Sitamarhi: मानव सेवा की मिसाल बने बब्बन और प्रियंका, मरीजों के भरोसे का दूसरा नाम बना आरोग्या फाउंडेशन
Published by : Sarfaraz Ahmad Updated At : 14 Jun 2026 9:50 PM
मरीजों की देखभाल करते स्वास्थ्यकर्मी बब्बन कुमार और प्रियंका कुमारी
सीतामढ़ी के आरोग्या फाउंडेशन में कार्यरत बब्बन कुमार और प्रियंका कुमारी अपने सेवा भाव और समर्पण से मरीजों का दिल जीत रहे हैं. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर वर्ग के मरीज उनके व्यवहार और देखभाल की सराहना कर रहे हैं. पढ़ें पूरी खबर...
सीतामढ़ी से अमिताभ कुमार की रिपोर्ट
Sitamarhi News: चिकित्सा केवल उपचार का माध्यम नहीं, बल्कि मानव सेवा का सबसे संवेदनशील रूप भी है. सीतामढ़ी स्थित आरोग्या फाउंडेशन में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मी बब्बन कुमार और प्रियंका कुमारी इसी भावना को अपने कार्य के जरिए जीवंत कर रहे हैं. मरीजों के प्रति उनके सेवा भाव, आत्मीय व्यवहार और समर्पण की चर्चा अब फाउंडेशन आने वाले लोगों के बीच आम हो गई है.
आरोग्या फाउंडेशन में आने वाले बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग न केवल इलाज के लिए यहां पहुंचते हैं, बल्कि उन्हें यहां एक ऐसा माहौल भी मिलता है, जहां अपनापन और संवेदनशीलता का अनुभव होता है.
बच्चों के लिए बन जाते हैं दोस्त
थेरेपी के दौरान अक्सर बच्चे घबराते हैं या सहयोग करने से कतराते हैं. लेकिन बब्बन कुमार और प्रियंका कुमारी अपने सहज और दोस्ताना व्यवहार से बच्चों का विश्वास जीत लेते हैं. संस्थान से जुड़े लोगों का कहना है कि दोनों स्वास्थ्यकर्मी बच्चों को खेल-खेल में थेरेपी के लिए तैयार कर लेते हैं. उनकी बातचीत और व्यवहार से बच्चे सहज महसूस करते हैं, जिससे उपचार की प्रक्रिया भी आसान हो जाती है.
एक दिन की अनुपस्थिति भी महसूस करते हैं मरीज
मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि दोनों स्वास्थ्यकर्मी मरीजों से व्यक्तिगत जुड़ाव रखते हैं. यही कारण है कि यदि किसी दिन बब्बन या प्रियंका केंद्र में मौजूद नहीं हों, तो मरीज उनकी कमी महसूस करते हैं. संस्थान में नियमित आने वाले कई परिजन बताते हैं कि दोनों का व्यवहार केवल स्वास्थ्यकर्मी जैसा नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य जैसा होता है.
संस्थान की ताकत है समर्पित टीम
आरोग्या फाउंडेशन के संस्थापक सचिव और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजेश सुमन ने कहा कि संस्थान की सबसे बड़ी ताकत उसकी समर्पित टीम है. उन्होंने कहा कि सभी कर्मी पूरी निष्ठा और सेवा भावना के साथ मरीजों की देखभाल करते हैं. डॉ. सुमन ने कहा कि बब्बन कुमार और प्रियंका कुमारी जैसे कर्मियों की प्रतिबद्धता संस्थान के उद्देश्यों को मजबूत बनाती है और मरीजों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास में निभा रहे अहम भूमिका
गौरतलब है कि आरोग्या फाउंडेशन ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी और बौद्धिक दिव्यांगता से प्रभावित बच्चों के पुनर्वास तथा उनके परिवारों के सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्य कर रहा है.
ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में बब्बन कुमार और प्रियंका कुमारी का सेवा भाव न केवल संस्थान की पहचान को मजबूत कर रहा है, बल्कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कार्यरत अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है.
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लेखक के बारे में
By Sarfaraz Ahmad
सरफराज अहमद IIMC से प्रशिक्षित पत्रकार हैं. राजनीति, समाज और हाइपरलोकल मुद्दों पर लिखते हैं. क्रिकेट और सिनेमा में गहरी रुचि रखते हैं. बीते तीन वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत हैं।
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