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एसआईआर के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट ने ओडिशा और झारखंड से मांगे 200 लीगल ऑफिसर

Updated at : 26 Feb 2026 10:03 PM (IST)
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SIR Bengal Calcutta High Court

कलकत्ता हाईकोर्ट.

पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अब तक 532 जजों को इस काम में लगाया गया है. 273 ने काम शुरू भी कर दिया है. काम इतना कठिन हो गया है कि और न्यायिक अधिकारियों की जरूरत है. इसलिए कलकत्ता हाईकोर्ट ने झारखंड और ओडिशा से 100-100 लीगल ऑफिसर की मांग की है.

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पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कार्य को समय पर पूरा करने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट पूरी तरह से तत्पर है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने पड़ोसी राज्यों झारखंड और ओडिशा से 100-100 (कुल 200) न्यायिक अधिकारियों की मांग की है. बृहस्पतिवार को दोनों राज्यों के हाईकोर्ट को इस संबंध में पत्र भेज दिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार और चुनाव आयोग में समन्वय की कमी पर जतायी थी नाराजगी

मतदाता सूची में विसंगतियों को दूर करने के काम में पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच समन्वय की कमी पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जतायी थी. शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि डेटा संबंधी त्रुटियों के निपटारे के लिए न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी है. इसकी जिम्मेदारी कलकत्ता हाईकोर्ट को सौंपी थी.

एसआईआर के काम में लगे 532 जज, 273 ने शुरू किया काम

आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 532 जजों को इस काम में लगाया गया है. इनमें से 273 ने काम शुरू भी कर दिया है. हालांकि, काम की विशालता को देखते हुए और अधिक न्यायिक अधिकारियों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी. कलकत्ता हाईकोर्ट अब झारखंड और ओडिशा के जवाब का इंतजार कर रहा है, ताकि इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया को त्रुटिहीन बनाया जा सके.

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कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने की समीक्षा बैठक

कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने पश्चिम बंगाल में जारी मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) और राज्य के शीर्ष अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की. इस प्रक्रिया के लिए न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की गयी है.

20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने पुनरीक्षण प्रक्रिया के लिए राज्य सरकार द्वारा पर्याप्त संख्या में ‘ए’ श्रेणी के अधिकारी मुहैया नहीं कराये जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल से एसआईआर कार्य में सहायता के लिए कुछ न्यायिक अधिकारियों एवं पूर्व न्यायाधीशों को उपलब्ध कराने को 20 फरवरी को कहा था.

कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने सप्ताह में तीसरी बार की बैठक

चीफ जस्टिस ने सप्ताह में तीसरी बार पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की. बैठक एसआईआर प्रक्रिया की समीक्षा के लिए की गयी. कोर्ट के निर्देश पर उन लोगों के दावों और आपत्तियों पर निर्णय के लिए न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की गयी है, जिन्हें तार्किक विसंगति सूचियों में डाला गया है और जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाये जा सकते हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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