स्टेडियम को तीरंदाजी स्टेडियम बनाने पर खेल संघ ने जताई आपत्ति

स्टेडियम को तीरंदाजी स्टेडियम बनाने पर खेल संघ ने जताई आपत्ति
जिला के 15 खेल संघों ने साथ मिलकर जिला पदाधिकारी को दिया आवेदन खिलाड़ियों के हित, खेल के हित के लिए स्टेडियम को एथलेटिक्स व फुटबॉल के मैदान में करें विकसित सहरसा . पिछले वर्ष प्रगति यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा सहरसा में बेहतर खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने की दिशा में पहल की गयी थी. जिसके तहत स्पोर्ट्स कांप्लेक्स बनाने की बात की गयी थी. स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के लिए जगह नहीं मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा स्टेडियम को खेल के लिए बेहतर एवं आकर्षक बनाने का निर्णय लिया गया. इसके तहत स्टेडियम में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक एवं फुटबॉल का मैदान, मल्टीपरपज हॉल, प्रशासनिक भवन, एवं बास्केटबॉल, वॉलीबॉल एवं लॉन्ग टेनिस के कोर्ट बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गयी. जिसका निविदा भी निकल गया एवं उसके बाद जनवरी माह में संवेदक द्वारा कार्य प्रारंभ भी कर दिया गया. लेकिन बिहार राज्य खेल प्राधिकरण द्वारा फिर से कार्य को रोकते इस स्टेडियम को तीरंदाजी स्टेडियम के रूप में विकसित करने का कार्य किया जा रहा है. जिस पर विभिन्न खेल संघ के अध्यक्ष, सचिवों ने आपत्ति जतायी है. साथ ही जिलाधिकारी से आग्रह किया है कि जिस तरह पूर्व में एथलेटिक्स एवं फुटबॉल का मैदान बनाया जा रहा था, वही बनाया जाये. स्टेडियम के पूर्वी दिशा में अतिक्रमण को अति शीघ्र अतिक्रमण मुक्त कराया जाये. इस मौके पर जिला हॉकी संघ अध्यक्ष सुनील कुमार झा ने कहा कि यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय है. बिहार राज्य खेल प्राधिकरण को यह जानकारी नहीं है कि यहां पर तीरंदाजी का कोई भविष्य नहीं है. यहां पर निश्चित रूप से एथलेटिक्स एवं फुटबॉल का मैदान बनना चाहिए. साथ ही जिला स्कूल में क्रिकेट एवं पटेल मैदान या केंद्रीय विद्यालय में हॉकी का मैदान जिला प्रशासन को डेवलप करना चाहिए. इस मौके पर क्रीड़ा भारती के प्रांतीय अध्यक्ष चंद्रशेखर अधिकारी ने कहा कि यह निर्णय सरकार को वापस लेना चाहिए. यहां पर एथलेटिक्स एवं फुटबॉल के मैदान के साथ खूबसूरत मल्टीपरपज हॉल का निर्माण कराया जाना चाहिए. जिलाधिकारी से इस बात को लेकर आग्रह किया गया है. बात नहीं बनी तो आंदोलन का रुख अपनायेंगे. जिला फुटबाल संघ सचिव अशफाक आलम ने कहा कि स्टेडियम में एथलेटिक्स एवं फुटबॉल की जगह अन्य खेलों को प्राथमिकता दी जाती है तो यह खेल जगत एवं फुटबॉल के लिए काफी दुर्भाग्यपूर्ण होगा. निश्चित रूप से यहां पर फुटबॉल व एथलेटिक्स का मैदान बनाया जाये. जिला बाल बैडमिंटन संघ सचिव अंशु मिश्रा ने कहा कि कोसी प्रमंडल का मात्र एक स्टेडियम जिसे बर्बाद होने से बचाना है तो इस इलाके में जो विकसित खेल एथलेटिक्स व फुटबॉल पर जिला प्रशासन को ध्यान देना चाहिए. जिला कबड्डी संघ सचिव आशीष सिंह ने कहा कि कोई भी खिलाड़ी को पहले दौड़ना पड़ता है. अपना शरीर स्वस्थ रखना पड़ता है. फिर वह किसी खेल विधा का सदस्य होता है. इसलिए एथलेटिक्स का मैदान जरूर बनना चाहिए. उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की कि स्टेडियम सहरसा में एथलेटिक्स व फुटबॉल का मैदान बनाया जाये. जिला तैराकी संघ सचिव चंदन कुमार, जिला हैंडबॉल संघ सचिव नीतीश मिश्रा, जिला रस्सा कसी संघ सचिव विप्लव रंजन ने जिला साइकलिंग संघ सचिव दर्शन कुमार गुड्डू, जिला योग संघ सचिव अमन कुमार सिंह, जिला खेल संघ सचिव सह जिला एथलेटिक्स एवं वॉलीबॉल संघ सचिव रोशन सिंह धोनी ने कहा कि सहरसा सहित कोसी में तीरंदाजी का कोई इतिहास नहीं रहा है. प्रमंडल मुख्यालय होने के बावजूद भी यहां 30 वर्षों से स्टेडियम को तरस रहा है. ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री के प्रयास से स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के रूप में सहरसा स्टेडियम को डेवलप करने की बात कही गयी. जो फलीभूत होता भी दिख रहा है. लेकिन बिहार राज्य खेल प्राधिकरण द्वारा स्टेडियम को तीरंदाजी का स्टेडियम बनाना यह काफी अचंभित करने वाली बात है. सहरसा से लगातार एथलेटिक्स एवं फुटबॉल के बच्चे राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शिरकत कर रहे हैं. अब राष्ट्रीय प्रतियोगिता में मेडल भी ला रहे हैं. एथलेटिक्स एवं फुटबॉल से कई खिलाड़ियों ने बिहार सरकार में मेडल लो नौकरी पाओ की नीति पर भी अपना कदम बढ़ाया है. लगभग तीन हजार एथलीट जिला एथलेटिक संघ से निबंधित हैं. लगभग दो सौ फुटबॉलर जो जिला फुटबाल संघ से संबंधित हैं. कोसी प्रमंडल के मुख्यालय में निश्चित ही एथलेटिक्स, फुटबॉल के साथ क्रिकेट के मैदान को भी बिहार राज्य खेल प्राधिकरण द्वारा विकसित किया जाये. सहरसा में दिन प्रतिदिन खेल का माहौल बेहतर हो रहा है. तीरंदाजी उत्तर बिहार के किसी जिलों में विकसित नहीं है. इसे विकसित करना भी कठिन है. सबों ने खिलाड़ियों के हित, खेल के हित के लिए इसे एथलेटिक्स एवं फुटबॉल के मैदान में विकसित करने की मांग की.
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