गन्ना किसानों ने होली बहिष्कार का लिया निर्णय

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Mar 2016 6:44 AM

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तस्करी अब भी जारी, बदला सिर्फ तरीका बैरगनिया : भारतीय सीमा क्षेत्र से तस्करी का धंधा अब भी जारी है. तरह-तरह का सामान तस्करी के माध्यम से नेपाल पहुंचाया जा रहा है. इस पर रोक लगाने के लिए कई स्तर पर जांच की व्यवस्था है, बाजवूद यह धंध रूक नहीं रहा है. इसके पीछे यह […]

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तस्करी अब भी जारी, बदला सिर्फ तरीका

बैरगनिया : भारतीय सीमा क्षेत्र से तस्करी का धंधा अब भी जारी है. तरह-तरह का सामान तस्करी के माध्यम से नेपाल पहुंचाया जा रहा है. इस पर रोक लगाने के लिए कई स्तर पर जांच की व्यवस्था है, बाजवूद यह धंध रूक नहीं रहा है. इसके पीछे यह कहा जा रहा है कि तस्करी करने का तरीका बदल गया है.
यही कारण है कि इस धंधे पर रोक लगाने वाली कुछ एजेंसियों को तस्करी के बदले तरीके व रूप की जानकारी हीं नहीं है. जिसे जानकारी है वह तस्करों पर हाथ डालने से परहेज कर रहा है. यह कहने में दो मत नहीं कि संंबंधित अधिकारी व तस्करों के बीच गहरा संबंध बन गया है. तस्करी के बदले रूप व जारी धंधे की बाबत प्रखंड के डुमरवाना गांव के प्रदीप पासवान ने कस्टम आयुक्त, मुख्य आयुक्त, सहायक आयुक्त व वित्त मंत्री से लिखित तौर पर शिकायत की है. बताया है कि कैसे अधिकारी व तस्कर मिलीभगत कर सरकार के राजस्व का चुना लगा रहे हैं.
ऐसे होता है धंधा
बताया गया है कि कस्टम अधिकारी की मिलीभगत से निर्यात के नाम पर बड़े पैमाने पर तस्करी की जा रही है. कस्टम उच्चाधिकारियों को बताया गया है कि तस्कर रेलवे के माध्यम से सूरत व दुबई से सामान बैरगनिया लाते हैं और गौर में बैठे तस्करों के हवाले कर देते हैं. प्रदीप की माने तो नवोदय इंटरप्राइजेज व माहलक्ष्मी ट्रेडर्स नामक फॉर्म के नाम पर उक्त दोनों शहरों से कपड़ा व अन्य सामान यहां लाया जाता है.
दोनों फॉर्म के नाम पर कस्टम द्वारा बिल काटा जाता है और माल नेपाल पहुंचा दिया जाता है. सच्चाई यह है कि उक्त दोनों नाम का बैरगनिया में कोई फर्म नहीं है. कागज पर भले हीं दोनों फर्म होगा, पर धरातल पर उसका कोई नामो-निशान नहीं है.
प्रतिबंधित सामान की तस्करी
सूरत से कहने के लिए सिर्फ सूती कपड़ा पोपलीन व एकरंगा लाया जाता है और कस्टम द्वारा इसी सामान का बिल भी काटा जाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि कपड़े की गांठ के साथ सिगरेट, गुल व खैनी भी नेपाल भेजा जाता है. कपड़े की तरह उक्त प्रतिबंधित सामान का भी गांठ बनाया रहता है ताकि कोई शक न करे.
बताया गया है कि प्रत्येक गांठ के एवज में कस्टम को 500 तो फर्म मालिक को 200 रुपये मिलता है. 25 हजार तक का सामान फ्री ले जाना है, लेकिन एक बार में 10 लाख तक का सामान ले जाया जाता है. धंधेबाजों व फर्म मालिकों द्वारा उक्त सामान का कोई वाणिज्य या इनकम टैक्स का
भुगतान नहीं किया जाता है. स्टेशन से टायर से नेपाल सामान ले जाया जाता है. एक टायर पर करीब 20 लाख का सामान लदा रहता है, लेकिन कस्टम द्वारा मात्र दो-तीन लाख का बिल बनाया जाता है.
कहते हैं कस्टम अधिकारी
स्थानीय कस्टम अधीक्षक एम अंसारी ने बताया कि आरोप निराधर है. नियमों का पालन कर नेपाल सामान भेजा जा रहा है.
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