ईसीएल खदान में समाया तालाब का लाखों गैलन पानी, जामुड़िया में जलसंकट, भड़के ग्रामीण

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यहीं से रिसकर सामने वाली खदान में समा गया तालाब का लाखों गैलन पानी. फोटो : प्रभात खबर

यहीं से रिसकर सामने वाली खदान में समा गया तालाब का लाखों गैलन पानी. फोटो : प्रभात खबर

Jamuria News: जामुड़िया के केंदा में ईसीएल खदान में हुए जोरदार विस्फोट ने एक ऐतिहासिक तालाब को रातोंरात सुखा दिया. इस घटना से सैकड़ों ग्रामीण परिवारों के सामने जल संकट खड़ा हो गया है. स्थानीय लोगों में आक्रोश है और वे ईसीएल प्रबंधन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.

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जामुड़िया से जितेंद्र कुमार त्रिवेदी

Jamuria News: जामुड़िया विधानसभा क्षेत्र के केंदा स्थित खेपा डांगा माझीपाड़ा इलाके में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) खदान में जोरदार धमाके के बाद अफरा-तफरी मच गयी. ईसीएल की केंदा ओपन-कास्ट खदान में खनन के लिए किये गये विस्फोट के कारण गांव का ऐतिहासिक और बारिश के पानी से लबालब भरा तालाब देखते ही देखते जलविहीन हो गया. तालाब का वजूद चंद घंटों में मिटने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया. स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है.

संकट में सैकड़ों जिंदगियां

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, केंदा गांव का यह तालाब आसपास के सैकड़ों निवासियों और मवेशियों के लिए जल का मुख्य जरिया था. भोजन पकाने, कपड़े धोने, नहाने, पूजा-पाठ और पशुपालन के लिए पूरा गांव इसी पानी पर आश्रित था. इसका पानी सूख जाने से सैकड़ों जिंदगियां संकट में आ गयीं हैं.

क्षमता से अधिक तीव्रता का किया गया विस्फोट: ग्रामीण

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शनिवार देर रात खदान में निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक तीव्रता का डायनामाइट विस्फोट किया गया. इस धमाके के झटके से तालाब के किनारे का एक बड़ा हिस्सा (तटबंध) अचानक धंस गया. इसके चलते तालाब का लाखों गैलन पानी तेजी से बहता हुआ सीधे ओपन-कास्ट खदान के गड्ढे में समा गया और रविवार सुबह तक तालाब सूखा मैदान बन गया.

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आज तालाब सूखा है, कल हमारे घर भी ढहेंगे : बिपदतारण

केंदा में उपजे इस आकस्मिक जल संकट को लेकर स्थानीय निवासी बिपदतारण भट्टाचार्य और कृष्ण मुर्मू ने ईसीएल (ECL) अधिकारियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है. ग्रामीणों ने कहा कि इलाके में पहले से ही पानी की किल्लत थी. अब इस मुख्य तालाब के सूख जाने से हमारी दिनचर्या पूरी तरह ठप हो गयी है. हमने बार-बार ईसीएल अधिकारियों से मांग की थी कि गांव के पास विस्फोट की तीव्रता कम रखें और बिना पूर्व सूचना के धमाके न करें, लेकिन प्रबंधन ने हमारी एक न सुनी. आज तो सिर्फ तालाब का तटबंध टूटा है, यही स्थिति रही तो कल हमारे घर भी जमींदोज हो जायेंगे.

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अधिकारियों की चुप्पी से बढ़ा गुस्सा, जांच शुरू

इतने बड़े हादसे और पूरे गांव पर छाये जल संकट के बावजूद ईसीएल प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं की गयी है. इससे ग्रामीणों में असंतोष और अधिक गहरा गया है. पीड़ित ग्रामीण अब क्षति के आकलन, तटबंध की तत्काल मरम्मत और गांव में वैकल्पिक जलापूर्ति (टैंकरों से) की मांग कर रहे हैं. प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी गयी है, ताकि विस्फोट के प्रभाव और तकनीकी लापरवाही का पता लगाया जा सके.

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मिथिलेश झा

लेखक के बारे में

By मिथिलेश झा

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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