दरभंगा एम्स पर नया विवाद, कोशी विकास संघर्ष मोर्चा ने मांगा श्वेत पत्र, बोले- जनता को गुमराह करना बंद करे सरकार

सहरसा – प्रवीण आनंद व विनोद कुमार झा
Saharsa News: दरभंगा एम्स को लेकर एक बार फिर सियासत और सवाल दोनों तेज हो गए हैं. कोशी विकास संघर्ष मोर्चा ने दावा किया है कि परियोजना की वास्तविक प्रगति और सरकारी दावों में बड़ा अंतर है. मोर्चा ने केंद्र सरकार से श्वेत पत्र जारी कर अब तक हुए खर्च, निर्माण कार्य और टेंडर प्रक्रिया की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है.
सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट.
Saharsa News: दरभंगा एम्स परियोजना को लेकर कोशी विकास संघर्ष मोर्चा ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं. मोर्चा के संरक्षक प्रवीण आनंद और अध्यक्ष विनोद कुमार झा ने आरोप लगाया है कि दरभंगा एम्स के निर्माण को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार मुख्य निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है. नेताओं ने केंद्र सरकार से परियोजना पर विस्तृत श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है.
आरटीआई के दस्तावेजों का हवाला देकर उठाए सवाल
मोर्चा नेताओं का कहना है कि सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी से पता चलता है कि दरभंगा एम्स के मुख्य भवन निर्माण पर अभी तक कोई वास्तविक निर्माण व्यय नहीं हुआ है. उनका दावा है कि परियोजना की टेंडर प्रक्रिया अब भी जारी है. इसके बावजूद निर्माण कार्य में तेजी और प्रगति के दावे किए जा रहे हैं, जो जनता को भ्रमित करने जैसा है.
310 करोड़ की मिट्टी भराई और 40 करोड़ के गेट पर सवाल
मोर्चा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने लगभग 155 एकड़ भूमि पर मिट्टी भराई के लिए करीब 310 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे, लेकिन अब तक निर्माण योग्य भूमि पूरी तरह तैयार नहीं हो सकी है. साथ ही करीब 40 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए भव्य प्रवेश द्वार को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं. नेताओं का कहना है कि सामान्य प्रक्रिया में पहले भूमि का समतलीकरण और तकनीकी परीक्षण होता है, उसके बाद भवन निर्माण शुरू किया जाता है.
निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
कोशी विकास संघर्ष मोर्चा ने वर्ष 2023 और 2024 की निरीक्षण रिपोर्ट, भूमि की उपयुक्तता संबंधी फाइल नोटिंग और अन्य तकनीकी दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है. नेताओं का कहना है कि परियोजना से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां अब तक सार्वजनिक नहीं की गई हैं, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
सहरसा में एम्स की मांग भी हुई तेज
मोर्चा ने कोसी क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए सहरसा में एम्स स्थापित करने की मांग दोहराई है. नेताओं ने कहा कि यदि दरभंगा एम्स परियोजना में पारदर्शिता नहीं लाई गई और मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को सड़क से लेकर न्यायालय तक ले जाया जाएगा.
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लेखक के बारे में
By प्रत्युष प्रशांत
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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