Samastipur News:छात्राओं की पिटाई करना शिक्षक को पड़ा महंगा, हुई कार्रवाई

Published by : ABHAY KUMAR Updated At : 08 Jul 2025 7:06 PM

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बीईओ रितेश कुमार ने उक्त शिक्षक की प्रतिनियुक्ति उत्क्रमित मध्य विद्यालय रामपुर केसोपट्टी अगले आदेश तक कर दी है.

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Samastipur News: समस्तीपुर : प्रखंड के मध्य विद्यालय सिंघियाखुर्द का शैक्षणिक माहौल बिगाड़ने व आरटीई का उल्लंघन करने वाले शिक्षक मो. शमशूल इस्लाम शमसी पर कार्रवाई करते हुए बीईओ रितेश कुमार ने उक्त शिक्षक की प्रतिनियुक्ति उत्क्रमित मध्य विद्यालय रामपुर केसोपट्टी अगले आदेश तक कर दी है. विदित हो कि विगत चार जुलाई को वर्ग 8वीं की कुछ छात्राओं की पिटाई प्रश्न पूछताछ के दौरान स्टीक से कर दी थी. इस वजह से विद्यालय का शैक्षणिक माहौल गरमा गया और आक्रोशित ग्रामीण उक्त शिक्षक के विरुद्ध कार्रवाई की मांग करने लगे. कुछ छात्राओं ने बताया कि विज्ञान विषय के अध्ययन के दौरान उक्त शिक्षक सूक्ष्म जीव और फसल पर पूछताछ कर रहे थे. इस दौरान कुछ ने जवाब दिया तो कुछ छात्राओं ने नहीं दिया. शिक्षक मो. शमशूल इस्लाम शमसी ने आरटीई एक्ट का उल्लंघन करते हुए हथेली के विपरीत दिशा में स्टीक से पिटाई करना शुरू कर दिया. छात्राओं ने जोर से नहीं पिटाई करने का अनुरोध किया लेकिन शिक्षक ने पिटाई करने का सिलसिला जारी रखा. पिटाई से आहत छात्राओं ने इसकी शिकायत प्रधानाध्यापक व अपने परिजनों से की. बीईओ ने बताया कि टीचर को किसी भी छात्र के साथ शारीरिक दंड देने का कानूनी अधिकार नहीं है. भारतीय संविधान और कानून के अनुसार बच्चों को मारना, प्रताड़ित करना या डराकर पढ़ाना पूरी तरह गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है. इसे लेकर भारतीय कानून कहता है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 हर व्यक्ति को व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है, जिसमें बच्चों की गरिमा और सुरक्षा भी शामिल हैं. राइट टू एजुकेशन एक्ट, 2009 की धारा 17 के अनुसार, कोई भी छात्र शारीरिक दंड या मानसिक प्रताड़ना का शिकार नहीं होगा. ऐसा करने वाले व्यक्ति के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने ‘पेरेंट्स फोरम फॉर मीनिंगफुल एजुकेशन बनाम भारत सरकार (2001)’ केस में स्पष्ट रूप से कहा था कि स्कूलों में शारीरिक दंड का कोई स्थान नहीं है. बच्चों की गरिमा के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता. अनुशासन सिखाने के लिए हिंसा का इस्तेमाल असंवैधानिक है. शिक्षक शैक्षणिक वातावरण को प्रभावित न करें.

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