बिचौलियों के चंगुल में मरीज
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 May 2016 4:51 AM
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लापरवाही. पदस्थापित चिकित्सक एक साथ करते हैं अस्पताल व क्लिनिक का काम अस्पताल में पदस्थापित कई चिकित्सक के शह से दलाल परिसर सहित इमरजेंसी कक्ष और प्रसव कक्ष में खुले आम घूमते नजर आ रहे हैं. कई दलाल तो विधिवत अस्पताल में पदस्थापित चिकित्सक के निजी क्लिनिक में बतौर कंपाउंडर अथवा नर्स के रूप में […]
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लापरवाही. पदस्थापित चिकित्सक एक साथ करते हैं अस्पताल व क्लिनिक का काम
अस्पताल में पदस्थापित कई चिकित्सक के शह से दलाल परिसर सहित इमरजेंसी कक्ष और प्रसव कक्ष में खुले आम घूमते नजर आ रहे हैं.
कई दलाल तो विधिवत अस्पताल में पदस्थापित चिकित्सक के निजी क्लिनिक में बतौर कंपाउंडर अथवा नर्स के रूप में तैनात हैं. संबंधित चिकित्सक की ड्यूटी के समय तथाकथित कंपाउंडर और नर्स अस्पताल में विचरण कर भोले-भाले मरीजों को बहला फुसला कर चिकित्सक के निजी क्लिनिक में ले जाते हैं. जहां मरीज व उनके परिजनों का जम कर आर्थिक और मानसिक शोषण किया जाता है.
सुपौल : स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के लाख दावों के बावजूद सदर अस्पताल में व्याप्त बिचौलिया प्रथा पर लगाम लगने की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही है. अस्पताल में पदस्थापित कई चिकित्सक के शह से दलाल परिसर सहित इमरजेंसी कक्ष और प्रसव कक्ष में खुले आम घूमते नजर आ रहे हैं.
कई दलाल तो विधिवत अस्पताल में पदस्थापित चिकित्सक के निजी क्लिनिक में बतौर कंपाउंडर अथवा नर्स के रूप में तैनात हैं. संबंधित चिकित्सक की ड्यूटी के समय तथाकथित कंपाउंडर और नर्स अस्पताल में विचरण कर भोले-भाले मरीजों को बहला फुसला कर चिकित्सक के निजी क्लिनिक में ले जाते हैं. जहां मरीज व उनके परिजनों का जम कर आर्थिक और मानसिक शोषण किया जाता है.
गुरुवार की दोपहर सदर अस्पताल में कुछ इसी प्रकार का नजारा सामने आया. जब यहां पदस्थापित एक सर्जन अपने इमरजेंसी ड्यूटी के दौरान अपने निजी क्लिनिक से आये मरीज का उपचार करते देखे गये. दरअसल गुरुवार के दोपहर इमरजेंसी वार्ड में डॉ एएसपी सिन्हा की ड्यूटी थी. डॉ सिन्हा इमरजेंसी वार्ड में मरीजों को देखने में व्यस्त थे.
इसी दौरान उनके निजी क्लिनिक से सायका नामक प्राइवेट नर्स क्लिनिक का पुरजा एवं मरीज को साथ लेकर इमरजेंसी वार्ड में पहुंची. चिकित्सक द्वारा सभी कार्य को छोड़ कर पहले निजी क्लिनिक से आये अपने मरीज का उपचार कर उसे दवा लिखना उचित समझा. यह सब तब हो रहा था जब उक्त चिकित्सक के समक्ष ही आइएमए सहरसा के सचिव डॉ जितेंद्र कुमार सिंह, वरीय सदस्य सह रेड क्रॉस सोसाइटी के सचिव डॉ कन्हैया प्रसाद सिंह एवं अस्पताल के पूर्व उपाधीक्षक डॉ अरुण कुमार वर्मा उपस्थित थे. लेकिन उक्त चिकित्सक ने तनिक भी परहेज नहीं किया और निजी क्लिनिक के पुरजे पर उक्त मरीज का उपचार कर उसे पुन: अपने निजी क्लिनिक पर भेज दिया.
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