जान बचाकर घरों, दुकानों व दफ्तरों से भागे लोग

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 13 May 2015 1:27 AM

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समस्तीपुर : जिले में मंगलवार की दोपहर आये भूकंप के दौरान बाजार की स्थिति काफी भयावह बन गयी थी. भूकंप की आभास होते ही हर कोई इधर-उधर भागना शुरू कर दिया था. सभी की नजरें सेफ जोन को तलाश कर रही थी. भूकंप के दौरान जान बचाने के लिए लोग सुरक्षित स्थल की ओर भाग […]

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समस्तीपुर : जिले में मंगलवार की दोपहर आये भूकंप के दौरान बाजार की स्थिति काफी भयावह बन गयी थी. भूकंप की आभास होते ही हर कोई इधर-उधर भागना शुरू कर दिया था. सभी की नजरें सेफ जोन को तलाश कर रही थी.
भूकंप के दौरान जान बचाने के लिए लोग सुरक्षित स्थल की ओर भाग रहे थे. हर तरफ अफरातफरी का माहौल था. लेकिन बाजार में रहने वाले परिवार एवं व्यवसायियों को खुला मैदान तक नहीं मिल रहा था.
खासकर बाजार में महिला एवं बच्चों के साथ रहने वालों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. महिला एवं बच्चों को लेकर लोग घरों से बाहर निकल कर सड़क पर आ गये थे. इसके बावजूद भी वे अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे थे. एक अनजाना डर फिर भी उनके जेहन में बना हुआ था. काफी दूर निकलने के बाद भी वे बड़ी-बड़ी इमारतों से वे अपने आप को दूर नहीं कर पा रहे थे.
संकरी गलियों से निकल कर लोग चौड़ी सड़कों पर तो पहुंच गये थे. इसके बावजूद मौत उनके सिरों पर ही नाचती दिख रही थी. क्योंकि मकड़ी के जाल की तरह बाजार में बिछी बिजली की तार लोगों के सिर के उपर झूलता दिख रहा था. लोग काफी कोशिशों के बाद भी अपने आप को उन बिजली की तारों से अलग नहीं कर पा रहे थे. घंटों तक लोग अपने बाल-बच्चों के सड़क किनारे खड़े रहे. मात्र एक घंटे के अंदर पांच-पांच मर्तबा आये भूकंप के झटकों ने लोगों को काफी डरा दिया था. महिलाएं एवं बच्चे अपने घरों की ओर जाने से भी कतरा रहे थे.
साइलेंट हुआ मोबाइल
भूकंप में अपने परिजनों का हाल जानने के लिये लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ी. बार बार नंबर डायल करने पर भी दूसरी ओर से किसी तरह की सूचना नहीं मिल पा रही थी. जिससे परिजनों में बेचेनी थी. इसमें निजी टेलीफोन ऑपरेटरों का हाल भी एक ही जैसा रहा. मोबाइल की घंटियां बंद ही रही.
लगभग एक घंटे के बाद ही लोगों को अपने परिजनों का हालचाल जानने में कामयाबी मिली. भूकंप के दौरान मोबाइल के साइलेंट हो जाने के बाद इंटरनेट पर व्हाट्सअप ने लोगों को कुछ राहत दिया. लोग व्हाट्सअप पर मैसेज करके अपने से दूर रह रहे परिजनों एवं संबंधियों का हाल-चाल जान रहे थे. भूकंप ने वाहन चालकों को अचंभित कर दिया.
तेज रफ्तार पर भागती वाहनों का संतुलन बिगड़ने लगा था. चालकों की मानें तो उनके टायरों के नीचे से जमीन खिसकनी लगी थी. पहले तो चालकों को लगा कि उनकी तबीयत ही गड़बड़ हो रही है. लेकिन डोलती हुई सड़कों ने सबकुछ समझा दिया. इसके बाद तो वाहनों की कतारें सड़कों पर लगनी लगी. बाइक, टेंपो, बस, स्कॉर्पियो की लंबी कतारें सड़कों पर लग
