कुछ जगहों पर होगी हल्की बारिश
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 May 2015 1:20 AM
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समस्तीपुर : राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय स्थित ग्रामीण कृषि मौसम सेवा व भारत मौसम विज्ञान विभाग ने आगामी 20 से 24 मई तक मौसम पूर्वानुमान जारी किया गया है. इस संबंध में नोडल पदाधिकारी डॉ आइबी पांडेय ने बताया कि पूर्वानुमान की अवधि में उत्तर बिहार के जिलों में आसमान में हल्के बादल देखे जायेंगे. इस […]
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समस्तीपुर : राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय स्थित ग्रामीण कृषि मौसम सेवा व भारत मौसम विज्ञान विभाग ने आगामी 20 से 24 मई तक मौसम पूर्वानुमान जारी किया गया है. इस संबंध में नोडल पदाधिकारी डॉ आइबी पांडेय ने बताया कि पूर्वानुमान की अवधि में उत्तर बिहार के जिलों में आसमान में हल्के बादल देखे जायेंगे.
इस अवधि में कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी हो सकती है. हालांकि आमतौर पर मौसम के शुष्क रहने की भी बात बतायी गयी है.
औसतन 8 से 20 किमी प्रति घंटा की गति से पुरवा हवा चलने की संभावना है.
इस अवधि में सतही हवा तेज चलने की संभावना है. न्यूनतम तापमान 26 से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच जबकि अधिकतम तापमान के 37 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान लगाया गया है. आज का अधिकतम तापमान 35.7 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 23.7 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया है. किसानों को भी कई सुझाव कृषि वैज्ञानिकों ने दिया हैं.
इसमें खरीफ धान के बीज की व्यवस्था कर 20 मई के बाद अगात धान के बिचड़े गिराने, बीज गिराने के पूर्व बीजोपचार आवश्यक करने की सलाह दी गयी है. हरी खाद के लिए सनई और ढैंचा की बुआई व हरा चारा के लिए मक्का, ज्वार, बाजरा एवं लोबिया की बुआई करने, ओल की रोपाई 75 गुणा 75 सेंटीमीटर की दूरी पर करने की राय दी गयी है.
जबकि रोपाई के लिए 0.5 किलोग्राम के कन्द का व्यवहार करने, रोपाई से पूर्व कटे कन्द को ट्राइकोडर्मा भिरीडी के 5.0 ग्राम मात्र को प्रति लीटर गोबर के घोल में मिलाकर 20-25 मिनट तक डुबोकर उपचारित करने के बाद लगाएं ताकि मिट्टी जनित बीमारी लगने की संभावना को रोका जा सके. सब्जी उपजाने वाले किसानों को गरमी वाली सब्जियां जैसे भिन्डी, नेनुआ, करैला, लौकी, और खीरा की फसल में आवश्यकतानुसार निकाई-गुड़ाई करें.
खीरा वर्गीय फसलों में चूर्णील फफूंदी नामक बीमारी से बचाव के लिए 0.06 प्रतिशत केराथेन नामक दवा का छिड़काव करें. लत्तर वाली सब्जियों जैसे नेनुआ, करैला, लौकी, और खीरा में लाल भृंग कीट से बचाव के लिए डाइक्लोरफॉस 76 ईसी दवा को 1 मिली प्रति लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें. भिंडी फसल में माइट कीट की निगरानी करते रहे.
प्रकोप दिखाई देने पर ईथियांन नामक दवा के 1.5 से 2 मिली प्रति लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करने की सलाह दी है. मूंग, उरद की तैयार फलियों की तुड़ाई कर ले तथा मक्का के भुट्टों से दाना निकालने का कार्य यथा शीघ्र करने की भी बात कही गयी है.
वहीं पशुपालकों को दूधारु पशुओं के रख-रखाव एवं खान पान पर विशेष ध्यान देने, खाने में प्रोटीन की मात्र बढ़ाने, दुधारु पशुओं को नियमित रुप से दाने के साथ कैल्सियम भी खिलाने की बात कही गयी है. साथ ही अधिक मात्र में स्वच्छ पानी पिलाने की बात कही गयी है.
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