कॉरपोरेट अस्पतालों को मदद की साजिश

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 May 2016 5:47 AM

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आक्रोश. क्लिनिकल इस्टेब्लिसमेंट एक्ट के विरुद्ध चिकित्सकों ने दिया धरना, कहा सुपौल : सरकार द्वारा लागू किये गये नये क्लिनिकल इस्टेब्लिसमेंट एक्ट के विरोध में जिले के चिकित्सकों के साथ ही पैथोलोजिकल लैब, रेडियोलोजी व अन्य चिकित्सा सेवाओं से जुड़े कर्मियों ने बुधवार को समाहरणालय के समक्ष धरना दिया. आइएमए के नेतृत्व में आयोजित धरना-प्रदर्शन […]

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आक्रोश. क्लिनिकल इस्टेब्लिसमेंट एक्ट के विरुद्ध चिकित्सकों ने दिया धरना, कहा

सुपौल : सरकार द्वारा लागू किये गये नये क्लिनिकल इस्टेब्लिसमेंट एक्ट के विरोध में जिले के चिकित्सकों के साथ ही पैथोलोजिकल लैब, रेडियोलोजी व अन्य चिकित्सा सेवाओं से जुड़े कर्मियों ने बुधवार को समाहरणालय के समक्ष धरना दिया. आइएमए के नेतृत्व में आयोजित धरना-प्रदर्शन के माध्यम से चिकित्सकों व संबंधित कर्मियों ने सरकार द्वारा लागू किये गये इस एक्ट को पूरी तरह अव्यवहारिक बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की. आइएमए के शिष्टमंडल ने मौके पर डीएम को एक ज्ञापन भी सौंपा. जिसमें कहा गया है कि अगर सरकार द्वारा जबरन इस काले कानून को चिकित्सकों पर थोंपा गया तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी सारी जिम्मेदारी सरकार व प्रशासन की होगी.
धरना को संबोधित करते हुये वक्ताओं ने कहा कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना सरकार का दायित्व है, लेकिन अस्पतालों में उपलब्ध बदतर चिकित्सा सेवा की वजह से मरीज प्राइवेट क्लिनिकों में इलाज कराने को विवश हैं. छोटे क्लिनिक कम खर्च में मरीजों को उन्नत सेवा प्रदान करते हैं, लेकिन नये कानून को लागू किये जाने से छोटे क्लिनिक व नर्सिंग होम बंद हो जायेंगे और सिर्फ अपोलो, मैक्स व फोर्टिस जैसे फाइव स्टार नर्सिंग होम को क्लिनिक चलाने की आजादी होगी, जबकि इन अस्पतालों में इलाज का खर्च महंगा होने की वजह से इसका खामियाजा गरीब व मध्यम वर्ग के लोगों को उठाना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बड़े व कॉरपोरेट घरानों के महंगे अस्पतालों को लाभान्वित करने की साजिश रची जा रही है. चिकित्सकों ने बताया कि नया एक्ट अव्यवहारिक व जटिलताओं से भरा है. जिसे पूरा करना छोटे व मंझोले क्लिनिक के लिए संभव नहीं है. बावजूद राज्य सरकार द्वारा 15 मई तक सभी क्लिनिक व चिकित्सक को नये एक्ट के तहत पंजीकरण के लिए बाध्य किया जा रहा है. 30 अप्रैल को बिहार के चिकित्सकों ने पटना के गांधी मैदान में विरोध प्रदर्शन किया था. बावजूद सरकार अपने जिद पर अड़ी हुई है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का इंतजार है. इस बीच सरकार द्वारा अगर उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई की गयी तो वे व्यापक व उग्र आंदोलन का रास्ता अख्तियार करेंगे. मौके पर आइएमए के अध्यक्ष डॉ एमएन मल्लिक, सचिव डॉ बीके यादव, कोषाध्यक्ष डॉ शांति भूषण, डॉ सीके प्रसाद, डॉ ओपी अमन, डॉ अजीत श्रीवास्तव, डॉ अनित चौधरी, डॉ संतोष झा, डॉ बीआर दास, डॉ आर आर गुप्ता, डॉ जे लाल, डॉ केपी सिंह, डॉ उम चौधरी, डॉ एसएन यादव, डॉ विकास कुमार, डॉ बीएल मेहता, डॉ रौशन सिंह, डॉ सीबी मंडल, डॉ बीएन पासवान आदि मौजूद थे.
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