गयी थी.
मकान छोड़ भागे किरायेदार
शहर की संकरी गलियों में बने मकान में रह रहे कई किरायेदार भूकंप से भयभीत हो अपने गांव की ओर मंगलवार की शाम पलायन कर गये. इनका कहना था कि यहां आपदा की घड़ी में जान बचाना भी मुश्किल प्रतीत होता है. शहर में अधिकांशत: मकान भूकंपरोधी नहीं बने हैं. और न ही आस पास खुला मैदान ही है. जहां भाग कर आपात स्थिति में लोग अपनी जान बचा सके.
भाग खड़े हुए बैंककर्मी
भूकंप के दौरान सिर्फ अपनी जान के सिवा किसी को किसी चीज की फिक्र नहीं थी. हर कोई अपनी जान बचाने के फिराक में था. बैंक जैसे संवेदनशील जगहों पर भी कुछ यही आलम दिखा.
जिसे जहां से निकलने का मौका मिला वह वहीं से निकल गया. उस समय न तो उन्हें बैंकों में पड़े लाखों के कैश और न ही नौकरी की फिक्र रही. हालांकि उन्हें आपदा की घड़ी में बैंक से भागने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. क्योंकि सुरक्षा की दृष्टि से बैंकों के गेट में जंजीर लगे हुए थे. जिस कारण गेट से निकलने में लोगों को परेशानी हो रही थी. कई लोगों को तो हल्की चोटें भी आयी.
क्या शहर, क्या गांव हर तरफ था दहशत का माहौल
समस्तीपुर : क्या शहर क्या गांव भूकंप के झटकों से मंगलवार की दोपहर बाद से हर तरफ दहशत का माहौल कायम था. दोपहर बाद भूकंप के कई झटके महसूस किये गये. मंगलवार को आयी भूकंप के पहले झटके में लोगों को अचानक जमीन के नीचे धंस जाने जैसा महसूस हुआ.
इसके बाद घरों में बैठे लोगों को धरती में कंपन्न होने लगी घरों में रखे बर्तन व खिड़की-दरवाजे हिलने लगी, छतों में कड़ी के सहारे टंगा पंखा अचानक हिलने लगा. साथ ही घर के उपरी जगहों पर रखी वस्तुएं गिरने लगी. भूकंप के एहसास के साथ ही लोगों में अफरातफरी मच गयी, इसके बाद लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकल कर शोर मचाने लगे. काफी लोगों की समझ में ही नहीं आया कि ऐसा क्यों हो रहा है.
पहला भूकंप का झटका दोपहर 12 बजकर 39 मिनट पर महसूस किया गया. यह करीब एक मिनट कर जारी रहा. लोग आनन-फानन में घरों से निकलकर बाहर खुले स्थान की तरफ भागे. कुछ समय के लिए अफरातफरी का माहौल कायम हो गया था. हालांकि भूकंप के झटकों से जिले में काफी कम नुकसान हुआ है.
मरीजों में मची अफरातफरी
भूकंप के दौरान अस्पतालों में भी मरीजों के बीच अफरा-तफरी मच गयी थी. भूकं प की दहशत की मार मरीजों पर साफ देखने को मिल रहा था.
जैसे ही भूकंप का एहसास हुआ सदर अस्पताल के बेडों पर पड़े मरीज अपनी जान को हथेली पर लेकर भाग खड़े हुए. कई जगहों पर अस्पतालों में भर्त्ती मरीज जान बचाने के लिये चढ रहे सलाइन के बोतलों के साथ ही भाग खड़े हुए.
हर किसी को अपनी जान की फिक्र थी. मरीज के साथ-साथ उसके परिजन ही नहीं डाक्टर व अस्पतालकर्मी भी भाग खुले स्थलों की ओर भाग गये थे. अफरातफरी का यह दौर लगभग दो बजे तक जारी रहा. इसके बाद ही मरीज वापस अपने बेड पर पहुंचे.
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