किसान सलाहकार के साथ नहीं होगा खिलवाड़
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 May 2016 5:18 AM
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आक्रोशित किसान सलाहकार 21 मई को करेंगे आंदोलन का आगाज सुपौल : पूर्व मुख्य सचिव अशोक कुमार चौधरी की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति को रिपोर्ट तैयार करने में चूक हुई है. दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के अनुसार समिति के द्वारा साढ़े चार लाख संविदा कर्मियों की सेवा स्थायी करने की बात […]
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आक्रोशित किसान सलाहकार 21 मई को करेंगे आंदोलन का आगाज
सुपौल : पूर्व मुख्य सचिव अशोक कुमार चौधरी की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति को रिपोर्ट तैयार करने में चूक हुई है. दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के अनुसार समिति के द्वारा साढ़े चार लाख संविदा कर्मियों की सेवा स्थायी करने की बात कही गयी है,
लेकिन उसमें किसान सलाहकार का उल्लेख नहीं करना कृषि विभाग, किसान सलाहकार व किसान भाइयों के साथ घिनौना मजाक है. समिति स्थायी कर्मियों की सूची में किसान सलाहकार को शामिल करे, नहीं तो संपूर्ण बिहार में करो या मरो की तर्ज पर 21 मई 2016 को आतंकवाद विरोध दिवस/बलिदान दिवस के दिन से किसान सलाहकार आंदोलन का आगाज करेंगे. उक्त बातें बिहार राज्य किसान सलाहकार संघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष डॉ अमन कुमार ने जिला मुख्यालय स्थित बीबीसी कॉलेज सभागार में आयोजित किसान सलाहकार संघ के बैठक को संबोधित करते हुए कहीं.
डॉ कुमार ने कहा कि किसान सलाहकार कृषि विभाग व किसान भाइयों बीच की मजबूत कड़ी है. किसान सलाहकार के कठिन मेहनत के कारण बिहार सरकार को दो बार कृषि कर्मण पुरस्कार मिली है. किसान भाइयों के चेहरों पर मुस्कान देखी जा रही है. फिर भी इनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की साजिश हो रही है.
जिसे किसी भी शर्त पर कामयाब नहीं होने देंगे. डॉ कुमार ने कहा कि चौधरी कमेटी सेवा स्थायी करने का सपना दिखाकर लाखों युवाओं के भविष्य को रद्दी टोकरी में फेंकने का इंतजाम कर दिये है. बिहार सरकार के किसी भी विभाग में कार्यरत संविदा, चयनित, नियोजित कर्मी की सेवा स्थायी बिना किसी परीक्षा की होनी चाहिए. चौधरी समिति का रिपोर्ट आधारहीन और तथ्य विहीन है. ये समिति रिपोर्ट के नाम पर खानापूर्ति की है.
समिति के द्वारा सही तरीके से समीक्षा और मंथन नहीं किया गया है. श्रेणी वन व श्रेणी टू युक्ति संगत नहीं है. रिपोर्ट में कहा गया है नौकरी होगी स्थायी पर सरकारी सेवक नहीं माने जायेंगे. समिति का रिपोर्ट अधूरा है. इससे पहले भी पक्की नौकरी की प्रक्रिया एवं नियोजन की सेवा शर्तों की निर्धारण में पैमाने पर त्रुटि रहने के कारण मुख्यमंत्री महोदय रिपोर्ट को लौटा चुके है. समिति को अब तक तीन बार अवधि विस्तार दिया जा चुका है फिर भी रिपोर्ट अधूरा है, जो चिंता का विषय है.
बिहार के किसी भी विभाग में कार्यरत संविदा कर्मी, चयनित कर्मी, नियोजित कर्मी, अल्पकालीन कर्मी की तत्क्षण पूर्ण सरकारी कर्मी की दर्जा देते हुए सम्मानजनक वेतनमान की मांग बिहार सरकार से वे करते है. बैठक में संघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी धनंजय यादव, उमेश यादव, संजय कुमार, ललित यादव, अमोद कुमार आंबेडकर, रघुनंदन कुमार, अरविंद कुमार, पवन कुमार, विजय कुमार आदि उपस्थित थे.
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