवार तक बैठक आयोजित करने का निर्देश भी दिया. वर्ष 2002 की मतदाता सूची से संतानों के संबंध में तार्किक विसंगतियों में माता-पिता के नाम का मेल न होना और मतदाता तथा उनके माता-पिता की आयु में 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक का अंतर होना शामिल है.

तृणमूल कांग्रेस ने फैसले को बताया बंगाल की बड़ी जीत

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल के लोगों की बड़ी जीत बताया है. पार्टी ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया में लिखा है कि आज का दिन ऐतिहासिक विध्वंस का प्रतीक है. इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया का अहंकार चूर-चूर हो गया. मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने एक बार एक अछूत अधिपति की तरह इधर-उधर घूमते हुए आश्वस्त किया कि उसका शब्द अंतिम था. वह भ्रम टूटकर विस्मृत हो गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने दिया नॉकआउट पंच – तृणमूल कांग्रेस

तृणमूल कांग्रेस ने आगे लिखा है कि रोल पर्यवेक्षक अपने राजनीतिक आकाओं के लिए खेल में हेरा-फेरी करने के लिए वैध मतदाताओं को मिटाने की साजिश रचते हुए, वैध दावों पर रोक लगा रहे थे और रोक रहे थे. सुप्रीम कोर्ट ने अभी-अभी नॉकआउट पंच दिया है. सभी दावे, आपत्तियां और तार्किक विसंगति के मामले अब कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा नियुक्त निष्पक्ष न्यायिक अधिकारियों द्वारा संभाले जायेंगे.

टीएमसी ने फैसले को बताया चुनाव आयोग के लिए झटका

यह चुनाव आयोग के लिए एक झटका है. जिस चुनाव आयोग ने अपने पवित्र संवैधानिक कर्तव्य को त्याग दिया और भाजपा के निहित स्वार्थों को पूरा करने वाले एक पक्षपातपूर्ण हिट दस्ते में बदल गया. वास्तव में उन्हें मुंह की खानी पड़ी है. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें याद दिलाया है कि लोगों की संप्रभु शक्ति सत्ता में बैठे लोगों की छोटी महत्वाकांक्षाओं को कुचल देती है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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